एसआईआर से विपक्ष क्यों परेशान? संजय सरावगी का सीधा सवाल

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Ajit Kumar

बिहार
एसआईआर से विपक्ष क्यों परेशान? संजय सरावगी का सीधा सवाल

फर्जी वोटिंग बनाम लोकतंत्र: एसआईआर पर भाजपा का बड़ा हमला

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 21 दिसंबर—बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के विरोध पर तीखा सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है, देश में पहले भी कई बार एसआईआर हो चुका है, लेकिन तब विपक्ष ने कभी इतनी आपत्ति नहीं जताई. अब अचानक यह विरोध क्यों हो रहा है, यह सवाल खुद-ब-खुद खड़ा होता है.

पहले भी हुए एसआईआर, तब चुप क्यों था विपक्ष?

मीडिया से बातचीत के दौरान संजय सरावगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एसआईआर कोई राजनीतिक हथियार नहीं, बल्कि लोकतंत्र को शुद्ध रखने की एक संवैधानिक प्रक्रिया है.उन्होंने कहा कि,

अगर एसआईआर से किसी को परेशानी हो रही है, तो इसका मतलब साफ है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी है.

उनका कहना था कि पहले विपक्ष ने फर्जी वोटिंग को बढ़ावा दिया और अब जब वोटर लिस्ट की जांच हो रही है, तो वही लोग सबसे ज्यादा शोर मचा रहे हैं.

फर्जी वोटिंग और घुसपैठ का मुद्दा फिर आया सामने

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्ष नहीं चाहता कि बांग्लादेशी घुसपैठियों और अवैध रूप से जुड़े नामों को मतदाता सूची से हटाया जाए.
उन्होंने कहा कि एसआईआर का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वैध भारतीय नागरिक ही मतदान करें, लेकिन विपक्ष की राजनीति इसी बिंदु पर आकर अटक जाती है.

संजय सरावगी ने सवाल उठाया कि,

क्या लोकतंत्र को मजबूत करना गलत है? क्या फर्जी वोटरों को हटाना अपराध है?

जनता अब भ्रम में आने वाली नहीं

उन्होंने यह भी कहा कि आज की जनता पहले से कहीं अधिक जागरूक है.सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के दौर में झूठी सूचनाएं ज्यादा देर तक टिक नहीं पातीं. उनके अनुसार,

जनता अब गलत जानकारी फैलाने वालों को छोड़ने वाली नहीं है.

उन्होंने याद दिलाया कि लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष ने बिहार में भी एसआईआर का मुद्दा उछाला था, लेकिन जनता ने उन्हें करारा जवाब दिया.

पश्चिम बंगाल सरकार पर भी साधा निशाना

संजय सरावगी ने पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वहां एसआईआर का विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि डर है कि घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से हट जाएंगे.
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राज्य सरकारें वोट बैंक की राजनीति के चलते लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं.

उनका कहना था कि,

अगर वोटर लिस्ट साफ होगी, तो राजनीति भी साफ होगी। शायद यही डर विपक्ष को सता रहा है.

राहुल गांधी की यात्राओं पर भी टिप्पणी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बिहार में निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा का भी जिक्र किया.उन्होंने कहा कि जनता ने उस राजनीति को नकार दिया और विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया.

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि,

अगर अब भी विपक्ष नहीं जागा, तो पश्चिम बंगाल और असम में भी वही हाल होगा.

चुनाव आयोग की भूमिका पर भाजपा का रुख

संजय सरावगी ने साफ किया कि चुनाव आयोग का उद्देश्य किसी पार्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पवित्रता बनाए रखना है.
उन्होंने कहा कि आयोग चाहता है कि अवैध नामों को हटाया जाए, लेकिन विपक्ष इसका विरोध कर रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.

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कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

अपने बयान में उन्होंने कांग्रेस पर भी जोरदार हमला बोला.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश को कलंकित करने का काम किया है और पाताल से लेकर आसमान तक लूट मचाई है.

संजय सरावगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में देश का सोना तक गिरवी रखा गया, जबकि मौजूदा सरकार देश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है.

पीएम मोदी का परम वैभव का संकल्प

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी भारत को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए संकल्पित हैं.
उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का सपना अब लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है.

उनके अनुसार, यह वही भारत है जो कभी आर्थिक कमजोरी का प्रतीक माना जाता था, लेकिन आज वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा है.

निष्कर्ष: एसआईआर से डर क्यों?

संजय सरावगी के बयान साफ संकेत देते हैं कि एसआईआर केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक ईमानदारी की कसौटी भी बन चुका है.
विपक्ष का विरोध यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर उन्हें मतदाता सूची की शुद्धता से इतनी परेशानी क्यों है?

लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब वोटर लिस्ट साफ होगी ,और शायद यही सच्चाई कुछ राजनीतिक दलों को सबसे ज्यादा बेचैन कर रही है.

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