RSS और इतिहास पर संजय सिंह के सवाल – संविधान, आरक्षण और गांधी हत्या की साजिश

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Kumar Ranjit

भारतबिहार
RSS और इतिहास पर संजय सिंह के सवाल – संविधान, आरक्षण और गांधी हत्या की साजिश

संजय सिंह ने RSS को घेरा – अंबेडकर विरोध से गांधी हत्या तक का आरोप

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,2 अक्टूबर 2025 – भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का नाम हमेशा बहस और विवादों में रहा है. आरएसएस समर्थक इसे राष्ट्रनिर्माण का संगठन बताता हैं, वहीं विपक्षी दल इसके इतिहास और विचारधारा पर सवाल खड़ा करते रहे हैं. इसी क्रम में आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक बार फिर RSS को कटघरे में खड़ा किया है.

उन्होंने अपने X (Twitter) पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि RSS ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की शवयात्रा निकाली, संविधान और आरक्षण का विरोध किया, और महात्मा गांधी की हत्या की साज़िश रची. यह सवाल सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास और समाज की सोच को भी झकझोरता हैं.

संजय सिंह का ट्वीट – RSS पर सीधा हमला

संजय सिंह ने लिखा है कि,“RSS ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की शवयात्रा निकाली, संविधान और आरक्षण का विरोध किया. RSS ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या की साजिश रची. क्या अब देश को यही इतिहास पढ़ाया जायेगा?

उनका यह सवाल वर्तमान में शिक्षा, इतिहास और विचारधारा की दिशा पर भी इशारा करता है.

RSS और डॉ. भीमराव अंबेडकर

डॉ. भीमराव अंबेडकर भारत के संविधान निर्माता और दलितों, पिछड़ों तथा वंचित वर्गों के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं.संजय सिंह का आरोप है कि आरएसएस ने उनके विचारों और संघर्ष का सम्मान करने के बजाय उनका विरोध किया है .

आरएसएस के शुरुआती दौर में जाति व्यवस्था को लेकर कोई ठोस सुधारवादी दृष्टिकोण नहीं दिखाई देता है.

डॉ. अंबेडकर ने खुद जातिवाद और छुआछूत के खिलाफ आंदोलन चलाया और सामाजिक समानता की लड़ाई लड़ी.

संजय सिंह का कहना है कि RSS ने संविधान और आरक्षण को कभी स्वीकार नहीं किया है , जबकि अंबेडकर का पूरा जीवन इन्हें मजबूत करने में बीता है .

संविधान और आरक्षण का विरोध

संविधान में आरक्षण का प्रावधान वंचित वर्गों को समान अवसर देने के लिए किया गया था. लेकिन लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि आरएसएस और उससे जुड़े संगठन आरक्षण की नीति के खिलाफ खड़ा रहा है.

1949 में जब संविधान लागू हुआ, तब भी आरएसएस से जुड़े विचारकों ने इसका विरोध किया है.

आज भी कई मंचों पर आरक्षण को खत्म करने की मांग उठता है, जिसे विपक्ष RSS की विचारधारा से जोड़कर देखता है.

संजय सिंह के आरोप इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को उजागर करता हैं.

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गांधी हत्या की साज़िश और RSS

महात्मा गांधी की हत्या भारतीय इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है. 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने बापू की गोली मारकर हत्या कर दिया था .

गोडसे का RSS और हिंदू महासभा से जुड़ाव लंबे समय से विवाद का विषय रहा है.

तत्कालीन सरकार ने गांधी हत्या के बाद RSS पर प्रतिबंध भी लगाया था.

हालांकि बाद में कानूनी प्रक्रिया के बाद प्रतिबंध हटा दिया गया, लेकिन संजय सिंह का आरोप है कि RSS ने हत्या की साज़िश में भूमिका निभाई है .

इतिहास और राजनीति – कौन सा सच?

सवाल यह उठता है कि क्या इतिहास को लेकर ये आरोप सिर्फ राजनीतिक हथियार हैं, या इसके पीछे सचमुच ऐतिहासिक दस्तावेज और तथ्य मौजूद हैं?

एक पक्ष का मानना है कि आरएसएस ने हमेशा राष्ट्रहित में काम किया और भारत की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत किया.

दूसरा पक्ष कहता है कि आरएसएस की विचारधारा जातिवादी, पितृसत्तात्मक और अल्पसंख्यक विरोधी रहा है.

संजय सिंह जैसे नेता इन सवालों को इसलिए उठाते हैं ताकि समाज में नई बहस छेड़ी जा सके.

शिक्षा और इतिहास लेखन पर बहस

संजय सिंह के सवाल का बड़ा हिस्सा इस चिंता से जुड़ा है कि आने वाली पीढ़ी को किस तरह का इतिहास पढ़ाया जायेगा .

क्या बच्चों को वही बताया जाएगा जो सत्ता चाहती है, या फिर सच्चाई और बहुस्तरीय दृष्टिकोण के साथ इतिहास पढ़ाया जाएगा?

इतिहास सिर्फ तारीखों और घटनाओं का सिलसिला नहीं होता, बल्कि यह विचारधाराओं और संघर्षों का आईना भी होता है.

निष्कर्ष

AAP नेता संजय सिंह का यह ट्वीट सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि एक गंभीर बहस की ओर इशारा करता है. RSS का इतिहास, उसके विचार और भूमिका हमेशा चर्चा में रहा हैं.

डॉ. अंबेडकर, संविधान और आरक्षण पर उनका रुख सवालों के घेरे में है.

महात्मा गांधी की हत्या जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी आरोप लगते रहे हैं.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि भविष्य की पीढ़ियों को क्या सच बताया जाएगा और क्या छुपाया जाएगा.

संजय सिंह ने अपने सवालों से इस बहस को फिर से जिंदा कर दिया है.अब यह समाज और इतिहासकारों की जिम्मेदारी है कि वे तथ्यों के आधार पर सच्चाई को सामने लाये.

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