ग्वालियर में अंबेडकर अपमान पर बवाल: चंद्रशेखर आज़ाद की NSA कार्रवाई की मांग

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Ajit Kumar

भारत
ग्वालियर में अंबेडकर अपमान पर बवाल: चंद्रशेखर आज़ाद की NSA कार्रवाई की मांग

बाबा साहेब अंबेडकर के पुतले को जलाने की कोशिश: संविधान और सामाजिक न्याय पर सीधा हमला

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना 27 दिसंबर —भारत के संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के अग्रदूत और करोड़ों शोषित-वंचित लोगों की आवाज़ रहे डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की आत्मा हैं. ऐसे में मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बाबा साहेब के पुतले को जलाने का प्रयास और उनके विरुद्ध की गई आपत्तिजनक नारेबाज़ी न सिर्फ़ कानून व्यवस्था का प्रश्न है, बल्कि यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द पर सीधा हमला माना जा रहा है.

इस गंभीर घटना पर भीम आर्मी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल @BhimArmyChief के माध्यम से कड़ा और स्पष्ट बयान जारी किया है, जो देशभर में चर्चा का विषय बन गया है.

घटना क्यों है बेहद गंभीर?

चंद्रशेखर आज़ाद के अनुसार, बाबा साहेब अंबेडकर के पुतले को जलाने की कोशिश को महज़ एक आपराधिक घटना कहकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.यह कृत्य,

संविधान की मूल भावना के खिलाफ है,

दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के आत्मसम्मान पर हमला है.

सामाजिक समरसता को तोड़ने का सुनियोजित प्रयास है.

नफरत और विभाजन फैलाने वाली ताक़तों की मानसिकता को उजागर करता है.

बाबा साहेब का अपमान, दरअसल उस संविधान का अपमान है जिसने भारत के करोड़ों नागरिकों को बराबरी, स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया था.

नफरती और संविधान-विरोधी ताक़तों का खुलासा

अपने बयान में चंद्रशेखर आज़ाद ने साफ शब्दों में कहा कि यह घटना उन ताक़तों की पहचान उजागर करता है, जो आज भी,

सामाजिक बराबरी से डरती हैं.

भाईचारे और लोकतंत्र को स्वीकार नहीं कर पातीं है.

संविधान से मिलने वाले अधिकारों को चुनौती देना चाहती हैं.

यह कोई आकस्मिक या भावनात्मक घटना नहीं, बल्कि समाज को बांटने और देश की शांति भंग करने की सुनियोजित साज़िश हो सकती है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है.

मध्य प्रदेश सरकार से कड़ी मांग

चंद्रशेखर आज़ाद ने मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग किया है.उन्होंने विशेष रूप से कहा है कि,

दोषियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए.

इस कृत्य के पीछे मौजूद साज़िश, संरक्षण और नेटवर्क की जांच होना चाहिये.

भविष्य में बाबा साहेब और संविधान के अपमान की किसी भी कोशिश पर शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जाए.

उनका मानना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर सख़्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे संविधान-विरोधी तत्वों के हौसले और बुलंद होंगे.

72 घंटे का अल्टीमेटम और जन-आंदोलन की चेतावनी

अपने X पोस्ट में चंद्रशेखर आज़ाद ने साफ़ तौर पर चेतावनी दिया है कि यदि,

अगले 72 घंटों के भीतर मांगें पूरी नहीं होतीं तो,

1 जनवरी को ग्वालियर पहुँचकर

बाबा साहेब अंबेडकर और संविधान के सम्मान में

शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक लेकिन निर्णायक जन-आंदोलन किया जाएगा

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक होगा, लेकिन किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की पूरी ज़िम्मेदारी शासन-प्रशासन का होगा.

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया की संभावना

यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रह सकता है. बाबा साहेब अंबेडकर पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं. ऐसे में,

दलित संगठनों, सामाजिक न्याय से जुड़े आंदोलनों, प्रगतिशील राजनीतिक दलों, की ओर से इस मुद्दे पर व्यापक प्रतिक्रिया आने की संभावना है. यदि समय रहते सख़्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी तूल पकड़ सकता है.

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संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की चुनौती

भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक सामाजिक अनुबंध है, जो हर नागरिक को समानता का भरोसा देता है.बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान करना, उस भरोसे को तोड़ने जैसा है.

चंद्रशेखर आज़ाद का यह बयान सिर्फ़ विरोध नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि,

संविधान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

सामाजिक न्याय पर हमला करने वालों को जवाब मिलेगा.

लोकतांत्रिक तरीक़े से, लेकिन मजबूती के साथ.

निष्कर्ष

ग्वालियर की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम सच में संविधान की मूल भावना को समझते और मानते हैं? बाबा साहेब अंबेडकर के सम्मान की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि समूचे समाज की ज़िम्मेदारी है.

चंद्रशेखर आज़ाद के शब्दों में यह स्पष्ट संदेश छिपा है कि जय भीम, जय संविधान और जय भारत केवल नारे नहीं, बल्कि लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा का संकल्प हैं.

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