खड़गे का आरोप: ‘सौंदर्यीकरण के नाम पर काशी की आत्मा से छेड़छाड़’
तीसरा पक्ष ब्यूरो वाराणसी, 14 जनवरी 2026— वाराणसी के मणिकर्णिका घाट को लेकर सियासी और सामाजिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सौंदर्यीकरण और रेनोवेशन के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त किया जा रहा है.उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब बनारस में घाटों के पुनर्विकास को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहा हैं.
मणिकर्णिका घाट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि काशी की आत्मा और भारत की प्राचीन सभ्यता का जीवंत प्रतीक माना जाता है. ऐसे में यहां बुलडोज़र चलने की खबरें सामने आने के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है.
खड़गे का सीधा आरोप: नेम-प्लेट संस्कृति का विस्तार
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा है कि,
भोंडे सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर आपने बनारस के मणिकर्णिका घाट में बुलडोज़र चलवाकर सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को ध्वस्त कराया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाकर उन पर केवल अपना नाम दर्ज करना है. खड़गे के मुताबिक पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर छोटे-बड़े मंदिरों को तोड़ा गया और अब प्राचीन घाटों की बारी है.
इतिहास का संदर्भ: गुप्त काल से अहिल्याबाई होलकर तक
कांग्रेस अध्यक्ष ने मणिकर्णिका घाट के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका उल्लेख गुप्त काल के ग्रंथों में मिलता है और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने इसका पुनरुद्धार कराया था.ऐसे में इस घाट से जुड़ी मूर्तियों और संरचनाओं को नष्ट करना केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ है.
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विकास आवश्यक था, तो क्या विरासत को संरक्षित रखते हुए जीर्णोद्धार संभव नहीं था?
दो बड़े सवाल जो खड़गे ने उठाए
क्या विरासत बचाकर विकास नहीं हो सकता था?
खड़गे ने संसद परिसर और जलियांवाला बाग़ का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी रेनोवेशन के नाम पर ऐतिहासिक प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया गया है.उनका आरोप है कि बिना व्यापक सलाह-मशवरे के फैसले लिए गए.
प्राचीन मूर्तियों को मलबे में क्यों डाला गया?
उन्होंने पूछा कि मणिकर्णिका घाट में ध्वस्त की गई सैकड़ों साल पुरानी मूर्तियों को किसी संग्रहालय में सुरक्षित क्यों नहीं रखा गया.
माँ गंगा ने बुलाया है बनाम वर्तमान सवाल
प्रधानमंत्री मोदी के पुराने बयान का जिक्र करते हुए खड़गे ने कहा कि,
आपने कहा था माँ गंगा ने बुलाया है, लेकिन आज माँ गंगा और उसकी सांस्कृतिक धरोहर को भुला दिया गया.
उन्होंने आशंका जताई कि कहीं घाटों को आम जनता और श्रद्धालुओं की पहुंच से दूर करने की मंशा तो नहीं है.मणिकर्णिका घाट वह स्थान है जहां लाखों लोग मोक्ष की कामना के साथ आते हैं, ऐसे में वहां बदलाव गहरी भावनात्मक चोट पहुंचा सकता है.
ये भी पढ़े :BJP–China Meeting पर कांग्रेस का हमला, दोहरा चरित्र का आरोप
ये भी पढ़े :नॉर्थईस्ट भारत आज भी खुद को पराया क्यों महसूस करता है?
राजनीतिक और सामाजिक असर
इस बयान के बाद यह मुद्दा केवल कांग्रेस बनाम बीजेपी तक सीमित नहीं रह गया है। इतिहासकारों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों के बीच भी यह बहस तेज हो रही है कि विकास की परिभाषा क्या होनी चाहिए,नई संरचनाएं या पुरानी आत्मा का संरक्षण?
सरकार की ओर से अब तक इस आरोप पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला संसद और सड़क दोनों पर गूंज सकता है.
निष्कर्ष: विकास या विरासत—संतुलन की जरूरत
मणिकर्णिका घाट का विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश में विकास का मॉडल कैसा होना चाहिए. क्या आधुनिकता के नाम पर इतिहास को मिटाया जा सकता है, या दोनों के बीच संतुलन संभव है?
यह बहस केवल बनारस तक सीमित नहीं, बल्कि देश की हर ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ी हुई है.
स्रोत: सोशल मीडिया (X) पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.


















