बिहार की सड़कों पर बंद और राजनीति, छात्रों का भविष्य खतरे में !
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 4 सितंबर 2025 — बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है. आज हुए बिहार बंद ने आम लोगों को तो परेशान किया ही, लेकिन सबसे ज्यादा चोट छात्रों और उनके अभिभावकों को लगी.सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने पूरे माहौल को और गरमा दिया, जिसमें परीक्षा देने जा रही एक मासूम बच्ची को रोक दिया गया. इस घटना ने न सिर्फ लोगों की भावनाओं को झकझोर दिया बल्कि राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है.
विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने NDA सरकार और सत्ताधारी दलों BJP-JDU पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि आज बिहार बंद के नाम पर खुली गुंडागर्दी हो रही है.उनका आरोप है कि अगर छात्राओं को भी परीक्षा देने से रोका जाएगा तो यह केवल राजनीति नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है.
आइये, आगे जानते हैं विस्तार से कि बिहार बंद के दौरान क्या हुआ, मुकेश सहनी ने क्या कहा और इस पूरे विवाद पर जनता क्यों नाराज़ है.
परीक्षा केंद्र जाते वक्त रोकी गई छात्रा, उठा बड़ा सवाल
बिहार बंद के दौरान एक मासूम छात्रा को परीक्षा देने से रोक दिए जाने का मामला सामने आया है. यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हंगामा मच गया. सवाल यह है कि अगर बंद की वजह से छात्रों तक की परीक्षा रुक जाए तो क्या यह लोकतांत्रिक विरोध कहलाएगा या प्रशासनिक नाकामी?
मुकेश सहनी का सरकार पर सीधा हमला
विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने NDA सरकार को कठघरे में खड़ा किया है.उन्होंने X (ट्विटर) पर लिखा— “बिहार बंद के नाम पर BJP-JDU की खुली गुंडागर्दी! एग्जाम देने जा रही बच्ची तक को रोका गया. क्या NDA सरकार छात्रों का भविष्य बर्बाद करने ही राजनीति करेगी?
उनका यह बयान न केवल वायरल हुआ बल्कि छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश की लहर भी दौड़ गई.
ये भी पढ़े :लालू प्रसाद यादव का तीखा वार: क्या मोदी ने बिहारियों को गाली देने का आदेश दिया है?
ये भी पढ़े :तेजस्वी यादव का प्रधानमंत्री पर सीधा हमला – माँ तो माँ होती है
प्रशासन की नाकामी या सत्ता की जिद?
बंद और विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन छात्रों को परीक्षा देने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहरी चोट है.यह सवाल अब चर्चा में है कि क्या सरकार विरोध को संभालने में पूरी तरह विफल रही या फिर सत्ता की राजनीति ने छात्रों को बलि का बकरा बना दिया?
शिक्षा के साथ खिलवाड़, कब तक जारी रहेगा?
बिहार पहले ही शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों के कारण सुर्खियों में रहता है. अब अगर बंद और हड़ताल की वजह से परीक्षाएं भी प्रभावित होंगी, तो यह छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है.विपक्ष का कहना है कि सरकार को विरोध जताने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन निर्दोष छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा में बाधा डालना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
जनता की निगाहें और बढ़ता आक्रोश
यह विवाद केवल एक छात्रा तक सीमित नहीं है.यह मुद्दा अब बिहार की जनता के बीच गहराई से उठने लगा है.अभिभावक कह रहे हैं कि अगर उनके बच्चों की पढ़ाई और भविष्य सुरक्षित नहीं है तो फिर सरकार का विकास का दावा खोखला है. मुकेश सहनी का बयान इस आक्रोश को और तेज कर गया है.जनता अब पूछ रही है— क्या हमारी राजनीति इतनी गिर चुकी है कि मासूम बच्चों का भविष्य भी दांव पर लगाया जाएगा?
निष्कर्ष
बिहार बंद की इस घटना ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.मुकेश सहनी का हमला अब केवल एक राजनीतिक बयान नहीं बल्कि जनता की आवाज़ बनता जा रहा है. अगर छात्रों की पढ़ाई और परीक्षाओं को राजनीति की भेंट चढ़ाया गया, तो यह सरकार की सबसे बड़ी नाकामी के रूप में दर्ज होगा.
मेरा नाम रंजीत कुमार है और मैं समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर (एम.ए.) हूँ. मैं महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर गहन एवं विचारोत्तेजक लेखन में रुचि रखता हूँ। समाज में व्याप्त जटिल विषयों को सरल, शोध-आधारित तथा पठनीय शैली में प्रस्तुत करना मेरा मुख्य उद्देश्य है.
लेखन के अलावा, मूझे अकादमिक शोध पढ़ने, सामुदायिक संवाद में भाग लेने तथा समसामयिक सामाजिक-राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा करने में गहरी दिलचस्पी है.



















