क्या वाकई ट्रिपल इंजन सरकार फेल हो रही है?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,7 दिसंबर 2025 — उत्तर प्रदेश सरकार लंबे समय से दावा करती रही है कि,यूपी में ही रोजगार मिलेगा, दुनिया भर से पेशेवर लौटेंगे.लेकिन ज़मीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती है.भीम आर्मी प्रमुख और आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने X (Twitter) पर एक पोस्ट कर सरकार के इन दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है.उनका कहना है कि जहाँ सरकार रोजगार उत्सव और भव्य सम्मेलन आयोजित कर रही है, वहीं युवाओं के पास सम्मानजनक रोजगार की भारी कमी है.
उनकी पोस्ट में सबसे बड़ा दर्द झलकता है
2500 रुपये महीना पाने वाले चौकीदार की नौकरी के लिए ग्रेजुएट–इंटर पास युवा लंबी लाइन में खड़े हैं!
यह सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि यूपी की रोजगार वास्तविकता का आईना है.
ग्रामीण रोजगार की हालत: ग्राम प्रहरी की नौकरी का उदाहरण
चंद्रशेखर आज़ाद के ट्वीट के अनुसार, ग्राम प्रहरी की नौकरी का वेतन मनरेगा मजदूर के दैनिक वेतन से भी कम है.
इस एक उदाहरण से कई सवाल उठता हैं कि,
क्या युवाओं को योग्यतानुसार नौकरी मिल रही है?
जब इंटर और ग्रेजुएट युवा 2500–3000 रुपये की नौकरी के लिए कतार में खड़े हों, तो यह किसी राज्य की विकास गाथा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है.
क्या स्किल्ड युवाओं को सम्मानजनक वेतन मिल रहा है?
अगर नौकरी का वेतन रोज़गार मिशन के अनुरूप नहीं है, तो यूपी में रोजगार क्रांति का दावा कमजोर साबित होता है.
मनरेगा से भी कम वेतन—क्या यह न्यायसंगत है?
मनरेगा जहां देश की सबसे बुनियादी मजदूरी प्रणाली है, उससे भी कम वेतन मिलना युवाओं की स्थिति को बेहद गंभीर बनाता है.
सरकार के दावे बनाम ज़मीनी हकीकत
सरकारी दावा:
यूपी में दुनिया भर से नौजवान आएंगे, यहां रोजगार की कोई कमी नहीं.
जमीनी हकीकत:
लाखों युवा आउटसोर्सड कॉन्ट्रैक्ट नौकरियों में शोषण झेल रहे हैं
भर्ती प्रक्रिया में लंबा इंतजार, परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक की घटनाएँ
महंगे फॉर्म, कोचिंग और तैयारी के बावजूद स्थायी नौकरी के अवसर सीमित
3 इंजन वाली भाजपा सरकार के दावों में चमक, युवाओं के जीवन में संघर्ष
चंद्रशेखर आज़ाद का सवाल भी यही है कि ,
जब युवा ही मजबूर बन गए हैं, तो यूपी का गौरव किस बात पर?
ट्रिपल इंजन सरकार पर निशाना: सम्मेलन, समारोह और वादे — सब दिखावा?
यूपी सरकार अक्सर बड़े-बड़े रोजगार मेलों, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और मिशन रोजगार जैसे कार्यक्रम करती है
लेकिन आज़ाद का आरोप है कि,
सम्मेलन करेगी, मंच सजाएगी, भाषण देगी—पर सब सिर्फ दिखावे के लिए.
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यदि इतना विकास हो रहा है, तो,
युवा अच्छी नौकरी क्यों नहीं पा रहे?
उच्च योग्यता वाले 2500 रुपये की नौकरी के लिए लाइन में क्यों हैं?
स्किल्ड लेबर राज्य छोड़कर अन्य प्रदेशों में क्यों जा रहा है?
ये भी पढ़े :बाबा साहेब का प्रेरक दर्शन: चंद्रशेखर आज़ाद की पोस्ट से उपजा संघर्ष और सामाजिक न्याय का संदेश
ये भी पढ़े :The Nehru Centre: भारत की लोकतांत्रिक विरासत को समझने और संजोने की नई पहल
क्या युवा वाकई यूपी का गौरव हैं? सरकार और समाज दोनों को जवाब देना होगा
चंद्रशेखर आज़ाद ने ट्वीट में लिखा है कि,
युवा UP का गौरव हैं, पर उन्होंने आगे जोड़ा— लेकिन तीन इंजन वाली भाजपा सरकार ने उन्हें मजबूरी का प्रतीक बना दिया है.
यह दो पंक्तियाँ आज की हकीकत को बेहद सटीक रूप में पेश करती हैं. क्योंकि,
गौरव वहाँ होता है जहाँ अवसर होते हैं.
गौरव वहाँ होता है जहाँ सम्मानजनक वेतन होता है.
गौरव वहाँ होता है जहाँ योग्यता का मूल्य होता है.
लेकिन मजबूरी वहाँ होती है जहाँ बेरोजगारी हो.
मजबूरी वहाँ होती है जहाँ नौकरी की दौड़ में अपमानजनक वेतन मिले.
मजबूरी वहाँ होती है जहाँ शासन-प्रशासन के वादे खोखले हों.
क्या बदले की ज़रूरत है? युवा अब सवाल पूछ रहे हैं
अब वक़्त है यह समझने का कि,
युवाओं को सिर्फ सम्मेलन नहीं, व्यवहारिक रोजगार चाहिए
उन्हें सम्मानजनक वेतन चाहिए
उन्हें सुरक्षा, स्थायित्व और न्याय चाहिए
उन्हें ऐसी नीति चाहिए जो उनकी शिक्षा और प्रतिभा का सही उपयोग करे
सरकार को युवाओं की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना होगा, वरना इन सवालों की आवाज़ और तेज़ हो सकती है.
निष्कर्ष
चंद्रशेखर आज़ाद का ट्वीट महज़ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि यूपी के हजारों-लाखों युवाओं की ज़िंदगी की सच्चाई है.
रोजगार महोत्सव और मंच सजावट से ज्यादा जरूरी है युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार नीति,
तभी यूपी विकास के रास्ते पर वाकई आगे बढ़ सकता है.
अगर सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती, तो यह गौरव की बजाय मजबूरी का मॉडल बन जाएगा.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.



















