प्रो. जगदीप चौकड़: लोकतंत्र की पारदर्शिता के प्रहरी का निधन
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली, 13 सितंबर 2025 – लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शी राजनीति की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाले प्रोफेसर जगदीप चौकड़ के निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर है. वे एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के सह-संस्थापक रहे और अपने जीवनभर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, साथ ही राजनीतिक व्यवस्था में ईमानदारी और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए समर्पित रहे.
लोकतंत्र को नया आयाम देने वाले योद्धा
प्रो. चौकड़ ने अपने विचारों और संघर्षों से लोकतंत्र की परिभाषा को और गहराई दी. उन्होंने केवल चुनावी सुधार की बात नहीं की, बल्कि उस पर अमल के लिए लगातार संघर्षरत रहे.चुनावी बॉन्ड्स के खिलाफ उनकी लड़ाई ने राजनीतिक चंदे की अपारदर्शी व्यवस्था को लेकर देशव्यापी बहस को जन्म दिया.
हालिया संघर्ष और प्रेरणा
हाल ही में बिहार में हुए व्यापक मताधिकार हनन और चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ भी वे मुखर रहे। उन्होंने न सिर्फ आवाज उठाई बल्कि इस बात को राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बनाने का काम किया। उनकी सक्रियता ने नागरिक समाज और युवा पीढ़ी दोनों को प्रेरित किया.
श्रद्धांजलि का सबसे बड़ा स्वरूप
भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने प्रो. चौकड़ के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि,उनकी सबसे बड़ी विरासत यही है कि हम आगामी चुनावों में व्यापक मताधिकार हनन और चुनावी धोखाधड़ी के खिलाफ उनकी लड़ाई को और मजबूती से आगे बढ़ाएं. यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
नागरिक सक्रियता की विरासत
प्रो. चौकड़ का जीवन बताता है कि लोकतंत्र सिर्फ संविधान की किताबों में नहीं बल्कि आम जनता की जागरूकता और साहस में जीवित रहता है.उन्होंने सत्ता से टकराने में कभी संकोच नहीं किया और जनता के पक्ष में खड़े रहे.

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