भारत में क्रिसमस पर हमले: लोकतंत्र और विविधता पर गहराता संकट

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Ajit Kumar

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भारत में क्रिसमस पर हमले: लोकतंत्र और विविधता पर गहराता संकट

क्रिसमस मनाना बना अपराध? रायपुर की घटना ने सरकार पर उठाए सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,25 दिसंबर— भारत को दुनिया हमेशा एक ऐसे देश के रूप में जानता रहा है जहाँ विविधता में एकता केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवनशैली रहा है.अलग-अलग धर्म, संस्कृतियाँ और परंपराएँ मिलकर इस देश की आत्मा बनाती हैं. लेकिन हाल के दिनों में जो तस्वीर सामने आ रही है, वह इस पहचान पर गहरा सवाल खड़ा करती है.

कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल @INCIndia पर साझा एक वीडियो के हवाले से रायपुर में क्रिसमस की सजावट को तोड़ते हुए दक्षिणपंथी तत्वों की हरकतों को उजागर किया है.यह वीडियो केवल एक शहर की घटना नहीं, बल्कि एक बड़े और चिंताजनक पैटर्न की ओर इशारा करता है.

रायपुर की घटना: एक प्रतीक, एक चेतावनी

रायपुर में क्रिसमस के अवसर पर की गई सजावट को जिस तरह से तोड़ा गया, वह न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि धार्मिक उत्सव मनाना अब कई जगहों पर खतरे से खाली नहीं रहा.

कांग्रेस का कहना है कि यह घटना भाजपा सरकार के असली चेहरे को उजागर करती है, जहाँ नफरत फैलाने वाले तत्वों को खुली छूट मिलती दिखाई देती है. सवाल यह नहीं है कि सजावट टूटी, सवाल यह है कि ऐसा करने वालों में डर क्यों नहीं है?

यह कोई अकेली घटना नहीं

कांग्रेस ने अपने बयान में साफ किया है कि रायपुर की घटना कोई अपवाद नहीं है.
देश के कई हिस्सों से ऐसी खबरें सामने आई हैं,

जबलपुर और दिल्ली में क्रिसमस समारोहों में बाधा

छत्तीसगढ़, केरल, ओडिशा और उत्तराखंड में ईसाई समुदाय को निशाना बनाना

चर्चों और सार्वजनिक स्थलों पर डर और दबाव का माहौल

इन घटनाओं में एक समानता है,लोगों को सिर्फ इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि वे क्रिसमस मना रहा हैं.

अल्पसंख्यकों को संगठित रूप से निशाना?

कांग्रेस का आरोप है कि यह हिंसा बिखरी हुई नहीं, बल्कि संगठित और योजनाबद्ध दिखाई देता है. जब एक के बाद एक राज्य से ऐसी खबरें आती हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या देश में अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता सुरक्षित है?

संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने और उसे मनाने का अधिकार देता है.लेकिन जब त्योहार मनाना भी डर के साये में हो, तो यह अधिकार केवल कागज़ों तक सीमित रह जाता है.

भारत की वैश्विक छवि पर असर

कांग्रेस ने इस मुद्दे को सिर्फ घरेलू चिंता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय छवि से भी जोड़ा है. पार्टी का कहना है कि दुनिया भारत में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए देख रहा है.

भारत जो खुद को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहता है, उसके लिए यह बेहद गंभीर बात है. वैश्विक मंच पर मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठना, किसी भी राष्ट्र के लिए खतरे की घंटी है.

प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा सवाल

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे तौर पर जवाब माँगा है. पार्टी का कहना है कि ये घटनाएं सरकार की विचारधारा का प्रतिबिंब हैं.
जब शीर्ष नेतृत्व चुप रहता है, तो नफरत फैलाने वालों का हौसला बढ़ता है.

सवाल यह है कि,

क्या सरकार इन घटनाओं की निंदा करेगी?

क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?

या फिर यह चुप्पी जारी रहेगी?

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हम चुप नहीं रहेंगे — कांग्रेस का संदेश

कांग्रेस ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह नफरत और हिंसा के खिलाफ हर समुदाय के साथ मजबूती से खड़ी है.
पार्टी का संदेश साफ है,यह लड़ाई किसी एक धर्म की नहीं, बल्कि भारत के विचार की है.

एक ऐसा भारत जहाँ, हर धर्म सुरक्षित हो

हर त्योहार सम्मान के साथ मनाया जाए

डर नहीं, भरोसा हो.

निष्कर्ष: सवाल सिर्फ क्रिसमस का नहीं

रायपुर में क्रिसमस की सजावट पर हमला केवल एक घटना नहीं, बल्कि यह संकेत है कि देश किस दिशा में जा रहा है.आज निशाना क्रिसमस है, कल कोई और त्योहार हो सकता है.

अगर अभी सवाल नहीं उठे, आवाज़ नहीं उठी, तो भारत की वह पहचान,जिस पर हमें गर्व था,धीरे-धीरे धुंधली पड़ सकती है.

अब फैसला हमें करना है,नफरत या संविधान? डर या लोकतंत्र?

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