वन्दे मातरम् के 150 वर्ष: संसद में ऐतिहासिक बहस और नए भारत का राष्ट्रवादी पुनर्जागरण

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Ajit Kumar

भारतबिहार
वन्दे मातरम् के 150 वर्ष: संसद में ऐतिहासिक बहस और नए भारत का राष्ट्रवादी पुनर्जागरण

मोदी युग में राष्ट्रवाद: संकीर्णता नहीं, एकता का विस्तार

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,8 दिसंबर 2025 — भारत की स्वतंत्रता यात्रा का हर पन्ना, वन्दे मातरम्, की अनन्त ऊर्जा से सराबोर है.यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक ऐसी भाव-धारा है जिसने करोड़ों भारतीयों में मातृभूमि के लिए बलिदान, संघर्ष और जागृति की लौ जलायी है. 2025 में जब वन्दे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूर्ण हुए, तब संसद में इस पर हुई बहस ने न केवल इतिहास को याद किया, बल्कि राष्ट्रभक्ति को नई ऊर्जा देने वाली एक ऐतिहासिक पहल का रूप ले लिया. यह चर्चा एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता को पुनः पुष्ट करने वाली क्षण-रेखा बन गई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रवाद को नये अर्थ, नयी दिशा और नई शक्ति मिली है. वन्दे मातरम् पर संसद में बहस उसी विचार-दृष्टि का प्रतीक है.जहाँ राष्ट्रभक्ति गर्व का भाव है, न कि किसी राजनीतिक दायरे में बाँधने वाली सोच.

वन्दे मातरम्: भारत की आत्मा का गीत

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान,वन्दे मातरम्, सिर्फ नारा नहीं था, यह शौर्य और आत्मबल की अदृश्य शक्ति था. इस गीत ने आम भारतीय के मन में यह विश्वास जगाया कि मातृभूमि सर्वोपरि है और उसकी रक्षा, सम्मान और आज़ादी के लिए सबकुछ न्यौछावर किया जा सकता है.

आज 150 वर्ष बाद भी यह गीत नए भारत की धड़कनों में वही ऊर्जा भरता है.एक ऐसे राष्ट्र की भावना जो अपनी सभ्यता पर गर्व करता है और भविष्य को आत्मविश्वास से गढ़ रहा है.

मोदी युग में राष्ट्रवाद: संकीर्णता नहीं, एकता का विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रवाद को राजनीतिक खांचे से बाहर लाकर राष्ट्रीय भावनाओं के व्यापक परिप्रेक्ष्य में स्थापित किया गया है.

आज राष्ट्रवाद:

किसी विशेष विचारधारा का हिस्सा नहीं,

किसी समुदाय का मुद्दा नहीं,

किसी दल का एजेंडा नहीं,

बल्कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत का सामूहिक संकल्प बन चुका है.

मोदी सरकार ने यह संदेश दिया है कि राष्ट्रभक्ति पर न शर्म होती है, और न ही यह कोई विभाजनकारी विचार है.यह तो भारत की सबसे पवित्र पहचान है.

संसद में हुई बहस का ऐतिहासिक महत्व

संसद में वन्दे मातरम् पर चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल नीतिगत बहस नहीं; यह भारत की आत्मा से संवाद था.

इस चर्चा ने तीन स्पष्ट संदेश दिए,

भारत अपने राष्ट्रवादी मूल्यों पर गर्व करता है.

हमारे राष्ट्रीय प्रतीक किसी भी राजनीतिक विवाद से ऊपर हैं.

आने वाली पीढ़ियाँ इन मूल्यों को गर्व के साथ अपनाएँगी.

यह जन-जन को यह बताने का क्षण था कि राष्ट्रगौरव हमारे लिए वैचारिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प का विषय है.

विपक्ष की राजनीति और जनता की समझ

दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ विपक्षी दल राष्ट्रगीत, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रीय प्रतीकों को बार-बार विवादों में खींचते रहे हैं.कभी संदेह पैदा किया, कभी विरोध किया, कभी व्याख्या को राजनीतिक रंग दिया.

लेकिन आज का भारत इन चालों को समझ चुका है.
लोग जानते हैं कि,

राष्ट्रीय प्रतीक राजनीति से ऊपर हैं.

वन्दे मातरम् भारत की एकता का गीत है.

राष्ट्रभक्ति को संदेह की दृष्टि से देखना आधुनिक वैचारिक गुलामी का रूप है.

संसद में यह बहस उन सभी आलोचनाओं का मजबूत जवाब बन गई.

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नए भारत का निर्माण और मजबूत राष्ट्रवाद

मोदी सरकार ने राष्ट्रवाद को केवल सांस्कृतिक स्तर पर नहीं, बल्कि रणनीतिक, प्रशासनिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर पर भी मजबूती दी है.

सीमा सुरक्षा हो,

राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा हो,

या सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण.

हर मोर्चे पर राष्ट्र प्रथम की नीति अपनाई गई है.

वन्दे मातरम् का संदेश आज की युवा पीढ़ी में उसी शक्ति के साथ पुनः स्थापित हो रहा है,कि भारत का विकास तभी संभव है जब हम अपनी जड़ों पर गर्व करें और आत्मनिर्भरता के पथ पर आगे बढ़ें.

संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए

150 वर्षों पर आयोजित यह बहस सिर्फ वर्तमान के लिए नहीं थी.
यह एक संदेश है,

कि भारत एक भौगोलिक सीमा नहीं,

एक जीवंत, प्राचीन व समृद्ध सभ्यता है.

एक ऐसी सभ्यता जो दुनिया को ज्ञान देती आई है और आने वाली सदी में फिर से विश्वगुरु बनने का सामर्थ्य रखती है.

जब संसद वन्दे मातरम् पर गर्व से चर्चा करती है, तो यह भावी पीढ़ियों के लिए राष्ट्रीय चेतना का सबसे प्रेरणादायक संदेश बन जाता है.

निष्कर्ष

वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर संसद में हुई ऐतिहासिक चर्चा केवल एक औपचारिकता नहीं थी, यह नए भारत की राष्ट्रवादी चेतना का पुनर्जागरण थी.।

यह वही भारत है जहाँ,

राष्ट्रभक्ति सम्मान है,

राष्ट्रवाद शक्ति है,

और वन्दे मातरम् अनन्त प्रेरणा है.

आज पूरा देश संकल्प ले चुका है कि भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनाना है.
वन्दे मातरम् केवल शब्द नहीं—यह राष्ट्र के प्रति समर्पण की सर्वोच्च प्रतिज्ञा है.

वन्दे मातरम्.
भारत माता की जय.

स्रोत: बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल का प्रेस बयान, पटना के आधार पर एक विश्लेषण

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