अनुमति विवाद ने बढ़ाया सामाजिक न्याय का मुद्दा
तीसरा पक्ष ब्यूरो लखनऊ, 6 दिसंबर 2025 — उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि राज्य की भाजपा सरकार ने उनके द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया है , जिसे उन्होंने पीडीए समाज का अपमान बताया है.
अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक X (Twitter) अकाउंट से पोस्ट करते हुए कहा कि उप्र भाजपा सरकार ने परम आदरणीय बाबा साहेब अम्बेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को अनुमति न देकर बाबा साहेब का अपमान किया है. यह संपूर्ण पीडीए समाज का अपमान है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की वर्चस्ववादी सोच पीडीए समाज—पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—को नीचा दिखाने का प्रयास कर रही है.

सपा का आरोप: कार्यक्रम रोकना राजनीतिक और सामाजिक अपमान
अखिलेश यादव ने कहा कि बाबा साहेब से जुड़े आयोजनों को रोकना परंपरागत प्रभुत्ववादी मानसिकता का उदाहरण है.
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि सत्ता पक्ष पीडीए समाज के महापुरुषों से जुड़े कार्यक्रमों को रोककर उनके सम्मान को ठेस पहुँचा रहा है.
उनके मुताबिक, यह निर्णय न सिर्फ प्रशासनिक प्रतिबंध है, बल्कि उससे आगे जाकर यह सामाजिक सम्मान पर चोट जैसा है.
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में पीडीए समाज जागृत है और इस तरह के कदमों से डरने वाला नहीं है.
6 दिसंबर को राज्यभर में कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा
अनुमति विवाद के बावजूद अखिलेश यादव ने राज्य के सभी जिलों में 6 दिसंबर को बाबा साहेब के महापरिनिर्वाण दिवस के कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया है.
उन्होंने पीडीए समाज के सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि हम पूरे उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित करेंगे.
उनकी इस घोषणा को सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने व्यापक स्तर पर साझा किया है.
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है.
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
हालाँकि प्रशासनिक स्तर पर इस अनुमति को न देने के कारणों का अभी तक आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन विपक्ष इसे सरकार की राजनीतिक मंशा से जोड़ रहा है.
स्थानीय अधिकारियों ने भी फिलहाल इसे लेकर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है.
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर के पहले सप्ताह में कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के चलते सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए निर्णय लिया गया हो सकता है, लेकिन जब मामला बाबा साहेब से जुड़ा हो, तो किसी भी प्रकार की रोक को संवेदनशीलता के साथ देखना जरूरी होता है.
पीडीए समाज में प्रतिक्रिया तेज
अखिलेश यादव के बयान के बाद पीडीए समुदायों में बड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली है.
सोशल मीडिया पर कई संगठनों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सरकार के निर्णय की आलोचना की है और बाबा साहेब के प्रति सम्मान जताते हुए कार्यक्रम करने की घोषणा की है.
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, विशेषकर उन समुदायों के बीच जो बाबा साहेब के विचारों और संघर्षों को अपने अधिकारों का आधार मानते हैं.
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राजनीतिक प्रभाव और आगे की संभावनाएँ
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में सामाजिक न्याय और अधिकारों पर आधारित राजनीति एक बार फिर केंद्र में है.
सपा पहले से ही पीडीए समीकरण को मजबूत बनाने की रणनीति पर काम कर रही है.
अखिलेश यादव का यह बयान इस रणनीति को और गति देता दिख रहा है.
वहीं, भाजपा और सरकार की तरफ से यदि इस मामले में स्पष्ट प्रशासनिक कारण प्रस्तुत किए जाते हैं, तो विवाद का स्वरूप बदल सकता है.
लेकिन फिलहाल विपक्ष इस मुद्दे को एक बड़े सामाजिक सम्मान और अधिकारों की लड़ाई से जोड़कर प्रस्तुत कर रहा है.
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब के महापरिनिर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की अनुमति रोके जाने का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं रहा. यह राजनीतिक बहस, सामाजिक न्याय का सवाल और पीडीए समुदाय की पहचान व सम्मान से जुड़े बड़े विमर्श का हिस्सा बन गया है.
अखिलेश यादव के बयान के बाद यह स्पष्ट है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और भी विस्तार ले सकता है, और राज्य की राजनीति में नए समीकरण भी बना सकता है.

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