अंकिता भंडारी केस: सजा के बाद भी VIP कौन? आज फिर उठे सवाल

| BY

Ajit Kumar

भारत
अंकिता भंडारी केस: सजा के बाद भी VIP कौन? आज फिर उठे सवाल

तीन साल बाद भी अधूरा सच, अंकिता को पूरा न्याय कब?

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली, 10 जनवरी 2026— उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी केस को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है.महिला कांग्रेस ने आज दिल्ली में इस मामले को उठाते हुए कहा कि अदालत द्वारा तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा दिए जाने के बावजूद उस कथित VIP की पहचान अब तक सामने नहीं आई, जिसके लिए अंकिता पर दबाव डालने का आरोप लगा था. महिला कांग्रेस का कहना है कि जब घटना को तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, तो अब भी पूरे सच का सामने न आना गंभीर सवाल खड़ा करता है.

अंकिता भंडारी हत्याकांड: घटना का संक्षिप्त विवरण

अंकिता भंडारी उत्तराखंड के एक निजी रिजॉर्ट में कार्यरत थीं.24 सितंबर 2022 को उनका शव नहर से बरामद किया गया था. इसके बाद अंकिता के माता-पिता ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया, जिससे मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया.परिवार और सामाजिक संगठनों ने इसे केवल हत्या नहीं, बल्कि सत्ता-संरक्षण से जुड़ा मामला बताया.

गिरफ्तारी और जनता का आक्रोश

मामले ने तूल पकड़ने पर भाजपा नेता विनोद आर्या के बेटे पुलकित आर्या, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड समेत कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार पर निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव बढ़ा.

 SIT जांच और अदालत का फैसला

सरकार ने अक्टूबर 2022 में विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर जांच सौंपी. SIT की रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. हालांकि, जांच के दौरान जिस कथित VIP की भूमिका को लेकर सवाल उठा , उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई.

 VIP कौन? जांच पर सवाल

महिला कांग्रेस का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति का नाम सामने आया था, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया.और अगर किसी VIP की भूमिका नहीं थी, तो SIT द्वारा इसका स्पष्ट खंडन क्यों नहीं किया गया.

 महिला कांग्रेस का सरकार पर हमला

महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने आज दिल्ली में कहा कि यदि केंद्र सरकार बड़े फैसले तुरंत ले सकती है, तो तीन वर्षों में इस मामले में पूरा न्याय क्यों नहीं हो सका. उन्होंने यह भी कहा कि अंकिता के पिता जिन लोगों के नाम लगातार ले रहे हैं, उन पर जांच की स्थिति सार्वजनिक नहीं की गई.

ये भी पढ़े :मनरेगा खत्म करने की साजिश? अशोक गहलोत का केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप
ये भी पढ़े :पंकज मोदी नियुक्ति विवाद: क्या सत्ता में रिश्तेदारी योग्यता से ऊपर है?

 बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल

महिला कांग्रेस ने यह भी पूछा कि बिना न्यायिक आदेश के रिजॉर्ट पर बुलडोजर क्यों चलाया गया. क्या यह सबूत नष्ट करने की कार्रवाई थी, और यदि हां, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई.

 मंत्री के बेटे का मामला

इस केस में मंत्री के बेटे की संलिप्तता सामने आने के बाद केवल राजनीतिक निष्कासन को पर्याप्त नहीं माना जा रहा. महिला कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या नैतिक जिम्मेदारी तय करने के लिए शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई जवाबदेही तय की गई.

महिला सुरक्षा पर व्यापक सवाल

यह मामला महिला सुरक्षा योजनाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़ा करता है. महिला संगठनों का कहना है कि क्या गरीब परिवार की बेटी को वही सुरक्षा और न्याय मिलता है, जो प्रभावशाली वर्ग से जुड़ी महिलाओं को मिलता है.

 आगे की मांगें

महिला कांग्रेस ने मांग की कि दोषियों को भविष्य में किसी भी तरह की रिहाई न मिले, सबूत नष्ट करने वालों पर कार्रवाई हो और यह स्पष्ट किया जाए कि इस पूरे मामले में किसने राजनीतिक संरक्षण दिया.

न्यूज़ स्रोत :महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा का 10 जनवरी 2026 को दिल्ली में दिया गया @INCIndia x  पर बयान के आधार पर 

Trending news

Leave a Comment