बिहार की महिलाओं पर अपमानजनक बयान: भाजपा की सोच पर उठते गंभीर सवाल

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Ajit Kumar

भारतबिहार
बिहार की महिलाओं पर अपमानजनक बयान: भाजपा की सोच पर उठते गंभीर सवाल

₹20–25 हजार में मिल जाती हैं? बिहार की महिलाओं पर बयान से सियासी भूचाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,3 जनवरी — बिहार की महिलाओं को लेकर एक बार फिर राजनीति के गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है.राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और संघ परिवार पर महिलाओं के प्रति घृणित और अपमानजनक सोच रखने का गंभीर आरोप लगाया है. यह विवाद उस बयान के बाद सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि,
लड़की बिहार से ले आएंगे! बिहार में ₹20–25 हजार में ही मिल जाती है!

यह बयान केवल अशोभनीय नहीं, बल्कि बिहार की आधी आबादी यानी महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमा पर सीधा हमला माना जा रहा है.

विवाद की जड़: कौन और क्या बोला?

राजद के आधिकारिक X (Twitter) हैंडल @RJDforIndia ने दावा किया है कि यह बयान उत्तराखंड सरकार में मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल से जुड़ा हुआ है. राजद का कहना है कि यह कथन भाजपा की बिहार और बिहार की महिलाओं को लेकर वास्तविक मानसिकता को उजागर करता है.

राजद नेता और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाते हुए भाजपा से सीधे सवाल किया हैं.

तेजस्वी यादव का तीखा हमला

तेजस्वी यादव ने अपने X पोस्ट के माध्यम से कहा कि यह बयान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतिनिधित्व करता है जिसे भाजपा और संघ परिवार वर्षों से पोषित करते आया हैं. उन्होंने सवाल उठाया है कि,

क्या बिहार की महिलाएं कोई,सौदे की वस्तु हैं?

क्या महिलाओं को पैसे से खरीदा-बेचा जा सकता है?

क्या यही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का असली चेहरा है?

तेजस्वी यादव ने स्पष्ट शब्दों में मांग की कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को भाजपा की ओर से सार्वजनिक स्पष्टीकरण देना चाहिये.

राजद का आरोप: साजिशी चुप्पी

राजद का आरोप है कि इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर,

बिहार भाजपा, जदयू, और भाजपा के अन्य नेता सब चुप्पी साधे हुये हैं.पार्टी का कहना है कि यदि ऐसा बयान किसी विपक्षी दल से जुड़ा होता, तो अब तक देशभर में हंगामा मच चुका होता.

राजद ने इसे चयनित नैतिकता (Selective Morality) करार देते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात भाजपा सिर्फ चुनावी नारों तक सीमित रखती है.

बिहार की महिलाओं का अपमान क्यों गंभीर मुद्दा है?

बिहार की महिलाएं केवल गृहिणी नहीं हैं, बल्कि— शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति, प्रशासन, खेल, और सामाजिक आंदोलनों, में उन्होंने अपनी मजबूत पहचान बनाई है.

ऐसे में किसी राज्य की महिलाओं को पैसों से जोड़कर देखना न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन का अधिकार) की भावना के भी खिलाफ है.

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भाजपा की महिला सशक्तिकरण की राजनीति पर सवाल

भाजपा अक्सर महिला सशक्तिकरण की बात करता है, लेकिन इस तरह के बयान उन दावों को कमजोर करता हैं. विपक्ष का कहना है कि,

एक ओर महिला आरक्षण की बात, दूसरी ओर महिलाओं को वस्तु की तरह प्रस्तुत करना,

यह दोहरा चरित्र जनता के सामने उजागर हो रहा है.

क्या होगा आगे?

अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर यह सवाल तेज हो गया है कि,

क्या भाजपा इस बयान से खुद को अलग करेगी?

क्या संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई होगी?

या फिर यह मामला भी समय के साथ दबा दिया जाएगा?

राजद ने संकेत दिया हैं कि यदि जवाब नहीं मिला, तो यह मुद्दा सड़क से लेकर सदन तक उठाया जाएगा.

निष्कर्ष

बिहार की महिलाओं पर की गई इस कथित टिप्पणी ने केवल राजनीतिक विवाद ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना को भी झकझोर दिया है.यह मामला किसी एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के सम्मान, समानता और सोच की लड़ाई से जुड़ा है.

अब देश की जनता देख रही है कि सत्ता में बैठी पार्टी इस पर क्या रुख अपनाती है,
स्पष्टीकरण, कार्रवाई या चुप्पी.

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