शंभू गर्ल्स हॉस्टल मामला: जांच में नए खुलासों पर पुलिस की भूमिका सवालों में

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Ajit Kumar

बिहार
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भाकपा (माले) ने कहा, शुरुआती शिकायतों को नजरअंदाज करना गंभीर चूक

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 16 जनवरी 2026:पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में जहानाबाद की एक छात्रा की मौत से जुड़े मामले में जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को लेकर अब पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगा हैं.भाकपा (माले) के राज्य सचिव कुणाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि मामले की शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही हुई, जिससे सच्चाई सामने आने में देरी हुई है.

उनका कहना है कि पीड़ित परिवार ने शुरुआत से ही घटना को संदिग्ध बताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन पुलिस ने उस समय इन आशंकाओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया. रिपोर्ट के अनुसार, बाद की जांच में सामने आए तथ्यों ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है.

क्या है पूरा मामला

शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रह रही एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए थे. परिजनों का कहना था कि यह सामान्य मौत नहीं है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

हालांकि, शुरुआती स्तर पर पुलिस ने इसे एक सीमित दायरे की घटना के रूप में देखा. भाकपा (माले) के अनुसार, परिजनों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा हुआ .

जांच में सामने आए तथ्यों को लेकर विवाद

भाकपा (माले) राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि बाद की जांच में सामने आए तथ्यों से यह संकेत मिला है कि मामले में पहले सोचे गए से अधिक गंभीर पहलू हो सकता हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि शुरुआत में ही परिजनों की बातों को गंभीरता से लिया जाता, तो सच्चाई पहले सामने आ सकती थी.

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान परिजनों और समर्थकों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने की खबरें भी सामने आईं, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई.

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

भाकपा (माले) का आरोप है कि, पुलिस ने शुरुआती शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया

मामले को सीमित रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई.

इससे जांच प्रक्रिया पर संदेह पैदा हुआ.

पार्टी का कहना है कि इस तरह की लापरवाही न केवल पीड़ित परिवार के साथ अन्याय है, बल्कि इससे आम लोगों का कानून व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर होता है.

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महिला सुरक्षा को लेकर चिंता

भाकपा (माले) ने इस घटना को राज्य में महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि हाल के समय में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं.

पार्टी के अनुसार, इस तरह के मामलों में यदि समय पर और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तो इससे समाज में असुरक्षा की भावना और गहरी होती है, खासकर छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के बीच.

भाकपा (माले) की मांगें

प्रेस विज्ञप्ति में भाकपा (माले) ने सरकार और प्रशासन से कई मांगें रखीं.

पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए.

यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या तथ्य छुपाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो.

दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ तेज न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाए.

पीड़ित परिवार को न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए.

राज्य के सभी गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा की जाए.

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

भाकपा (माले) ने कहा कि पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और इस मामले में न्याय की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी.

फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में आगे की जांच और कार्रवाई को लेकर आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है.आने वाले दिनों में जांच की दिशा और निष्कर्ष इस मामले में स्थिति को और स्पष्ट कर सकता हैं.

निष्कर्ष

शंभू गर्ल्स हॉस्टल का मामला केवल एक छात्रा की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह जांच प्रक्रिया, पुलिस की जिम्मेदारी और महिला सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है.ऐसे मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच ही जनता के भरोसे को बनाए रखने का एकमात्र रास्ता है.

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