आइसा नेता विकास यादव पर दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जाँच की मांग
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 25 दिसंबर 2025— लोकतंत्र की आत्मा सवाल पूछने, अन्याय के ख़िलाफ़ खड़े होने और जनता की आवाज़ बनने से मजबूत होती है. लेकिन जब सत्ता और प्रशासन का दुरुपयोग कर सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को झूठे मुकदमों में फँसाया जाए, तो यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं होता है , बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश होता है. सिवान जिले के थाना गोरेयाकोठी कांड संख्या 415/2025 इसी तरह की एक राजनीतिक रूप से प्रेरित और साजिशन कार्रवाई का उदाहरण बनकर सामने आया है.
छात्र संगठन आइसा (AISA) की प्रदेश अध्यक्ष प्रीति कुमारी और राज्य सचिव सबीर कुमार ने संयुक्त प्रेस बयान जारी करते हुए स्पष्ट कहा है कि आइसा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता कॉमरेड विकास यादव पर दर्ज यह मुकदमा पूरी तरह से राजनीतिक द्वेष, पूर्वाग्रह और सुनियोजित साजिश का परिणाम है. उनका कहना है कि विकास यादव की बढ़ती जनस्वीकृति, सामाजिक सक्रियता और लोकतांत्रिक हस्तक्षेप से घबराकर विरोधी शक्तियाँ उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करना चाहती हैं.
जनसंघर्ष से घबराई सत्ता, कानून का दुरुपयोग
आइसा नेताओं के अनुसार, विकास यादव लंबे समय से शिक्षा, सामाजिक न्याय, छात्र अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष करते रहे हैं. उनकी लोकप्रियता और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ से कुछ ताकतें असहज महसूस कर रही हैं. यही कारण है कि प्रशासनिक प्रभाव और सत्ता की आड़ लेकर उन पर झूठे एवं मनगढ़ंत आरोप लगाया जा रहा हैं.
जिस कथित घटना से कॉ. विकास यादव को जोड़ा जा रहा है, उसका उनसे कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है. घटना के समय उनकी उपस्थिति किसी अन्य स्थान पर था, जिसकी पुष्टि तकनीकी साक्ष्यों और वस्तुनिष्ठ तथ्यों के माध्यम से आसानी से की जा सकती है.इसके बावजूद उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज होना न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
पहले दबाव, फिर फर्जी मुकदमे
आइसा का यह भी कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी विकास यादव पर दबाव बनाने, धमकी देने और झूठे आरोपों के ज़रिये समझौता कराने की कोशिश की गई थी. जब ये प्रयास विफल रहा, तब साजिश के तहत एक के बाद एक फर्जी मुकदमे गढ़े गए.इसका उद्देश्य साफ है,राजनीतिक रूप से सक्रिय छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को डराना, चुप कराना और जनआंदोलनों को कमजोर करना.
यह प्रवृत्ति केवल एक संगठन या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में असहमति की आवाज़ों को दबाने का एक खतरनाक चलन बनता जा रहा है.लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन कानून का दुरुपयोग कर विरोधी आवाज़ों को कुचलना लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधा हमला है.
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लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा
छात्र संगठन आइसा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह किसी भी प्रकार की राजनीतिक साजिश से न तो डरने वाला है और न ही पीछे हटने वाला,संगठन का मानना है कि सत्य और न्याय के पक्ष में खड़ा होना ही लोकतांत्रिक राजनीति का असली धर्म है. यदि आज चुप्पी साध लिया गया तो , कल किसी भी जनप्रतिनिधि, छात्र नेता या सामाजिक कार्यकर्ता को इसी तरह निशाना बनाया जा सकता है.
आइसा ने यह भी दोहराया कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निरंतर चलने वाली एक प्रक्रिया है, जिसमें नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय की रक्षा अनिवार्य है.
प्रशासन से स्पष्ट और ठोस मांग
आइसा राज्य कार्यालय की ओर से प्रशासन से यह स्पष्ट मांग की गई है कि,
सिवान के थाना गोरेयाकोठी कांड संख्या 415/2025 की
निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए
राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित इस मामले की सच्चाई जनता के सामने लाई जाए
निर्दोष सामाजिक कार्यकर्ताओं को न्याय मिले
और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बना रहे
यदि इस प्रकार के फर्जी मुकदमों पर रोक नहीं लगी, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए बेहद खतरनाक संकेत होगा.
निष्कर्ष
विकास यादव पर दर्ज यह मुकदमा केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, जनसंघर्षों और छात्र आंदोलनों के खिलाफ एक साजिश के रूप में देखा जाना चाहिए. आज आवश्यकता है कि नागरिक समाज, लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली सभी शक्तियाँ और संवैधानिक संस्थाएँ मिलकर ऐसे प्रयासों का विरोध करें.आइसा का संघर्ष केवल एक मुकदमे को वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्य, न्याय और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है, जो पूरी मजबूती से जारी रहेगी.
स्रोत :आइसा राज्य कार्यालय जारी प्रेस रिलीज़ के आधार पर

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