पवन खेड़ा बोले– बंद दरवाज़ों के पीछे की राजनीति देश पर भारी पड़ती है
तीसरा पक्ष ब्यूरो दिल्ली,13 जनवरी 2026— दिल्ली की सियासत एक बार फिर चीन को लेकर गर्मा गई है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के बीच हुई बैठक को लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. कांग्रेस का आरोप है कि BJP सार्वजनिक मंचों पर राष्ट्रवाद और चीन विरोध की राजनीति करती है, लेकिन बंद दरवाज़ों के पीछे वही पार्टी चीन से संवाद और सौदेबाज़ी करती दिखती है.
कांग्रेस नेता और AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने BJP की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे ,दोगलापन, ढोंग और मक्कारी करार दिया. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दिया है .
लाल आंखें नहीं, लाल कारपेट बिछाई – कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर BJP पर तीखा व्यंग्य करते हुए लिखा है कि,
BJP ने गिरगिट को भी एक रंग सिखा दिया है. जिन्हें चीन को लाल आंखें दिखानी थीं, उनके लिए BJP ने लाल कारपेट बिछा दिया है.
उन्होंने आगे दावा किया कि BJP सत्ता में आने से पहले भी चीन जाकर CPC नेताओं से मुलाकात करती रही है और RSS से जुड़े लोग वहां प्रशिक्षण लेते रहे हैं.
पवन खेड़ा का सीधा बयान
दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए पवन खेड़ा ने कहा है कि,
हमें किसी राजनीतिक दल के किसी विदेशी दल से मिलने पर आपत्ति नहीं है. लोकतंत्र में संवाद होना चाहिए. लेकिन हमारी आपत्ति BJP के दोगलेपन से है. वर्षों तक BJP कांग्रेस पर चीन के साथ MoU साइन करने का आरोप लगाती रही और आज खुद CPC से बैठक कर रही है.
खेड़ा ने सवाल उठाया कि अगर यह संवाद राष्ट्रहित में है, तो इसे सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं रखा जाता है.
बंद दरवाज़ों के पीछे क्या तय होता है?
कांग्रेस का आरोप है कि BJP की विदेश नीति पारदर्शिता से दूर है. पवन खेड़ा ने कहा कि,
बंद दरवाज़ों के पीछे होने वाली इन बैठकों के बाद देश को खामियाजा भुगतना पड़ता है.चाहे वह सीमा विवाद हो, व्यापार घाटा हो या रणनीतिक चुप्पी.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चीन भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर लगातार आक्रामक रुख अपनाता रहा है, ऐसे में BJP का यह व्यवहार सवालों के घेरे में आता है.
BJP बनाम कांग्रेस: MoU विवाद फिर चर्चा में
यह बयान ऐसे समय आया है जब BJP अक्सर कांग्रेस पर आरोप लगाती रही है कि उसने चीन के साथ राजनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया था.कांग्रेस अब पलटवार करते हुए पूछ रही है कि,
अगर संवाद गलत था, तो BJP खुद CPC से क्यों मिली?
अगर संवाद सही है, तो कांग्रेस को वर्षों तक देशद्रोही क्यों बताया गया?
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राजनीतिक विश्लेषण: बयान बनाम व्यवहार
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह विवाद सिर्फ एक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि BJP की चीन नीति और उसके सार्वजनिक बयानों के बीच विरोधाभास को उजागर करता है.
एक वरिष्ठ विश्लेषक का कहना है कि राष्ट्रवाद की राजनीति में चीन एक संवेदनशील मुद्दा है और इस पर किसी भी तरह का विरोधाभास जनता के बीच अविश्वास पैदा कर सकता है.
BJP की ओर से जवाब?
खबर लिखे जाने तक BJP की ओर से इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.हालांकि, पार्टी पहले भी यह कहती रही है कि अंतरराष्ट्रीय संवाद कूटनीति का हिस्सा होता है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए.
निष्कर्ष: राजनीति, राष्ट्र और पारदर्शिता
BJP–CPC बैठक को लेकर उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है.सवाल सिर्फ बैठक का नहीं, बल्कि नीयत, पारदर्शिता और जवाबदेही का है. जनता यह जानना चाहती है कि राष्ट्रहित के नाम पर जो फैसले लिए जा रहे हैं, वे कितने खुले और भरोसेमंद हैं.

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