बिहार की अस्मिता पर हमला या राजनीतिक संवेदनहीनता?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,5 जनवरी भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में महिला सम्मान, समानता और सुरक्षा केवल संवैधानिक मूल्य नहीं बल्कि सामाजिक नैतिकता की बुनियाद हैं. लेकिन जब सार्वजनिक जीवन में बैठे लोग महिलाओं को वस्तु की तरह आंकने लगें और उनकी कीमत तय करने जैसी भाषा का प्रयोग करें, तब यह सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि पूरे समाज की सोच पर सवाल बन जाता है. बिहार की बेटियों को लेकर सामने आया हालिया विवाद इसी गंभीर चिंता को उजागर करता है.
युवा राष्ट्रीय जनता दल (युवा राजद) के प्रदेश अध्यक्ष राजेश यादव ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार में मंत्री रेखा आर्य को लेकर दिए गए गिरधारी लाल साहू के आपत्तिजनक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.उन्होंने इसे महिलाओं के प्रति भाजपा और संघ परिवार की कथित मानसिकता का परिचायक बताया है.
आपत्तिजनक बयान और राजनीतिक चुप्पी
राजेश यादव ने कहा कि किसी महिला जनप्रतिनिधि के बारे में 20-25 हजार में खरीदने, जैसी भाषा का प्रयोग केवल व्यक्तिगत विकृति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक दल की महिलाओं के प्रति सोच को उजागर करता है.यह बयान न सिर्फ निंदनीय है बल्कि भारतीय समाज की उन बेटियों का घोर अपमान है, जो संघर्ष और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं.
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस बयान के बाद भी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की चुप्पी के साथ-साथ, हाल ही में बने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन की खामोशी पर भी सवाल उठ रहा हैं, जो स्वयं बिहार से आते हैं.
बिहार की बेटियों पर हमला और राज्य नेतृत्व की चुप्पी
राजेश यादव ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिहार भाजपा और जेडीयू के कई नेता भी इस मामले पर मौन साधे हुये हैं. बिहार की बेटियों की अस्मिता पर खुलेआम हमला होने के बावजूद कोई स्पष्ट निंदा या अनुशासनात्मक कार्रवाई सामने न आना राजनीतिक संवेदनहीनता को दर्शाता है.
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई नेता महिलाओं की गरिमा को इस स्तर तक ठेस पहुंचाता है और फिर भी पार्टी नेतृत्व उसे संरक्षण देता है, तो यह महिला सशक्तिकरण के दावों की सच्चाई को उजागर करता है.
महिला सम्मान बनाम राजनीतिक दोहरापन
युवा राजद अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा अक्सर महिला सम्मान की बात करता है, लेकिन व्यवहार में उसके नेताओं के बयान और आचरण इसके ठीक उलट दिखाई देता हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने विवादित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जब शीर्ष नेतृत्व से ही महिलाओं के प्रति असंवेदनशील भाषा का उदाहरण मिलता हो, तो निचले स्तर पर ऐसे बयान आना कोई आश्चर्य की बात नहीं रह जाता है.
महिला सशक्तिकरण केवल नारे और मंचों तक सीमित नहीं होना चाहिये, बल्कि यह व्यवहार, भाषा और जवाबदेही में भी दिखना चाहिये.
कानूनी कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग
युवा राजद ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि भाजपा नेता गिरधारी लाल साहू की तत्काल गिरफ्तारी हो और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाये.इसके साथ-साथ पार्टी ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से बिहार की बेटियों से सार्वजनिक माफी की मांग भी की है.
राजेश यादव ने कहा कि अगर ऐसे मामलों में कठोर कदम नहीं उठाया गया , तो यह संदेश जाएगा कि महिलाओं के अपमान को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जो लोकतंत्र और सामाजिक न्याय दोनों के लिए खतरनाक है.
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समाज और राजनीति के लिए चेतावनी
यह मुद्दा केवल एक पार्टी या एक नेता तक सीमित नहीं है. यह सवाल पूरे राजनीतिक तंत्र और समाज से जुड़ा है कि क्या हम महिलाओं को सम्मानजनक नागरिक मानते हैं या अब भी उन्हें सौदेबाजी की भाषा में देखते हैं.
बिहार की बेटियां शिक्षा, खेल, राजनीति और हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं.उनके सम्मान से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकता.
निष्कर्ष
महिलाओं के प्रति अपमानजनक बयान केवल शब्द नहीं होते, वे सोच को दर्शाते हैं.यदि समय रहते ऐसे बयानों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह सामाजिक मूल्यों को कमजोर करेगा.युवा राजद द्वारा उठाया गया यह सवाल केवल राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक और संवैधानिक भी है.
अब देखना यह है कि भाजपा नेतृत्व इस चुप्पी को तोड़कर महिला सम्मान के पक्ष में ठोस कदम उठाता है या नहीं.

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