इंदौर में प्रदूषित पानी से मौतें: सरकार की जवाबदेही पर मायावती का तीखा सवाल

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Kumar Ranjit

भारत
इंदौर में प्रदूषित पानी से मौतें: सरकार की जवाबदेही पर मायावती का तीखा सवाल

साफ पानी नहीं, मौत मिली: इंदौर घटना पर मायावती का हमला

तीसरा पक्ष ब्यूरो, 2 जनवरी मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से सामने आई प्रदूषित पानी पीने से नागरिकों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है.यह केवल एक स्थानीय स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि शासन, प्रशासन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला घटना है. इस मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य और केंद्र सरकार दोनों को कठघरे में खड़ा किया है.

इंदौर की घटना: क्या है पूरा मामला

इंदौर जैसे बड़े और विकसित शहर में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध न होना अपने आप में चौंकाने वाला तथ्य है. शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, दूषित पानी के सेवन से कई निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से बीमार हो गया.अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य तंत्र पर भी दबाव साफ दिखाई दिया है.
यह घटना बताती है कि नगर निगम, जल आपूर्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय की भारी कमी है.

मायावती का बयान: सरकार पर सीधा हमला

मायावती ने अपने X पोस्ट में इस घटना को, अति-दुखद और चौंकाने वाला, बताते हुए कहा है कि ऐसी सरकारी गैर-जिम्मेदारी और उदासीनता के खिलाफ देशभर में आक्रोश स्वाभाविक है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों को स्वच्छ हवा और साफ पानी उपलब्ध कराना हर सरकार की पहली जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस मामले में प्रशासन पूरी तरह विफल नजर आया है.

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जैसे अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था में लापरवाही दिखाई देती है, वैसे ही बुनियादी जनसुविधाओं में भ्रष्टाचार और अनदेखी अब जानलेवा साबित हो रही है.

बुनियादी सुविधाओं पर सवाल

पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में चूक सीधे तौर पर मानव जीवन को खतरे में डालता है.

क्या पानी की नियमित जांच हो रही थी?

अगर हो रही थी, तो रिपोर्ट्स को नजरअंदाज क्यों किया गया?

जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?

ये सवाल केवल इंदौर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के कई शहरों और कस्बों में इसी तरह की समस्याएं छिपी हुई हैं.

राज्य सरकार की जिम्मेदारी

मायावती ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए राज्य सरकार को,सख्त से सख्त कदम, उठाने की जरूरत है.
इसका मतलब केवल जांच कमेटी बनाना नहीं, बल्कि,

दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई, जल आपूर्ति व्यवस्था की पारदर्शी निगरानी.

पीड़ित परिवारों को त्वरित मुआवजा. और भविष्य के लिए ठोस कार्ययोजना

इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से काम करना होगा.

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केंद्र सरकार की भूमिका

मायावती ने केंद्र सरकार से भी इस मामले में उचित संज्ञान लेने और प्रभावी कार्रवाई की मांग किया है. उनका मानना है कि यदि समय रहते राष्ट्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश और निगरानी तंत्र मजबूत नहीं किया गया, तो ऐसी दर्दनाक घटनाएं अन्य राज्यों में भी दोहराई जा सकती हैं.

जनस्वास्थ्य बनाम राजनीति

अक्सर ऐसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हावी हो जाते हैं और असली मुद्दा पीछे छूट जाता है. लेकिन इंदौर की यह घटना यह याद दिलाती है कि जनस्वास्थ्य किसी भी राजनीति से ऊपर होना चाहिये .
स्वच्छ पानी का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त जीवन के अधिकार से जुड़ा हुआ विषय है, और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है.

आगे की राह

इस घटना से सबक लेते हुए जरूरी है कि, जल स्रोतों की नियमित और स्वतंत्र जांच हो

रिपोर्ट्स को सार्वजनिक किया जाए, स्थानीय नागरिकों को भी निगरानी में भागीदार बनाया जाये ,और आपात स्थिति में तुरंत वैकल्पिक स्वच्छ जल व्यवस्था सुनिश्चित की जाये.

निष्कर्ष

इंदौर में प्रदूषित पानी से हुई मौतें केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का प्रतीक हैं. मायावती का बयान इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाता है और सरकारों को उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों की याद दिलाता है.
अब जरूरत है कि शब्दों से आगे बढ़कर ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी नागरिक को साफ पानी के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े.

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