वी.बी.जी. राम जी योजना पर विवाद
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली,10 जनवरी 2026 — पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने केंद्र की भाजपा सरकार पर मनरेगा को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि, काम का अधिकार कोई भीख नहीं, बल्कि देश के गरीबों का कानूनी हक है, जिसे यूपीए सरकार के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) के माध्यम से सोनिया गांधी ने सुनिश्चित किया था.
गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर जारी बयान में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वी.बी.जी. राम जी योजना के ज़रिए मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश की जा रही है.खेती के व्यस्त मौसम में काम रोकना और योजना की फंडिंग का बोझ राज्यों पर डालना गरीबों और ग्रामीण मज़दूरों के साथ अन्याय है.
मनरेगा: गरीबों का कानूनी सुरक्षा कवच
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है.यह ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन का मज़दूरी आधारित रोज़गार देने की कानूनी गारंटी देता है.आर्थिक संकट, सूखा, महामारी और बेरोज़गारी के दौर में यह योजना लाखों परिवारों के लिए जीवन रेखा बनी रही है.
अशोक गहलोत ने कहा कि मनरेगा ने न सिर्फ रोज़गार दिया, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता भी प्रदान की है. ऐसे में इस योजना को कमजोर करना सामाजिक न्याय के मूल विचार के खिलाफ है.
वी.बी.जी. राम जी योजना पर उठे सवाल
गहलोत का आरोप है कि केंद्र सरकार नई योजनाएं लाकर मनरेगा के महत्व को कम कर रही है.उन्होंने कहा कि खेती के सीजन में काम बंद करना, भुगतान में देरी और बजट में कटौती, ये सभी कदम मनरेगा को अप्रभावी बनाने की दिशा में हैं.
उनके अनुसार, यदि केंद्र सरकार वास्तव में गरीबों के हित में है, तो उसे रोजगार गारंटी जैसी योजनाओं को मजबूत करना चाहिये, न कि उन्हें विकल्पों के नाम पर खत्म करने की कोशिश करनी चाहिये.
राज्यों पर बढ़ता आर्थिक दबाव
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा की फंडिंग का बोझ धीरे-धीरे राज्यों पर डाल रही है, जिससे पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहे राज्य सरकारों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. भुगतान में देरी के कारण मज़दूरों में असंतोष बढ़ रहा है और ग्रामीण इलाकों में पलायन की समस्या फिर से गंभीर होती जा रही है.
कांग्रेस का जनआंदोलन का ऐलान
अशोक गहलोत ने साफ किया कि इस कथित जनविरोधी फैसले के खिलाफ कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-ढाणी से लेकर विधानसभा तक आवाज बुलंद करेंगे और मनरेगा के अधिकार की रक्षा के लिए आंदोलन किया जाएगा.
राजस्थान कांग्रेस सहित कई राज्य इकाइयों ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की है.
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भाजपा की ओर से अब तक प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.हालांकि, इससे पहले सरकार यह कहती रही है कि वह रोजगार और ग्रामीण विकास के लिए वैकल्पिक और अधिक प्रभावी योजनाओं पर काम कर रही है.
राजनीतिक टकराव तेज होने के संकेत
मनरेगा को लेकर यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में बेरोज़गारी, महंगाई और ग्रामीण संकट जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज़ है. विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा केंद्र और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले सकता है.
निष्कर्ष
मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों गरीबों के लिए सम्मानजनक जीवन का अधिकार है.अशोक गहलोत के आरोपों ने एक बार फिर इस योजना के भविष्य को लेकर बहस छेड़ दी है.अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और मनरेगा को लेकर आगे की नीति क्या होती है.
न्यूज़ स्रोत:सोशल मीडिया पर अशोक गहलोत का आधिकारिक बयान (X) के आधार पर

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