बांग्लादेश में हिन्दू-दलितों पर हिंसा, मायावती का बयान

| BY

Ajit Kumar

भारत
बांग्लादेश में हिन्दू-दलितों पर हिंसा, मायावती का बयान

हिन्दू-दलितों पर हमले, बांग्लादेश पर मायावती की चिंता

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,25 दिसंबर– बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों और दलितों पर हो रही कथित साम्प्रदायिक हिंसा को लेकर गहरी चिंता जताई है.उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से इस विषय पर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए अपेक्षा जताई है कि भारत सरकार को इस मुद्दे पर और अधिक सक्रिय, प्रभावी और ठोस कदम उठाना चाहिये.

मायावती ने अपने बयान में कहा कि बांग्लादेश में जिस तरह से हिन्दू अल्पसंख्यकों की जान-माल और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला हो रहा हैं, उससे न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का माहौल है. हाल ही में वहां एक दलित युवक की नृशंस हत्या की घटना ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है, जिसके विरोध में भारत के विभिन्न हिस्सों में लोगों का सड़कों पर उतरना स्वाभाविक है.

दलित उत्पीड़न: सीमाओं से परे एक गंभीर मुद्दा

बसपा प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दलितों और आदिवासियों के खिलाफ उत्पीड़न केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत में भी दलितों और आदिवासियों के खिलाफ सदियों से जातिवादी द्वेष, शोषण और अन्याय की घटनाएं होती रही हैं, और कई बार उनके संरक्षण के लिए बने कानूनों को भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जाता है .

हालांकि, मायावती ने यह भी जोड़ा कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में इस तरह की हिंसक घटनाएं कम गंभीर नहीं हैं, बल्कि यह एक अत्यंत दुखद और चिंताजनक स्थिति है, जिस पर भारत सरकार को विशेष संवेदनशीलता के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिये .

बांग्लादेश में भारत और हिन्दू विरोधी घटनाओं पर चिंता

मायावती ने अपने पोस्ट में इस ओर भी संकेत किया कि हाल के दिनों में बांग्लादेश में भारत-विरोधी और हिन्दू-विरोधी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है.उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर देशवासियों की चिंताएं लगातार बनी रहती हैं और यह अपेक्षा की जाती है कि केंद्र सरकार इस दिशा में अपनी कूटनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी निभाये.

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब तक इस मामले में प्रयास करती रही है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए और अधिक सख़्त, सक्रिय और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

केंद्र सरकार से सक्रिय भूमिका की अपील

बसपा सुप्रीमो ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा के खिलाफ कूटनीतिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत पहल करती है, तो देश की जनता का समर्थन सरकार के साथ होगा.उन्होंने कहा कि यह केवल विदेश नीति का सवाल नहीं है, बल्कि मानवाधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है.

मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत-बांग्लादेश संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की भी नजर बनी हुई है.उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत सरकार इस विषय को हल्के में न लेते हुए उचित ध्यान दे और ठोस कार्रवाई करे.

ये भी पढ़े :RSS–BJP की राजनीति और नैतिकता का सवाल: कांग्रेस का बड़ा आरोप
ये भी पढ़े :भारत में क्रिसमस पर हमले: लोकतंत्र और विविधता पर गहराता संकट

राजनीतिक और सामाजिक संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मायावती का यह बयान केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से उन्होंने दलितों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों की सुरक्षा को एक वैश्विक मुद्दे के रूप में सामने रखा है. यह बयान उस राजनीति को भी रेखांकित करता है, जिसमें सामाजिक न्याय और मानवाधिकार को राष्ट्रीय सीमाओं से ऊपर माना जाता है.

निष्कर्ष

बांग्लादेश में हिन्दू और दलित अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को लेकर मायावती की चिंता एक बार फिर इस तथ्य को सामने लाती है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा केवल आंतरिक मामला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय दायित्व भी है.केंद्र सरकार से उनकी अपील इस दिशा में संकेत करती है कि भारत को न केवल अपने नागरिकों बल्कि क्षेत्रीय शांति और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए भी निर्णायक भूमिका निभानी चाहिये.

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत सरकार इस मुद्दे पर आगे किस तरह की कूटनीतिक और राजनीतिक रणनीति अपनाती है, और क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति में कोई ठोस सुधार देखने को मिलता है.

Trending news

Leave a Comment