मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा: बिहार की विकास वास्तविकता पर सवाल

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Ajit Kumar

बिहार
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राजद ने उठाए सवाल, यात्राओं की घोषणाओं और जमीन पर हालात में बड़ा अंतर

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 16 जनवरी 2026: बिहार में मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई समृद्धि यात्रा को लेकर राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने प्रेस वार्ता में कई गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जिस बिहार की समृद्धि देखने यात्रा पर निकले हैं, वहां वास्तविक स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है.

राजद प्रवक्ता ने कहा कि समृद्धि का मतलब केवल घोषणाओं या आयोजनों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह हर क्षेत्र में खुशहाली, आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा होता है.उन्होंने बिहार की वर्तमान स्थिति को लेकर कई आंकड़े साझा किये है .

बिहार की वर्तमान सामाजिक-आर्थिक स्थिति

गरीबी और आर्थिक विकास
राज्य में लगभग 34 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं.

देश की जीडीपी में बिहार की हिस्सेदारी केवल 4.3 प्रतिशत, जबकि उद्योग में केवल 1.39 प्रतिशत.

नीती आयोग के समग्र विकास संकेतक में बिहार सबसे निचले पायदान पर है.

स्वास्थ्य और शिक्षा
स्वास्थ्य क्षेत्र में राज्य 19 राज्यों में 18वें स्थान पर.

अस्पतालों में 60% डॉक्टर और 40% नर्सिंग स्टाफ पद खाली.

विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आधे से अधिक शिक्षकों की कमी, प्राथमिक से उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 3 लाख से ज्यादा शिक्षक पद रिक्त.

हजारों स्कूल भवनहीन और कई शिक्षण संस्थान संसाधनों के अभाव में काम कर रहा हैं.

रोजगार और पलायन
पिछले पांच वर्षों में सरकार द्वारा रोजगार सृजन के कई दावे किए गए, लेकिन वास्तविक कार्यान्वयन कम रहा.

लगभग तीन करोड़ लोग रोज़ी-रोटी के लिए अन्य राज्यों में पलायन कर चुका हैं, जो रोजगार और आर्थिक अवसरों की कमी दर्शाता है.

सामाजिक और सुरक्षा संकेतक
मातृ मृत्यु दर और नवजात मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से पीछे.

स्कूल ड्रॉपआउट दरें अधिक.

हत्या, गैंगरेप और अन्य अपराध के मामले राज्य में उच्च.

पिछली यात्राओं की समीक्षा
राजद प्रवक्ता ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री जी पहले भी कई यात्राएं कर चुके हैं.

न्याय यात्रा, अधिकार यात्रा, संकल्प यात्रा, विकास यात्रा, विश्वास यात्रा, प्रवास यात्रा, निश्चय यात्रा, सामाजिक सुधार यात्रा और प्रगति यात्रा.

समृद्धि यात्रा उनकी 16वीं यात्रा है.

विशेष रूप से दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में हुई प्रगति यात्रा में लगभग 50,000 करोड़ रुपये की 430 योजनाओं की घोषणा की गई थी. हालांकि, अधिकांश योजनाएं विज्ञापन और प्रचार तक सीमित रह गई.

2015 की महागठबंधन सरकार द्वारा शुरू की गई सात निश्चय योजनाएं जैसे नल-जल और गली संपर्क, उनके जाने के बाद कई मामलों में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई.

राजद का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री सही हैं, तो उन्हें विभागवार योजना कार्यान्वयन और रोजगार सृजन का आंकड़ा जनता के लिए उपलब्ध कराना चाहिए.

समृद्धि यात्रा और वास्तविकता में अंतर

राजद प्रवक्ता ने बताया कि यात्रा के दौरान अक्सर मुख्यमंत्री को सिर्फ चयनित योजनाएं और लोग दिखाए जाते हैं, जिन्हें पदाधिकारी पहले से चिन्हित कर चुके होते हैं.

इस वजह से, जनता के सामने वास्तविक बदलाव नजर नहीं आता.

यात्राओं का नामकरण समृद्धि यात्रा” तब तक सार्थक नहीं है जब तक कि वास्तविक सुधार और विकास नजर न आए.

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 20 वर्षों में मुख्यमंत्री द्वारा की गई यात्राओं और घोषणाओं का वास्तविक प्रभाव जमीन पर नजर नहीं आता, और केवल दिखावा ही देखने को मिलता है.

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समाधान और सुझाव

राजद का सुझाव है कि, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में ठोस और पारदर्शी कदम उठाए जाएँ.

सभी योजनाओं की समीक्षा रिपोर्ट और कार्यान्वयन डेटा जनता के लिए उपलब्ध कराई जाए.

यात्रा केवल प्रचार तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय जनता से मिलकर वास्तविक निरीक्षण किया जाए.

भविष्य की यात्राओं में समग्र और सतत विकास की दिशा में सुधार दिखे.

राजद का कहना है कि ये कदम न केवल यात्राओं की सार्थकता बढ़ाएंगे, बल्कि बिहार के नागरिकों में भरोसा और विकास की भावना भी मजबूत करेंगे.

प्रेस वार्ता में उपस्थित वरिष्ठ नेता

इस प्रेस वार्ता में मौजूद थे:

प्रदेश महासचिव भाई अरुण

डॉ प्रेम गुप्ता

संजय यादव, प्रमोद राम, अभिषेक कुमार

पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष विजय यादव

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