मंत्री जी संपत्ति बढ़ाने का गुर बिहारवासियों को भी सिखा दीजिए!

| BY

Ajit Kumar

बिहार
मंत्री जी संपत्ति बढ़ाने का गुर बिहारवासियों को भी सिखा दीजिए!

बिहार में राजनीतिक नैतिकता और संपत्ति वृद्धि पर उठते सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,6 जनवरी 2025 — बिहार की राजनीति एक बार फिर जनचर्चा के केंद्र में है. इस बार मुद्दा है,जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में असाधारण वृद्धि और उससे जुड़े नैतिक सवाल, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी से सार्वजनिक रूप से यह अनुरोध किया है कि यदि उन्होंने बीते पांच वर्षों में अपनी संपत्ति को कई गुना बढ़ाने का कोई विशेष,फार्मूला खोज लिया है, तो उसे बिहार की जनता के साथ भी साझा किया जाना चाहिये.

यह टिप्पणी केवल एक राजनीतिक बयान भर नहीं है, बल्कि यह जनसेवक की जवाबदेही, पारदर्शिता और सार्वजनिक नैतिकता जैसे गंभीर मुद्दों को सामने लाती है.

हलफनामों के आंकड़े और चौंकाने वाली तस्वीर

राजद प्रवक्ता द्वारा सामने रखे गये आंकड़े अपने आप में कई सवाल खड़ा करता हैं. वर्ष 2020 में जब अशोक चौधरी मंत्री बने थे, तब उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग 72.89 लाख रुपया था.वहीं वर्ष 2026 में प्रस्तुत विवरण के अनुसार उनकी कुल संपत्ति बढ़कर लगभग 22 करोड़ रुपये हो चुका है.

यदि इन आंकड़ों को सीधे शब्दों में समझा जाये, तो यह बीते पांच वर्षों में लगभग 31 गुना वृद्धि को दर्शाता है.यह वृद्धि न केवल असाधारण है, बल्कि आम नागरिकों के अनुभव से बिल्कुल विपरीत भी है.

सबसे कम से सबसे ज्यादा संपत्ति वालों में शुमार

राजनीतिक दृष्टि से यह तथ्य और भी उल्लेखनीय हो जाता है कि वर्ष 2020 में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में अशोक चौधरी सबसे कम संपत्ति वाले मंत्री थे.लेकिन 2025 में बनी नई सरकार में वे दूसरे सबसे अधिक संपत्ति वाले मंत्री बन गये हैं.

उनसे अधिक संपत्ति केवल एक मंत्री,रमा निषाद—के पास बताई जा रही है. यह तेज़ी से बदली हुई आर्थिक स्थिति अपने आप में जनता के बीच चर्चा का विषय बन गई है.

क्या यह असाधारण सफलता का फार्मूला है?

राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने व्यंग्यात्मक लेकिन गंभीर लहजे में सवाल उठाया है कि यदि यह संपत्ति वृद्धि किसी वैध, पारदर्शी और विशेष आर्थिक कुशलता का परिणाम है, तो उसे बिहारवासियों के साथ साझा क्यों नहीं किया जाता?

बिहार आज भी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. सरकारी और सामाजिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य की लगभग एक तिहाई आबादी आज भी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है. ऐसे में यदि कोई जनप्रतिनिधि मात्र पांच वर्षों में अपनी संपत्ति को दर्जनों गुना बढ़ा सकता है, तो यह ज्ञान आम जनता के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है.

गरीबी बनाम संपत्ति: बढ़ती खाई

एक ओर बिहार का बड़ा वर्ग रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता में बैठे कुछ लोग अभूतपूर्व आर्थिक वृद्धि का उदाहरण पेश कर रहा हैं. यही वह बिंदु है, जहां सार्वजनिक नैतिकता और जवाबदेही का प्रश्न खड़ा होता है.

जनसेवक होने का अर्थ केवल पद और सत्ता नहीं, बल्कि जनता के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की जिम्मेदारी भी होता है. यदि संपत्ति वृद्धि का कोई असाधारण फार्मूला है, तो उसका लाभ केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक होना चाहिये.

पारदर्शिता लोकतंत्र की आत्मा

लोकतंत्र में पारदर्शिता केवल एक आदर्श नहीं, बल्कि जनता का अधिकार है. जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए हलफनामे इसी पारदर्शिता का माध्यम होते हैं.जब इन हलफनामों में दर्ज आंकड़े असामान्य बदलाव दिखाता हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है.

राजद का यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर निजी हमला नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में नैतिक आचरण की मांग है. जनता यह जानना चाहती है कि सत्ता में रहते हुए आय और संपत्ति के स्रोत क्या हैं और वे किस प्रकार बढ़ा.

ये भी पढ़े :अगिआँव विधानसभा चुनाव से जुड़ा मामला हाईकोर्ट पहुँचा
ये भी पढ़े :भारत के राजनीतिक बंदियों को आज़ाद करो: क्यों ज़रूरी है यह मांग

बिहार को सोने का कटोरा बनाने की कल्पना

चित्तरंजन गगन का यह कथन कि यदि यह फार्मूला हर बिहारवासी को मिल जाए तो,बिहार सोने का कटोरा बन सकता है, व्यंग्य के साथ-साथ एक कड़वी सच्चाई भी बयान करता है.बिहार की क्षमता, संसाधन और मानव शक्ति किसी से कम नहीं है,जरूरत है ईमानदार नीति, समान अवसर और पारदर्शी शासन की.

निष्कर्ष

अशोक चौधरी की संपत्ति में हुई वृद्धि का मुद्दा केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि जनविश्वास का है.जनता यह अपेक्षा करती है कि उनके प्रतिनिधि न केवल कानून का पालन करें, बल्कि नैतिक आदर्श भी प्रस्तुत करें.

यदि संपत्ति बढ़ाने का यह रास्ता पूरी तरह वैध, पारदर्शी और जनहित में है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यही लोकतंत्र की सच्ची भावना है और यही एक जनसेवक की असली जिम्मेदारी भी.

Trending news

Leave a Comment