पटना में नीतीश कुमार और मंत्री जीवेश मिश्रा का पुतला दहन

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में नीतीश कुमार और मंत्री जीवेश मिश्रा का पुतला दहन

पत्रकार दिलीप सहनी को न्याय दिलाने की मांग तेज

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 16 सितंबर 2025 –बिहार की राजनीति इन दिनों पत्रकार उत्पीड़न के मुद्दे पर उबाल पर है.अति पिछड़ा समाज से आने वाले पत्रकार दिलीप सहनी उर्फ दिवाकर के साथ बिहार सरकार के मंत्री जीवेश मिश्रा द्वारा कथित रूप से की गई मारपीट और मां-बहन की गाली गलौज के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ ने पटना में जोरदार प्रदर्शन किया गया.प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मंत्री जीवेश मिश्रा का पुतला दहन कर सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा प्रकट किया है.

विशाल जुलूस और नारेबाजी

विशाल जुलूस और नारेबाजी

राजद अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार सहनी के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक पार्टी के प्रदेश कार्यालय से जुलूस निकालकर पटना की सड़कों पर उतरे. नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं का यह जुलूस वीरचंद पटेल पथ से गुजरते हुए आयकर गोलंबर पहुंचा, जहां मुख्यमंत्री और मंत्री का पुतला दहन किया गया.प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह घटना सिर्फ एक पत्रकार पर हमला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है.

तेजस्वी यादव पूरी तरह संकल्पित – अरविंद कुमार सहनी

इस अवसर पर संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार सहनी ने कहा,
यह बिहार के इतिहास की पहली घटना है कि किसी मंत्री पर एफआईआर दर्ज करवाने के लिए नेता प्रतिपक्ष को खुद थाने जाना पड़ा है.तेजस्वी प्रसाद यादव ने दरभंगा के सिंधवारा थाना पहुंचकर जो कदम उठाया, वह इस बात का सबूत है कि वे सच और न्याय की लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं.

उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल रही है और सत्ता पक्ष की तानाशाही से समाज के कमजोर वर्ग खासकर अति पिछड़ा समाज के लोग प्रभावित हो रहे हैं. सहनी ने जोर देकर कहा कि राजद का संकल्प है कि सामाजिक न्याय की धारा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का कड़ा मुकाबला किया जाएगा

प्रवक्ता एजाज अहमद का कड़ा बयान

प्रवक्ता एजाज अहमद का कड़ा बयान

राजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने भी प्रदर्शन में भाग लेते हुए कहा कि पार्टी मंत्री जीवेश मिश्रा की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रखेगी.
यह सिर्फ एक पत्रकार की लड़ाई नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की लड़ाई है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव इस मुद्दे पर तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक दोषी मंत्री पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती.पूरे बिहार में आंदोलन की श्रृंखला जारी रहेगी – उन्होंने कहा.

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व्यापक विरोध की रणनीति

एजाज अहमद ने कार्यकर्ताओं से अपील किया कि वे गोलबंद होकर इस अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करें.उन्होंने कहा कि पत्रकारों की आवाज को दबाने की कोशिश कभी कामयाब नहीं होगी.
राजद के नेताओं का मानना है कि यह संघर्ष सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है बल्कि पूरे पत्रकार समुदाय और अति पिछड़ा समाज की गरिमा से जुड़ा हुआ है.

बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी

बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी

इस विरोध प्रदर्शन में कई प्रकोष्ठों के प्रदेश अध्यक्ष और नेताओं ने हिस्सा लिया. इनमें शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कुमर राय, पंचायती राज प्रकोष्ठ के अध्यक्ष महेंद्र विद्यार्थी, दिनेश पाल, उपेंद्र चंद्रवंशी, संजय बिंद, रेणु साहनी, विक्रम मंडल, नट बिहारी मंडल, नागेश्वर चौहान, रामाश्रय साहनी, चंदन साहनी, नटवर निषाद, राजा रविंद्र निषाद, राजू पंडित, धर्मेंद्र साहनी और उमा बिंद शाहिद समेत सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल रहे.

लोकतंत्र बनाम सत्ता का दुरुपयोग?

राजद नेताओं का आरोप है कि भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार लोकतंत्र की धारा को कमजोर करने की कोशिश कर रही है.पत्रकार दिलीप सहनी के साथ हुई घटना को उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग प्रेस की आज़ादी से डरते हैं और सच बोलने वालों की आवाज को दबाना चाहते हैं.
उनके मुताबिक, जब नेता प्रतिपक्ष को भी किसी मंत्री पर एफआईआर करवाने के लिए थाने जाना पड़े, तो यह स्थिति सरकार की विफलता और तानाशाही दोनों को दर्शाती है.

आगे की राह

राजद ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रहेगी.आने वाले दिनों में पूरे राज्य में प्रदर्शन, पुतला दहन और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी.पार्टी का लक्ष्य है कि दोषी मंत्री की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी तक आंदोलन रुकने वाला नहीं है.

निष्कर्ष

पटना का यह प्रदर्शन न केवल राजनीतिक हलचल को तेज कर गया है बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है.आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार सरकार इस विवादास्पद घटना पर क्या रुख अपनाती है.

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