AAP विधायक को रोके जाने पर सियासत गरम, कानून-व्यवस्था पर सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो मेरठ,12 जनवरी 2026 —उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कपसाड़ गांव में 8 जनवरी 2026 को हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने न सिर्फ जिले बल्कि पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं. यहां एक दलित महिला सुनीता जाटव (50) की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जबकि उनकी 20 वर्षीय बेटी रूबी का अपहरण कर लिया गया. यह मामला सामाजिक असमानता, महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता,तीनों मुद्दों को एक साथ उजागर करता है.
कैसे हुई वारदात?
पुलिस और परिजनों के अनुसार, 8 जनवरी की सुबह सुनीता जाटव अपनी बेटी रूबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं. इसी दौरान गांव का ही युवक पारस सोम (23) और उसका एक साथी रास्ते में मिले. बताया जा रहा है कि पारस पिछले तीन वर्षों से रूबी से संपर्क में था और शादी का दबाव बना रहा था.
जब सुनीता ने इसका विरोध किया और बेटी को साथ ले जाने की कोशिश की, तो विवाद बढ़ गया. आरोप है कि पारस ने गन्ने की फसल काटने वाले धारदार हथियार से सुनीता पर हमला कर दिया.गंभीर रूप से घायल सुनीता को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.वहीं आरोपी रूबी को जबरन अपने साथ ले गया.
गांव में तनाव, सड़क पर उतरा दलित समाज
घटना के बाद कपसाड़ गांव और आसपास के इलाकों में भारी तनाव फैल गया.दलित समुदाय के लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाया गया. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया और कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई.
48 घंटे में गिरफ्तारी, बेटी बरामद
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच विशेष टीमें गठित कीं.10 जनवरी 2026 को मेरठ और सहारनपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने हरिद्वार के एक होटल से आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार कर लिया.इसी दौरान रूबी को सुरक्षित बरामद कर लिया गया.
रूबी को फिलहाल नारी निकेतन में रखा गया है. आरोपी को 11 जनवरी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
प्रेम संबंध या जातिगत हिंसा?
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह रूबी से शादी करना चाहता था और घटना प्रेम विवाद के कारण हुई. हालांकि, पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मामला सिर्फ प्रेम संबंध का नहीं, बल्कि दलित महिला पर हिंसा और जातिगत दबाव से भी जुड़ा है.इसी कारण SC/ST एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है
ये भी पढ़े :मॉब लिंचिंग पीड़ित नूरसेद आलम से भाकपा माले की राज्यस्तरीय टीम की मुलाकात, 20 लाख मुआवजे की मांग
ये भी पढ़े :बिहार चुनाव पर तेजस्वी यादव का हमला, बोले– तंत्र जीता, लोक हारा
AAP विधायक को रोके जाने से बढ़ा विवाद
मामले ने उस वक्त राजनीतिक रंग ले लिया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कुलदीप कुमार 11 जनवरी को पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ पहुंचे.लेकिन पुलिस ने उन्हें मेरठ-काशी टोल प्लाजा पर ही रोक दिया.
AAP ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि,
जब-जब योगी सरकार डरती है, पुलिस को आगे कर देती है.
AAP के यूपी प्रभारी संजय आजाद और अन्य नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया और सरकार पर सच दबाने का आरोप लगाया.
कानून-व्यवस्था पर फिर सवाल
यह घटना उत्तर प्रदेश में दलितों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को फिर तेज करती है. विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच, पीड़ित परिवार को मुआवजा और दोषियों को कड़ी सजा की मांग की है.
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तेज़ी से चल रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. हालांकि, ज़मीनी हकीकत यही है कि एक मां अपनी बेटी को बचाते हुए जान गंवा चुकी है,और यह सवाल अब भी कायम है कि क्या ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती थीं?
स्रोत / बयान: आम आदमी पार्टी (AAP) ट्वीट, उत्तर प्रदेश पुलिस, द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया, अन्य मीडिया रिपोर्ट्स

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.


















