तीन इंजीनियर, करोड़ों की संपत्ति: तेजस्वी यादव के आरोप
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 2 सितंबर 2025 — बिहार की राजनीति में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर से बवंडर खड़ा हो गया है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बिहार में सरकार के संरक्षण में संगठित भ्रष्टाचार चरम पर है.
तेजस्वी यादव के अनुसार, राज्य के एक वरिष्ठ मंत्री के अधीन कार्यरत तीन इंजीनियरों के पास से करीब 900 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति सामने आई है.उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर इस मुद्दे को उठाते हुए सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सवाल दागे हैं.
तीन इंजीनियर, करोड़ों की संपत्ति: तेजस्वी यादव के आरोप
तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि,
पहले इंजीनियर के घर से 13 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए, जिसकी कुल संपत्ति 500 करोड़ रुपये बताई जा रही है.
दूसरे इंजीनियर ने ईओयू (आर्थिक अपराध इकाई) की रेड से पहले 10 करोड़ रुपये के नोट जलाए, लेकिन फिर भी उसके पास से करोड़ों की संपत्ति मिली. उसकी अनुमानित संपत्ति 100 करोड़ की है.
तीसरे इंजीनियर के पास 300 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का आरोप है.
तेजस्वी ने इन मामलों को संगठित संस्थागत भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह सिर्फ तीन नमूने हैं, पूरे सिस्टम में भ्रष्टाचार बहुत गहरा है.
क्या मुख्यमंत्री सीधे लेन-देन में शामिल हैं?
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि क्या वे खुद उस मंत्री के आवास पर जाकर लेन-देन की निगरानी करते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का ऐसे लोगों से मिलना, जिनके खिलाफ ठोस सबूत मौजूद हैं, कई सवाल खड़े करता है.
बिहार की जनता भ्रष्टाचार की गवाह है
तेजस्वी यादव ने कहा कि आज बिहार का हर नागरिक ब्लॉक से लेकर थाना स्तर तक फैले भ्रष्टाचार का शिकार है. उन्होंने कहा कि 14 करोड़ बिहारी इस व्यवस्था की पोल खोलने को तैयार हैं और अब जनता चुप नहीं बैठेगी.
ये भी पढ़े :दो भाई, वोट चोरों की तबाही! राहुल गांधी की हुंकार और सत्ता की बौखलाहट
ये भी पढ़े :वोटर अधिकार यात्रा बनी लोकतंत्र की नई आवाज, बिहार से बदलाव की दस्तक
क्या कहती है जनता और विपक्ष?
विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहा है और नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है.हालांकि, सरकार की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.वहीं, सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है और लोग ईओयू की कार्रवाई पर निगरानी रखे हुए हैं.
निष्कर्ष: भ्रष्टाचार पर सवाल, जवाब की प्रतीक्षा
बिहार में कथित 900 करोड़ के भ्रष्टाचार ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है.तेजस्वी यादव के आरोपों ने जहां सत्तारूढ़ एनडीए सरकार पर दबाव बढ़ाया है, वहीं जनता अब इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रही है.
क्या ईओयू की जांच सही दिशा में जाएगी?
क्या नीतीश कुमार इन आरोपों का जवाब देंगे?
और सबसे बड़ा सवाल — क्या बिहार को इस भ्रष्टाचार की जड़ से मुक्ति मिलेगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे.
मेरा नाम रंजीत कुमार है और मैं समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर (एम.ए.) हूँ. मैं महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर गहन एवं विचारोत्तेजक लेखन में रुचि रखता हूँ। समाज में व्याप्त जटिल विषयों को सरल, शोध-आधारित तथा पठनीय शैली में प्रस्तुत करना मेरा मुख्य उद्देश्य है.
लेखन के अलावा, मूझे अकादमिक शोध पढ़ने, सामुदायिक संवाद में भाग लेने तथा समसामयिक सामाजिक-राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा करने में गहरी दिलचस्पी है.



















