लखीमपुर खीरी कोऑपरेटिव बैंक भर्ती घोटाले पर भड़के चंद्रशेखर आजाद ,योगी सरकार पर लगे गंभीर आरोप

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Ajit Kumar

भारत
लखीमपुर खीरी कोऑपरेटिव बैंक भर्ती घोटाले पर भड़के चंद्रशेखर आजाद ,योगी सरकार पर लगे गंभीर आरोप

यह सिर्फ भर्ती घोटाला नहीं, बल्कि संविधान पर हमला!

तीसरा पक्ष ब्यूरो लखनऊ, 19 सितम्बर 2025—उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भर्ती घोटाले को लेकर बवाल खड़ा हो गया है. इस बार निशाने पर है लखीमपुर खीरी कोऑपरेटिव बैंक की भर्ती प्रक्रिया, जिसमें कथित तौर पर भ्रष्टाचार और पक्षपात का बड़ा मामला सामने आया है.भीम आर्मी प्रमुख और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने इस भर्ती को सीधे-सीधे योगी आदित्यनाथ सरकार की जातिवादी मानसिकता और भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण बताया है.’

यह सिर्फ भर्ती घोटाला नहीं, बल्कि संविधान पर हमला!

चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल से पोस्ट करते हुए कहा कि लखीमपुर खीरी कोऑपरेटिव बैंक में गुपचुप तरीके से 27 भर्तियां की गईं. इनमें से 15 पद सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सजातीय लोगों को दिया गया है.उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरियां “रेवड़ी की तरह” बांटी गईं और ज्यादातर पद बीजेपी के मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और स्थानीय नेताओं के रिश्तेदारों को देदिया गया है.

आरक्षण नियमों की अनदेखी

आजाद ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों की खुली अवहेलना का भी आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि संविधान के प्रावधानों के बावजूद इस भर्ती में SC/ST वर्ग को सिर्फ 2 पद और OBC वर्ग को मात्र 6 पद दिया गया है. शेष पद सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को दे दिया गया है. जिससे सामाजिक न्याय और बराबरी के सिद्धांतों का हनन हुआ है.

उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार और जातिवाद की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब इस पूरे मामले की जांच के लिए नियुक्त अधिकारी भी उसी जाति से आया, जिसके परिवार को इस भर्ती का सीधा लाभ मिला है. आजाद के मुताबिक, उस अधिकारी ने अपने भतीजे को नौकरी दिलाकर पूरे प्रकरण को दबाने का प्रयास किया गया है.

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यह सिर्फ भर्ती घोटाला नहीं, बल्कि संविधान पर हमला

चंद्रशेखर आज़ाद ने इस घोटाले को सिर्फ नौकरी या भर्ती घोटाला नहीं, बल्कि संविधान और आरक्षण व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया है.उन्होंने कहा कि,

यह भर्ती घोटाला न केवल संविधान प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था की धज्जियां उड़ाता है, बल्कि दलित, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और गरीब युवाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है.यह SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और संविधान की धारा 16(4) का खुला उल्लंघन है, जो समान अवसर और सामाजिक न्याय की भावना को कुचलता है.

भीम आर्मी-आज़ाद समाज पार्टी की मांगें

चंद्रशेखर आज़ाद ने यूपी सरकार से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग किया है. उन्होंने तीन प्रमुख मांगें रखीं:

लखीमपुर खीरी कोऑपरेटिव बैंक की विवादित भर्तियों को तत्काल निरस्त किया जाये.

इस भर्ती घोटाले में शामिल सभी दोषियों पर सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए.

नई भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आरक्षण नियमों के अनुरूप दोबारा शुरू की जाये.

विपक्ष के लिए मुद्दा बना मामला

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी चुनावों में विपक्षी दल इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में भुनाने की कोशिश करेंगे. पहले भी यूपी में भर्ती घोटालों को लेकर विवाद खड़े होते रहे हैं, लेकिन इस बार चंद्रशेखर आज़ाद ने सीधे योगी सरकार और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाकर माहौल गरमा दिया है.

सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल

अब तक उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हालांकि, चंद्रशेखर आज़ाद और भीम आर्मी का कहना है कि अगर सरकार सचमुच आरोपियों को संरक्षण नहीं दे रही है तो उसे तुरंत भर्तियां निरस्त कर पारदर्शी तरीके से नई प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए.

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