प्रदूषण और टैरिफ जैसे गंभीर मुद्दों पर मोदी सरकार की चुप्पी: AAP का तीखा हमला

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Ajit Kumar

भारत
प्रदूषण और टैरिफ जैसे गंभीर मुद्दों पर मोदी सरकार की चुप्पी: AAP का तीखा हमला

अंतरराष्ट्रीय टैरिफ का दबाव और भारत की अर्थव्यवस्था

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,22 दिसंबर — देश में हर साल प्रदूषण से करीब 20 लाख लोगों की मौत हो रही है, लेकिन इस गंभीर संकट पर संसद में चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास 20 मिनट का भी समय नहीं है. यह आरोप आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने आधिकारिक X (Twitter) हैंडल से जारी बयान में लगाया है.पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय आज़ाद ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की जनता गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, जबकि केंद्र सरकार इन मुद्दों से आंखें मूंदे बैठी है.

AAP का कहना है कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां देश से जुड़े सबसे अहम विषयों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिये. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदूषण, महंगाई, बेरोज़गारी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे विषयों पर सरकार की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई जा रही.

प्रदूषण: एक अदृश्य आपदा, जिसे नज़रअंदाज़ कर रही है सरकार

आम आदमी पार्टी ने अपने बयान में साफ कहा कि प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह जनस्वास्थ्य आपदा बन चुका है. विश्व स्वास्थ्य संगठनों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में शामिल है.महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक, जहरीली हवा लोगों की सांसें छीन रही है.

AAP का आरोप है कि हर साल 20 लाख मौतें होने के बावजूद केंद्र सरकार संसद में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा से बच रही है. न तो कोई ठोस राष्ट्रीय रणनीति सामने रखी जा रही है और न ही राज्यों के साथ समन्वय दिखाई देता है. पार्टी ने सवाल उठाया कि जब लोग सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहा हों, तब सरकार की चुप्पी आखिर किस बात का संकेत है?

अंतरराष्ट्रीय टैरिफ का दबाव और भारत की अर्थव्यवस्था

संजय आज़ाद ने सरकार की विदेश और व्यापार नीति पर भी सवाल उठाया, AAP के अनुसार, अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाना और मैक्सिको जैसे देश द्वारा भी भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाना, यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की व्यापारिक स्थिति कमजोर हो रही है.

पार्टी का कहना है कि टैरिफ बढ़ने का सीधा असर भारतीय निर्यात, उद्योगों और रोज़गार पर पड़ता है. छोटे और मध्यम उद्योग पहले ही महंगाई और कर्ज़ के बोझ से दबे हुए हैं, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय टैरिफ उनके लिए नई मुसीबत खड़ी कर रहा हैं. लेकिन प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार इस मुद्दे पर भी संसद में चर्चा करने से कतरा रही है.

संसद में बहस से क्यों बच रही है सरकार?

AAP ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर सरकार संसद में इन मुद्दों पर चर्चा से क्यों डर रही है.क्या सरकार के पास जवाब नहीं हैं? या फिर सरकार जनता के सवालों से बचना चाहती है?

संजय आज़ाद ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है.लेकिन जब विपक्ष सवाल उठाता है, तो या तो बहस से बचा जाता है या फिर मुद्दों को भटकाने की कोशिश की जाती है.यह संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.

आम जनता पर पड़ता सीधा असर

AAP का कहना है कि प्रदूषण और टैरिफ जैसे मुद्दे किसी राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन से जुड़े सवाल हैं. प्रदूषण से बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है. वहीं टैरिफ बढ़ने से रोज़मर्रा की चीज़ें महंगी होती हैं और नौकरियों पर खतरा बढ़ता है.

पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े-बड़े इवेंट और प्रचार में व्यस्त है, लेकिन ज़मीन पर जनता की समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रही है.

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AAP की मांगें क्या हैं?

आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग की है कि,

संसद में प्रदूषण पर विशेष चर्चा कराई जाए

राष्ट्रीय स्तर पर ठोस और समयबद्ध प्रदूषण नियंत्रण नीति लागू हो

अंतरराष्ट्रीय टैरिफ और व्यापार नीति पर सर्वदलीय बहस हो

छोटे उद्योगों और किसानों को टैरिफ के असर से बचाने के लिए राहत पैकेज दिया जाए

AAP का कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ईमानदारी से चर्चा नहीं होगी, तब तक देश की समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी.

निष्कर्ष

AAP और राज्यसभा सांसद संजय आज़ाद के इस बयान ने एक बार फिर केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं.प्रदूषण से हो रही लाखों मौतें और अंतरराष्ट्रीय टैरिफ का बढ़ता दबाव ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सरकार की चुप्पी चिंता पैदा करती है.लोकतंत्र में जवाबदेही जरूरी है और संसद ही वह मंच है, जहां देश की सच्ची तस्वीर सामने आनी चाहिए.

अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इन सवालों का जवाब देती है या फिर इन मुद्दों को यूं ही नज़रअंदाज़ करती रहती है.

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