बिहार में मतदाता सूची से नाम कटवाने की साजिश: माले का आरोप
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 15 सितम्बर 2025 – बिहार में जारी राजनीतिक हलचल के बीच भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने राज्य सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए है. उन्होंने कहा कि बिहार के नौजवान गहरे असंतोष की स्थिति में हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को सुलझाने के बजाय सरकार दमनकारी रवैया अपना रही है.भाजपा कार्यालय पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को रखने पहुंचे युवाओं पर पुलिस द्वारा किया गया बर्बर लाठीचार्ज इसका स्पष्ट प्रमाण है.
भट्टाचार्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार सरकार को नेपाल से सबक लेना चाहिए.उन्होंने कहा – बिहार को नेपाल मत बनाइए. लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाकर कभी स्थायी समाधान नहीं निकल सकता है. सरकार की पहली जिम्मेदारी है कि वह जनता की शिकायतें सुने, न कि लाठी-डंडे के सहारे उन्हें चुप कराए.
नेपाल की स्थिति पर टिप्पणी
माले महासचिव ने नेपाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ असंतोष और विद्रोह की स्थिति ने प्रधानमंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया और संसद तक में आगजनी हुई.हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि नेपाल अब राजशाही की ओर नहीं जाएगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही मजबूत बनाएगा.
साथ ही, उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया बयान की कड़ी आलोचना किया है. जिसमें कहा गया था कि नेपाल को भारत में शामिल नहीं किए जाने के कारण आज की स्थिति उत्पन्न हुई.भट्टाचार्य ने कहा कि इस तरह के बयान न केवल गैर-जिम्मेदाराना हैं, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों को कमजोर करने वाले भी हैं.उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ बराबरी और सम्मानजनक आधार पर रिश्ते बनाने चाहिए.
मतदाता सूची से नाम कटवाने की साजिश का आरोप
संवाददाता सम्मेलन में माले नेताओं ने भाजपा पर वोट चोरी का भी आरोप लगाया है .उनका कहना था कि पहले चरण में ही लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए थे और अब ड्राफ्ट सूची से भी नाम हटाने की कोशिशें हो रही हैं.खासकर गरीब, दलित, मुसलमान और माले समर्थकों के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं.
भट्टाचार्य ने उदाहरण देते हुए बताया कि आरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा विधायक अमरेन्द्र प्रताप सिंह और भाजपा से जुड़े बूथ लेवल एजेंट (BLA) ने बूथ संख्या 368 और 369 के 220 गरीब मतदाताओं का नाम हटाने और उन्हें संदेश विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित करने का आवेदन दिया. इसी तरह, बूथ संख्या 156 पर भाजपा बीएलए मनीष कुमार ने 93 गरीबों का नाम हटाने का प्रयास किया है. हालांकि, माले समर्थित बीएलए के हस्तक्षेप से यह आवेदन खारिज हो गया.
माले नेताओं का कहना था कि अब तक सिर्फ आरा जिले में ही 63 बूथों पर करीब 887 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किया गया है. लेकिन प्रशासन न तो इन मामलों को गंभीरता से ले रहा है और न ही इन्हें दावा-आपत्ति की सूची में प्रदर्शित कर रहा है.
ये भी पढ़े :नेपाल में मीडिया पर हमला: भारतीय “गोदी मीडिया” के लिए एक चेतावनी
ये भी पढ़े :पटना में आइसा–आरवाईए का प्रदर्शन, नीतीश–मोदी का पुतला दहन
भाजपा की साजिश पर माले की नजर
भाकपा-माले ने दावा किया कि उनके बूथ लेवल एजेंट्स की सतर्कता के कारण भाजपा की साजिश पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही है. फिर भी गरीब, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश लगातार जारी है.
माले नेताओं ने कहा कि यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है. गरीब और वंचित तबकों की राजनीतिक भागीदारी को कमजोर करने की यह सोची-समझी रणनीति है, जिससे भाजपा चुनावी लाभ उठाना चाहती है.
आंदोलनकारियों से संवाद की मांग
माले महासचिव ने सरकार से अपील की कि दमनकारी नीतियों से बाज आकर आंदोलनरत युवाओं से बातचीत करे. उन्होंने कहा कि नौकरी से बर्खास्त किए गए युवाओं, संविदाकर्मियों और अन्य आंदोलनों से जुड़े लोगों की जायज मांगों पर ध्यान देना ही लोकतांत्रिक रास्ता है.
संवाददाता सम्मेलन को माले राज्य सचिव कुणाल, धीरेन्द्र झा, शिवप्रकाश रंजन, कयामुद्दीन अंसारी और अभ्युदय ने भी संबोधित किया. सभी नेताओं का कहना था कि बिहार में लोकतंत्र की रक्षा और गरीबों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए जनता को संगठित होकर इस लड़ाई में उतरना होगा.
यह पूरा घटनाक्रम बिहार की मौजूदा राजनीति में बड़ा सवाल खड़ा करता है – क्या राज्य सरकार जनता की आवाज सुनेगी या फिर दमन और साजिश के रास्ते पर ही आगे बढ़ेगी?

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.



















