नीरज कुमार की चुप्पी पर उठते सवाल: एजाज अहमद का तीखा हमला
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना ,6 जनवरी — बिहार की राजनीति एक बार फिर जनता से जुड़े मूल सवालों को लेकर गरमा गई है. गरीबों के घरों पर चल रहे बुलडोजर, अति पिछड़ा समाज के अधिकारों में कटौती, बढ़ता अपराध और भ्रष्टाचार,इन सभी मुद्दों पर सरकार और उसके प्रवक्ताओं की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बिहार प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि बिहार की जनता अब चालाकी भरी राजनीति को समझ चुकी है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिशें अब सफल नहीं होंगी.
लालू-तेजस्वी फोबिया से बाहर आने की नसीहत
पटना में जारी बयान में एजाज अहमद ने कहा कि नीरज कुमार की राजनीति का केंद्र केवल लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव तक सिमट कर रह गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बिहार में विकास, कानून-व्यवस्था और आम जनता के हितों पर बात करना अब सरकार की प्राथमिकता नहीं रही? हर मुद्दे पर विपक्ष पर हमला करना आसान है, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि राज्य में अपराध क्यों बढ़ रहा है और उसे रोकने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं.
बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार पर सरकार मौन क्यों?
एजाज अहमद ने रोहतासगढ़ रोपवे परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि 13 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से बना रोपवे भ्रष्टाचार और लूट की भेंट चढ़ गया, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई. उन्होंने आरोप लगाया कि जब माफिया और अपराधी सरकार के संरक्षण में पनप रहा हैं, तब सत्ता पक्ष के प्रवक्ताओं की चुप्पी कई सवाल खड़े करता है.
बुलडोजर नीति और गरीबों की पीड़ा
राजद प्रवक्ता ने बुलडोजर नीति को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि बिहार में आम जनता, गरीब, शोषित और वंचित वर्ग बुलडोजर की कार्रवाई से त्राहि-त्राहि कर रहा है, लेकिन नीरज कुमार जैसे नेता इस पर एक शब्द भी नहीं बोलते. सवाल यह है कि जिन लोगों के पास सिर छुपाने के लिए झोपड़ी ही सहारा है, उनके घरों को उजाड़ना किस तरह का न्याय है?
महिलाओं से वादा, फिर वही आंसू
एजाज अहमद ने महिलाओं को दिए गए ₹10,000 के चुनावी लाभ पर भी सवाल उठाया,उन्होंने कहा कि चुनाव के समय महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर वोट तो ले लिए गया, लेकिन अब उन्हीं महिलाओं के घरों और झोपड़ियों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है. ठंड के इस मौसम में लोगों को बेघर करना अमानवीय है. उन्होंने पूछा, की इन गरीब महिलाओं और परिवारों का कसूर क्या है?
क्या एनडीए को जनता का जनादेश नहीं मिला?
राजद प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा कि क्या सरकार को यह एहसास हो गया है कि एनडीए की जीत बिहार की जनता के वास्तविक जनादेश से नहीं हुई? यही वजह है कि नई सरकार बनते ही बुलडोजर नीति अपनाकर आम जनता को प्रताड़ित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सत्ता की असुरक्षा ही इस तरह की कठोर और जनविरोधी नीतियों को जन्म देती है.
अति पिछड़ा समाज और आरक्षण का सवाल
एजाज अहमद ने अति पिछड़ा समाज के अधिकारों को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव ने अति पिछड़ा समाज को सम्मान दिया और तेजस्वी यादव ने आरक्षण व्यवस्था में 8% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की. इसके विपरीत, एनडीए सरकार पर 16% आरक्षण की चोरी, और हकमारी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अति पिछड़ा समाज के 8% आरक्षण को रोक कर रखा गया है.
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एनडीए की नीति पर सीधा आरोप
राजद प्रवक्ता ने कहा कि यह किसी से छुपा नहीं है कि एनडीए का मतलब गरीब, शोषित, वंचित, पिछड़ा, दलित और अति पिछड़ा समाज को उनके अधिकारों से वंचित करना है. उन्होंने नीरज कुमार को सलाह दी है कि वे व्यक्तिगत आरोपों और विपक्ष विरोधी बयानबाजी से बाहर निकलें और बिहार की जनता के असली मुद्दों पर बात करें.
जनता सब समझ रही है
एजाज अहमद ने अपने बयान के अंत में कहा कि बिहार की जनता अब राजनीतिक चालबाज़ी को भली-भांति समझ चुकी है. लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के प्रति जनता का भरोसा ही सत्ता पक्ष की बेचैनी का कारण है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजद हमेशा गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ता रहेगा और जनविरोधी नीतियों का डटकर विरोध करेगा.
निष्कर्ष
बिहार की राजनीति इस समय निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. एक ओर सत्ता पक्ष है, जिस पर चुप्पी और जनविरोधी नीतियों के आरोप लग रहा हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है. बुलडोजर नीति, आरक्षण, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे सवालों पर जनता अब जवाब चाहती है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन सवालों का सामना कैसे करती है और क्या बिहार की राजनीति वास्तव में जनता के मुद्दों की ओर लौटेगी.

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