CBI जांच की मांग क्यों तेज़ हो रही है?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पाटना, 6 ,जनवरी— उत्तराखंड की शांत पहाड़ियों में गूंज रहा है एक सवाल— अंकिता भंडारी को न्याय कब?
यह सिर्फ़ एक नारा नहीं, बल्कि उस पीड़ा, आक्रोश और न्याय की पुकार का प्रतीक है, जो पूरे राज्य और देश में महसूस की जा रही है.
कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेताओं ने एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर गंभीर सवाल उठाया हैं. AICC की सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने X (Twitter) पर जारी बयान में इस मामले को सत्ता-संरक्षित अपराध करार देते हुए CBI जांच की मांग को दोहराया है.
क्या है अंकिता भंडारी मामला?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड की एक साधारण परिवार से आने वाली बेटी थी, जो रोज़गार की तलाश में एक निजी रिसॉर्ट में काम कर रही थी. आरोप है कि उस पर अनैतिक दबाव बनाया गया.जब उसने इसका विरोध किया और इनकार किया, तो उसके साथ निर्मम हत्या कर दी गई.
यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि आरोपियों में सत्तारूढ़ दल से जुड़े प्रभावशाली लोगों के परिजन शामिल बताया गया है. यही वजह है कि इस केस ने सिर्फ़ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है.
सबूत मिटाने के आरोप और बुलडोजर कार्रवाई
इस हत्याकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब घटनास्थल पर बुलडोजर कार्रवाई किया गया .
कांग्रेस का आरोप है कि,
अपराध से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत नष्ट किया गया है .
जांच को प्रभावित करने की कोशिश हुई है .
प्रशासन ने जल्दबाज़ी में कार्रवाई कर सच्चाई को दबाने का प्रयास किया है.
सुप्रिया श्रीनेत के अनुसार, अगर सरकार निष्पक्ष होती तो पहले फोरेंसिक जांच, सबूतों का संरक्षण और न्यायिक निगरानी सुनिश्चित की जाती.
BJP नेतृत्व तक पहुंचते सवाल
कांग्रेस के बयान में यह भी कहा गया है कि इस पूरे कांड के तार BJP के राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व तक पहुंचने की बात सामने आ रही है.
हालांकि इन आरोपों पर अभी कानूनी पुष्टि बाकी है, लेकिन यही वजह है कि,
मामले पर संदेह गहराता जा रहा है.
राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठ रहा हैं.
जनता का भरोसा स्थानीय जांच एजेंसियों से कम हो रहा है.
उत्तराखंड सरकार पर गंभीर आरोप
कांग्रेस ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि,
सरकार,चैन की नींद सो रही है.
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में कोई गंभीरता नहीं.
राजनीतिक संरक्षण के कारण निष्पक्ष जांच संभव नहीं.
यही कारण है कि कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार से न्याय की उम्मीद करना अब व्यर्थ है.
CBI जांच की मांग क्यों?
CBI जांच की मांग के पीछे मुख्य तर्क हैं,
निष्पक्षता, राज्य पुलिस और प्रशासन पर राजनीतिक दबाव के आरोप.
विश्वसनीयता, CBI जांच से जनता का भरोसा बहाल हो सकता है.
सच्चाई तक पहुंच, बड़े राजनीतिक नामों की निष्पक्ष जांच.
पीड़ित परिवार को न्याय, बिना किसी दबाव के दोषियों को सजा.
कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि अंकिता को न्याय हर कीमत पर मिलना चाहिये , और यह तभी संभव है जब जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाए.
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जनता का आक्रोश और सामाजिक दबाव
आज उत्तराखंड की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक, Justice for Ankita, CBI Inquiry Now, Justice Delayed is Justice Denied जैसे नारों की गूंज सुनाई दे रही है.
यह मामला अब सिर्फ़ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा, सत्ता की जवाबदेही और न्याय व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है.
निष्कर्ष: यह सिर्फ़ अंकिता की लड़ाई नहीं
अंकिता भंडारी का मामला एक कड़वा सच उजागर करता है,
अगर सत्ता से जुड़े लोग आरोपी हों, तो क्या न्याय की राह और कठिन हो जाती है?
कांग्रेस और विपक्ष का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ़ अंकिता की नहीं, बल्कि,
हर उस बेटी की है जो अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाती है.
हर उस परिवार की है जो न्याय के लिए संघर्ष करता है,और हर उस नागरिक की है जो कानून के राज में विश्वास करता है.
अब देखना यह है कि क्या सरकार जनता की आवाज़ सुनती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा.

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