BJP सरकार पर कांग्रेस का बड़ा हमला: मनरेगा से जनगणना तक, कॉरपोरेट हितों की राजनीति का आरोप

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Ajit Kumar

भारत
BJP सरकार पर कांग्रेस का बड़ा हमला: मनरेगा से जनगणना तक, कॉरपोरेट हितों की राजनीति का आरोप

जल-जंगल-जमीन और मनरेगा पर संकट: केंद्र सरकार पर कांग्रेस का निशाना

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली,28 दिसंबर कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर केंद्र की BJP सरकार पर तीखा हमला बोला है. पार्टी के आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल @INCIndia पर साझा किए गए बयान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि बीते वर्षों में BJP सरकार ने चंद पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए कानूनों में बदलाव किया गया, जबकि आम जनता के अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया गया.

यह बयान दिल्ली स्थित इंदिरा भवन से सामने आया, जहां कांग्रेस नेतृत्व ने मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को केंद्र में रखा.

मनरेगा पर सबसे बड़ा वार: गरीबों की रीढ़ तोड़ी गई

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को लेकर गंभीर चिंता जताया है. उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण भारत के करोड़ों गरीबों के लिए रोजगार और सम्मानजनक जीवन की गारंटी थी, लेकिन BJP सरकार ने इसे व्यवस्थित रूप से कमजोर किया है.

कांग्रेस का आरोप है कि,

मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की गई है.

मजदूरी भुगतान में देरी बढ़ी,

काम के दिनों में कमी आई है ,

योजना को अप्रभावी साबित करने के लिए गलत आंकड़े पेश किया गया है.

खड़गे के अनुसार, मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है, और इसे कमजोर करना सीधे-सीधे गरीब विरोधी नीति को दर्शाता है.

जल, जंगल और जमीन की लूट का आरोप

कांग्रेस ने BJP सरकार पर प्राकृतिक संसाधनों की लूट को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया है . पार्टी का कहना है कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े कानूनों में ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा हुआ और स्थानीय समुदायों, आदिवासियों तथा किसानों के अधिकारों को नुकसान पहुंचा है.

कांग्रेस का दावा है कि,

पर्यावरणीय नियमों को कमजोर किया गया है ,

भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सरल बनाकर कंपनियों को लाभ दिया गया.

ग्राम सभाओं और स्थानीय स्वशासन की भूमिका को सीमित किया गया है.

इन कदमों से न केवल पर्यावरण को खतरा है, बल्कि सामाजिक असंतुलन भी बढ़ा है.

जनगणना नहीं कराने पर सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने सरकार द्वारा अब तक जनगणना (Census) न कराए जाने को भी गंभीर मुद्दा बताया है. उन्होंने कहा कि जनगणना किसी भी देश की नीतिगत योजना की बुनियाद होती है.

कांग्रेस का आरोप है कि,

सरकार सच छिपाने के लिए जनगणना से बच रही है.

फर्जी या अधूरे आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाई जा रही हैं.

सामाजिक और आर्थिक हकीकत सामने न आने देने की कोशिश की जा रही है.

खड़गे के मुताबिक, बिना जनगणना के योजनाओं का सही लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच सकता.

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फर्जी आंकड़ों से विकास’ का भ्रम?

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि BJP सरकार आंकड़ों के खेल के जरिए देश में विकास की झूठी तस्वीर पेश कर रही है.बेरोजगारी, महंगाई और असमानता जैसे मुद्दों पर वास्तविक स्थिति छिपाई जा रही है.

कांग्रेस का कहना है कि,

बेरोजगारी के आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाता है .

महंगाई से जनता त्रस्त है, लेकिन सरकारी दावे अलग हैं.

आर्थिक असमानता बढ़ती जा रही है.

इन मुद्दों पर सरकार की चुप्पी को कांग्रेस ने जवाबदेही से बचने की कोशिश बताया है.

कॉरपोरेट बनाम आम जनता की राजनीति?

अपने बयान में खड़गे ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा सरकार की नीतियां चंद पूंजीपतियों के पक्ष में झुकी हुई हैं. कांग्रेस का आरोप है कि कानूनों में बदलाव का लाभ आम किसान, मजदूर या युवा को नहीं, बल्कि बड़े उद्योगपतियों को मिला है.

कांग्रेस ने यह भी दोहराया कि वह,

संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय

गरीब, किसान और मजदूर के अधिकार, के लिए संघर्ष जारी रखेगी.

राजनीतिक संदेश और आगे की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस का यह बयान आने वाले समय में सरकार को घेरने की रणनीति का हिस्सा है. मनरेगा, जनगणना और संसाधनों की लूट जैसे मुद्दे सीधे आम जनता से जुड़ा हैं और इन पर बहस तेज होने की संभावना है.

निष्कर्ष

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान BJP सरकार की नीतियों पर एक व्यापक राजनीतिक हमला है. मनरेगा की स्थिति, जनगणना का अभाव और कॉरपोरेट-केंद्रित नीतियों के आरोप आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श को और धार देने वाला हैं. अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और जनता इसे किस रूप में स्वीकार करती है.

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