चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठे सवाल — राजद ने कहा, संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में आयोग विफल

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Kumar Ranjit

बिहार
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठे सवाल — राजद ने कहा, संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में आयोग विफल

वोट चोरी के आरोप और आचार संहिता उल्लंघन पर आयोग की चुप्पी खतरनाक संकेत

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 5 नवंबर 2025—राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने आज पटना में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं.उन्होंने कहा कि देश का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संस्थान,चुनाव आयो,अब लोगों के बीच संदेह के घेरे में आ गया है.
उनका आरोप है कि आयोग अपने संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है, और इससे लोकतंत्र की जड़ें कमजोर हो रही हैं.

राहुल गांधी के आरोप से बढ़ी बहस

चित्तरंजन गगन ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जब खुलेआम और सबूतों के साथ वोट चोरी के आरोप लगाए, तब आयोग को तुरंत स्पष्टीकरण देना चाहिए था.
राहुल गांधी ने जो कहा, वह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं था, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा से जुड़ा सवाल था.लेकिन आयोग ने उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. यह चुप्पी खुद में एक संकेत है कि सब कुछ ठीक नहीं है.

आचार संहिता उल्लंघन पर मूकदर्शक बना आयोग

राजद प्रवक्ता ने बिहार के सियासी हालात का जिक्र करते हुए कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद, सत्ताधारी दल द्वारा खुलेआम उल्लंघन किए जा रहे हैं.
विपक्ष ने कई बार आयोग को लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया, लेकिन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की, गगन ने कहा.

उन्होंने बताया कि राजद सांसद संजय यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर बताया कि स्वीप कार्यक्रम के नाम पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हो रहा है और सत्तारूढ़ दल के प्रचार के लिए प्रशासनिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
लेकिन आयोग ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया.

जीविका समूह की महिलाओं को पैसे देने पर भी कार्रवाई नहीं

राजद प्रवक्ता ने कहा कि पहले भी राज्यसभा सांसद डॉ. मनोज कुमार झा ने आयोग को लिखा था कि आचार संहिता लागू होने के बाद जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं के खाते में ₹10,000 की राशि दी जा रही है, जबकि मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा चुनावी मंच से खुद की थी.
फिर भी, आयोग ने कोई संज्ञान नहीं लिया.
यह सीधा चुनावी लाभ पहुंचाने का मामला है, फिर भी आयोग की आंखें बंद हैं, उन्होंने टिप्पणी की.

केंद्रीय मंत्री की धमकी पर औपचारिक कार्रवाई मात्र

चित्तरंजन गगन ने एक केंद्रीय मंत्री के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि,
जब एक मंत्री ने खुलेआम कहा कि विपक्षी मतदाता घर से बाहर न निकलें, तब आयोग को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी.पहले के चुनावों में ऐसे मामलों में ताड़ीपार या चुनाव क्षेत्र से बाहर रहने के आदेश तक दिए गए थे. लेकिन इस बार केवल एफआईआर दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर दी गई.

उनके अनुसार, यह सब दर्शाता है कि आयोग की प्राथमिकता सत्ताधारी दल को बचाना और विपक्ष की आवाज़ को कमज़ोर करना है.

सत्ताधारी नेताओं की भाषा पर भी नहीं कार्रवाई

गगन ने कहा कि चुनावी रैलियों में सत्ताधारी नेताओं द्वारा विपक्षी नेताओं के खिलाफ व्यक्तिगत हमले और अमर्यादित भाषा का प्रयोग आम बात बन चुकी है.
आयोग के पास सबूत हैं, वीडियो क्लिप्स हैं, फिर भी किसी को नोटिस नहीं मिलता.आखिर यह दोहरी नीति क्यों? — उन्होंने सवाल उठाया.

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शिक्षकों, चौकीदारों और दफादारों को मतदान से वंचित किया गया

राजद प्रवक्ता ने कहा कि आयोग एक ओर मतदान प्रतिशत बढ़ाने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों सरकारी कर्मियों को वोट देने से वंचित कर रहा है.
कई शिक्षकों ने फॉर्म 12 भरने के बावजूद पोस्टल बैलेट नहीं पाया, जिससे वे वोट नहीं डाल सके.
इसी तरह, हजारों दफादार और चौकीदारों को अपने गृह विधानसभा से दूर ड्यूटी दी गई और उन्हें डाक मतपत्र की सुविधा भी नहीं दी गई. यह लोकतंत्र के अधिकारों का घोर उल्लंघन है,. उन्होंने कहा.

लोकतंत्र पर खतरे की घंटी

राजद प्रवक्ता का कहना है कि यह सब घटनाएं भारत के लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी हैं.
उन्होंने कहा — जब चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगें, तो यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकट का संकेत है.

राजद की मांग: निष्पक्ष जांच और कार्रवाई

राजद ने मांग की है कि चुनाव आयोग तुरंत इन सभी मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराए और जो अधिकारी या नेता दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए.
चित्तरंजन गगन ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह साबित होगा कि चुनाव आयोग अब जनता का नहीं, सत्ता का आयोग बन गया है.

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