मेरठ में दलित महिला की हत्या, बेटी अपहरण मामले में आक्रोश

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Ajit Kumar

भारत
मेरठ में दलित महिला की हत्या और बेटी अपहरण के विरोध में लोग प्रदर्शन करते हुए

कांग्रेस का आरोप: BJP सरकार संरक्षण में बढ़ रही जातिवाद अपराध

तीसरा पक्ष ब्यूरो मेरठ, उत्तर प्रदेश 12 जनवरी 2026 – उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण की वारदात ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है.घटना की नृशंसता ने स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों को सड़कों पर उतार दिया है.कांग्रेस का आरोप है कि यह सब बीजेपी सरकार के संरक्षण में हो रहा है और राज्य प्रशासन इस तरह के अपराधों को रोकने में विफल साबित हो रहा है.

कांग्रेस के प्रवक्ता ने बयान दिया है कि,देश में जाति-धर्म के आधार पर नफरत बढ़ाई जा रही है और ये काम BJP सरकार के संरक्षण में हो रहा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी संसाधनों का इस्तेमाल खुलेआम दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को कुचलने के लिए कर रहे हैं. CM योगी का बुल्डोजर अक्सर जाति और धर्म देखकर ही चलता है. जब प्रदेश में किसी दलित का उत्पीड़न होता है तो इनका बुल्डोजर नहीं चलता.

घटना का विवरण

मेरठ जिले में एक लड़की अपनी मां के साथ जंगल की तरफ जा रही थी. इसी दौरान लड़की को उठा लिया गया और जब मां ने उसे बचाने की कोशिश की, तो उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई.इस घटना ने पूरे इलाके में डर और आक्रोश की लहर फैला दी है . स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहा हैं क्योंकि पीड़ित परिवार से मिलने जाने पर अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया है.

राजनीतिक बयान

कांग्रेस ने @INCSCDept के चेयरमैन @AdvRajendraPal के हवाले से कहा है कि , अगर उत्तर प्रदेश की पुलिस यही मुस्तैदी अपराध को रोकने और दोषियों को सजा दिलाने में लगाए, तो अपराध होने ही बंद हो जाएंगे.यह सरकार केवल दिखावा कर रही है और दलितों की सुरक्षा में गंभीर नहीं है.

बीजेपी की तरफ से फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राज्य में हालिया कई घटनाओं ने प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल खड़े कर दिया हैं.

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विश्लेषण और सवाल-जवाब

सवाल: क्या राज्य प्रशासन अपराध को रोकने में सक्षम है?
विश्लेषण: लगातार बढ़ते अपराध और जातिवाद की घटनाएँ प्रशासन की अक्षमता को उजागर करती हैं. स्थानीय पुलिस के धीमे कदम और राजनीतिक संरक्षण के आरोप इस बात को और गंभीर बनाते हैं.

सवाल: क्या यह घटना सामाजिक असमानता और जातिवाद का संकेत है?
विश्लेषण: मेरठ की इस घटना ने साफ कर दिया है कि जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव और हिंसा आज भी गहराई तक मौजूद है.

निष्कर्ष और सामाजिक प्रभाव

इस मामले ने न केवल मेरठ बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया हैं. अगर सरकार और पुलिस प्रभावी कार्रवाई नहीं करती हैं, तो अपराध और सामाजिक असमानता बढ़ती रहेगी. राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के लिए यह जरूरी है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ.

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