भारत की सांस्कृतिक छवि पर खतरा? धार्मिक असहिष्णुता पर AAP का बड़ा सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,25 दिसंबर — भारत सदियों से अपनी सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए जाना जाता रहा है. सर्व धर्म समभाव केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्मा है. लेकिन हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो इस परंपरा को चुनौती देती नजर आती हैं.
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय आज़ाद द्वारा X (Twitter) पर साझा की गई पोस्ट ने एक गंभीर सवाल खड़ा किया है, क्या भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है?
AAP का सवाल और चिंता
AAP के आधिकारिक X हैंडल से साझा पोस्ट में कहा गया है कि भारत सांस्कृतिक रूप से एक मजबूत राष्ट्र है और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए. लेकिन चिंता इस बात की है कि कुछ असामाजिक तत्व दूसरे धर्म के लोगों को परेशान कर रहा हैं, उनके धार्मिक आयोजनों में दख़ल दे रहे हैं और हिंसा का सहारा ले रहा हैं.
पोस्ट के अनुसार,
बरेली में चर्च के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया
पादरी के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आईं
कई जगहों पर Santa Claus की मूर्तियां तोड़ी गईं
ये घटनाएं सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि भारत की उस पहचान पर सवाल खड़ा करता हैं, जिसे दुनिया धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक मानती रही है.
धार्मिक स्वतंत्रता: संविधान की आत्मा
भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता देता है.अनुच्छेद 25 से 28 तक साफ-साफ कहते हैं कि हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने, प्रचार करने और पालन करने का अधिकार है.
जब किसी समुदाय के धार्मिक स्थल या आयोजनों को निशाना बनाया जाता है, तो यह केवल उस समुदाय पर हमला नहीं होता, बल्कि संविधान की मूल भावना पर चोट होती है.
क्या यह भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है?
AAP सांसद संजय आज़ाद का सवाल बेहद अहम है कि,
दुनियाभर में भारत की क्या छवि बनेगी?
आज जब भारत
G20 जैसे वैश्विक मंचों पर नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है.
विदेशी निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देना चाहता है.
खुद को विश्व गुरु के रूप में प्रस्तुत कर रहा है.
तो ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत को असहिष्णु और विभाजित समाज के रूप में दिखाती हैं. यह न केवल कूटनीतिक स्तर पर नुकसानदायक है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक प्रभाव भी डालती है.
राजनीति और धार्मिक ध्रुवीकरण
आम आदमी पार्टी का इशारा साफ है कि इन घटनाओं के पीछे राजनीतिक संरक्षण या चुप्पी भी एक बड़ा कारण हो सकती है. जब नफरत फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो उन्हें संदेश मिलता है कि वे कानून से ऊपर हैं.
धार्मिक ध्रुवीकरण
समाज को बांटता है
भाईचारे को कमजोर करता है
और लोकतंत्र को खोखला करता है
आम नागरिक की भूमिका
सिर्फ सरकार या राजनीतिक दलों पर जिम्मेदारी डालना काफी नहीं है.आम नागरिकों की भी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है,
अफवाहों से बचें
नफरत फैलाने वाली भाषा का विरोध करें
कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा दें
भारत की ताकत उसकी विविधता है, न कि एकरूपता.
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AAP का संदेश: नफरत नहीं, भाईचारा
AAP की इस पोस्ट का मूल संदेश साफ है ,
भारत को नफरत की राजनीति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और भाईचारे की जरूरत है.
धर्म के नाम पर हिंसा,
न देश को मजबूत बनाती है
न ही समाज को सुरक्षित
बल्कि यह भारत की उस आत्मा को कमजोर करती है, जिस पर हमें गर्व है.
निष्कर्ष
भारत सिर्फ एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि विचारों और विश्वासों का संगम है.अगर किसी एक धर्म या समुदाय को डर के माहौल में जीने पर मजबूर किया जाता है, तो यह पूरे देश की हार है.
AAP और संजय आज़ाद द्वारा उठाया गया सवाल समय की जरूरत है .
क्या हम उस भारत को बचा पाएंगे, जो सबको साथ लेकर चलता है?
अब फैसला हमें करना है,नफरत का रास्ता या भाईचारे का भविष्य.

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