महिला आरक्षण, जनगणना और परिसीमन पर गरमाई सियासत: प्रियंका गांधी का केंद्र सरकार पर सीधा सवाल

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Ajit Kumar

भारत
महिला आरक्षण, जनगणना और परिसीमन पर गरमाई सियासत: प्रियंका गांधी का केंद्र सरकार पर सीधा सवाल

महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना और परिसीमन क्यों? कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली 16 अप्रैल 2026: लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है.उन्होंने महिला आरक्षण, जनगणना और परिसीमन को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए, जो अब देश की राजनीति के केंद्र में आ गया हैं.
कांग्रेस के आधिकारिक X (Twitter) हैंडल Indian National Congress (@INCIndia) के हवाले से दिए गए अपने वक्तव्य में प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिला सशक्तिकरण और उनके राजनीतिक अधिकारों के पक्ष में रही है.

महिलाओं को वोट का अधिकार: भारत बनाम अमेरिका

प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि भारत में महिलाओं को मतदान का अधिकार आजादी के पहले दिन से ही मिल गया था.इसके विपरीत United States जैसे विकसित देश में महिलाओं को इस अधिकार के लिए लगभग 150 वर्षों का लंबा इंतजार करना पड़ा है.

यह तुलना इस बात को दर्शाती है कि भारत ने शुरुआत से ही लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को महत्व दिया है.

पंचायत से संसद तक: कांग्रेस का महिला आरक्षण पर स्टैंड

कांग्रेस ने अपने वक्तव्य में यह भी याद दिलाया कि पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला कांग्रेस सरकार के समय ही लिया गया था. इससे लाखों महिलाओं को राजनीति में आने और नेतृत्व करने का अवसर मिला है .

प्रियंका गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है.

2023 का विधेयक और नई बहस

साल 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक में यह प्रावधान रखा गया था कि इसे लागू करने से पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.इसी बिंदु को लेकर अब कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया हैं.

प्रियंका गांधी ने पूछा कि क्या सरकार अब अपने ही बनाए नियमों से पीछे हट रही है? यदि हां, तो इसके पीछे क्या कारण हैं?

जनगणना और प्रतिनिधित्व का गहरा संबंध

अपने भाषण में उन्होंने जोर देकर कहा है कि प्रतिनिधित्व का मुद्दा सीधे तौर पर जनसंख्या से जुड़ा होता है. जब तक सटीक आंकड़े नहीं होंगे, तब तक सभी वर्गों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकता.

उन्होंने विशेष रूप से जातिगत जनगणना की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि इसके बिना सामाजिक संतुलन बनाना मुश्किल है.

OBC अधिकारों पर उठे सवाल

प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने की कोशिश OBC वर्ग के अधिकारों को कमजोर कर सकती है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर पिछड़े वर्गों के अधिकारों से समझौता नहीं करेगी और इसके खिलाफ मजबूती से खड़ी रहेगी.

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कांग्रेस का स्पष्ट रुख: महिला आरक्षण के साथ कोई समझौता नहीं

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में दोहराया कि वह महिला आरक्षण के समर्थन में पहले भी खड़ी थी और आगे भी रहेगी। पार्टी का मानना है कि इस कानून को बिना किसी शर्त के लागू किया जाना चाहिए, ताकि महिलाओं को जल्द से जल्द उनका अधिकार मिल सके.

राजनीतिक संदेश और आगामी रणनीति

प्रियंका गांधी का यह भाषण केवल एक संसदीय बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले चुनावों के लिए कांग्रेस की रणनीति का भी संकेत देता है.महिला वोट बैंक, सामाजिक न्याय और OBC प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर कांग्रेस सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है.

निष्कर्ष: महिला आरक्षण पर निर्णायक मोड़

महिला आरक्षण, जनगणना और परिसीमन जैसे मुद्दे अब केवल नीतिगत चर्चा नहीं रह गए हैं, बल्कि यह देश की राजनीतिक दिशा तय करने वाले अहम विषय बन चुके हैं.

प्रियंका गांधी के बयान ने इन मुद्दों को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है.अब देखना यह होगा कि सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है और महिला आरक्षण कानून को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है.

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