इलेक्शन कमीशन पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान

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Ajit Kumar

भारत
इलेक्शन कमीशन पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान

भाजपा का ड्रीम पूरा करने में जुटा आयोग

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,1 दिसंबर 2025 — समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इलेक्शन कमीशन की कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा हमला बोला है. नई दिल्ली में संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग ऐसे फैसले ले रहा है जो भाजपा के हित और विपक्ष के वोट कटवाने की रणनीति को आगे बढ़ाते दिखते हैं

अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में अभी चुनाव काफी दूर हैं, फिर भी एसआईआर ,प्रक्रिया को इतनी जल्दबाजी में शुरू करना कई तरह के सवाल खड़े करता है.उनका आरोप है कि भाजपा राजनीतिक रूप से बैकफुट पर है और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी कर विपक्ष को नुकसान पहुंचाना चाहती है.

इलेक्शन कमीशन भाजपा का ड्रीम पूरा कर रहा है

अखिलेश यादव का सबसे बड़ा सवाल इलेक्शन कमीशन की नीयत पर था. उन्होंने कहा है कि,

ऐसा लगता है कि इलेक्शन कमीशन इस डेमोक्रेसी में भाजपा का ड्रीम पूरा करना चाहता है जिससे विपक्ष का वोट कट जाए.

जब से भाजपा उत्तर प्रदेश से हारी है, उसके अंदर बेचैनी है.

उन्होंने यह भी कहा कि आयोग समय देने से बच रहा है, जबकि एसआईआर जैसे संवेदनशील कार्य में समय और पारदर्शिता सबसे जरूरी घटक होते हैं.

बीएलओ की मौतें: यह ड्रामा नहीं, जमीनी हकीकत है

अखिलेश यादव ने एसआईआर से जुड़े एक गंभीर पहलू को उठाया है —बीएलओ की मौतें. उन्होंने कहा कि कई बीएलओ अत्यधिक दबाव में थे, उन्हें ट्रेनिंग तक नहीं मिली, और यही कारण है कि सर्वेश गंगवार, विजय वर्मा, विपिन यादव और अंजू दुबे जैसे कर्मचारियों की मौतें हुईं.

उन्होंने सवाल उठाया कि,
क्या यह मौतें ड्रामा हैं?

अखिलेश का दावा है कि कई बीएलओ फॉर्म भरने तक में सक्षम नहीं थे. स्थिति यह थी कि,

कोई बेंगलुरू से अपने मां का फॉर्म भरने आया,

कई बीएलओ फॉर्म अपलोड नहीं कर पा रहे थे,

कई कर्मचारियों ने निजी जानकारों को बुलाकर फॉर्म भरवाया.

यह पूरी प्रक्रिया बदइंतजामी और भ्रम की स्थिति को दर्शाती है.

एसआईआर का मतलब वोट बढ़ाना, लेकिन भाजपा वोट कटवाने में लगी है

अखिलेश यादव ने मूल मुद्दे पर जोर दिया—एसआईआर का उद्देश्य वोट बढ़ाना है, क्योंकि नए लोगों का नाम जुड़ता है. लेकिन भाजपा इसे ऐसे समय में लागू करा रही है जब शादियों का सीजन है, लोग घरों से बाहर हैं और प्रक्रिया का पालन नहीं कर पा रहे.

उनका स्पष्ट आरोप,
इलेक्शन कमीशन चाहता है कि एसआईआर में सावधानी से वोट कट जाए.

उन्होंने कहा कि भाजपा ने कई बड़ी आईटी कंपनियों को काम पर लगा रखा है, जिसमें नोएडा की एक बड़ी फर्म भी शामिल है. इन कंपनियों को भारी रकम देकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जहां भाजपा हारी है, वहां वोटर्स की संख्या न बढ़े.

घोसी में 20 हजार वोट काटे जा चुके हैं—राजीव राय

सपा सांसद राजीव राय का हवाला देते हुए अखिलेश ने कहा.

घोसी विधानसभा क्षेत्र में 20,000 वोट काटे जा चुके हैं,

और यह सब एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले हुआ,

आगे 20,000 और वोट कटे तो लाखों लोग वोट के अधिकार से वंचित हो सकते हैं.

यह स्थिति लोकतंत्र पर गहरा सवाल खड़ा करती है.

भाजपा फर्जी डाटा बनाती है, सरकार और रुपया दोनों लुढ़क रहे हैं

अखिलेश यादव ने भाजपा पर बड़े आर्थिक और प्रशासनिक आरोप भी लगाए है.उन्होंने कहा है कि,

सरकार महंगाई और बेरोजगारी पर काम नहीं करती,

फर्जी आंकड़े बनाकर जनता को भ्रमित करती है,

और आज रुपए की तरह सरकार भी गिरावट की ओर है.

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिसकर्मियों के द्वारा वोटरों को रिवॉल्वर दिखाकर वोटिंग रोकने की घटनाएं लोकतंत्र के लिए शर्मनाक हैं.

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जातीय जनगणना और पीडीए समाज की अनदेखी

अखिलेश ने कहा कि एसआईआर में जाति का कॉलम होना चाहिए ताकि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज का सही प्रतिनिधित्व हो सके. उन्होंने यह भी कहा कि वोट बचाने की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी भी पीडीए समाज से नहीं हैं, जो पक्षपात को दर्शाता है.

चम्बल–गंगा का उदाहरण और 2027 की भविष्यवाणी

अखिलेश यादव ने इटावा और चंबल क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि,

यमुना चंबल से निकलकर गंगा में मिलती है,

और ठीक इसी तरह जनता एकजुट होकर भाजपा की वोट कटवाने की रणनीति को बहा देगी.

उन्होंने कहा कि,
वोटर बहुत जागरूक है.जैसे 2024 में हिसाब किया है, 2027 में इससे बेहतर करेगा.

निष्कर्ष

अखिलेश यादव का यह प्रेस बयान कई महत्वपूर्ण सवाल उठाता है कि ,
क्या एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी है?
क्या वोटरों को उनका संवैधानिक अधिकार सही तरीके से मिल रहा है?
क्या इलेक्शन कमीशन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है?

भाजपा और आयोग दोनों इन आरोपों से इंकार करते रहे हैं, लेकिन अखिलेश यादव के आरोप यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में वोटर लिस्ट, पीडीए समाज, और चुनावी पारदर्शिता राजनीतिक बहस के केंद्र में रहने वाली है.

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