मोदी के अमृतकाल पर सवाल: भाजपा नेताओं पर लगे गंभीर आरोप और कानून-व्यवस्था की सच्चाई

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Ajit Kumar

भारत
मोदी के अमृतकाल पर सवाल: भाजपा नेताओं पर लगे गंभीर आरोप और कानून-व्यवस्था की सच्चाई

मध्य प्रदेश की घटना ने देश को झकझोरा, क्या सत्ता अपराधियों को संरक्षण दे रही है?

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,28 दिसंबर देश में जब अमृतकाल’ का नारा दिया जा रहा है, उसी समय महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़ी खबरें समाज को झकझोर रही हैं। Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) ने अपने आधिकारिक X (Twitter) पोस्ट के माध्यम से मध्य प्रदेश के सतना जिले से जुड़ी एक गंभीर और चौंकाने वाली घटना का हवाला देते हुए केंद्र की भाजपा सरकार और उसकी कानून-व्यवस्था पर तीखा सवाल खड़ा किया है. यह मामला न सिर्फ एक महिला की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि सत्ता, राजनीति और अपराध के कथित गठजोड़ पर भी गहरी चिंता पैदा करता है.

क्या है पूरा मामला?

RJD के अनुसार, मध्य प्रदेश के सतना जिले में भाजपा नेता अशोक सिंह पर एक महिला के साथ चाकू की नोंक पर बलात्कार करने का आरोप लगा है. पार्टी का दावा है कि आरोपी ने इस जघन्य अपराध का वीडियो भी रिकॉर्ड किया और इसके बाद पीड़िता के घर जाकर दोबारा बलात्कार करने की कोशिश किया . सबसे गंभीर आरोप यह है कि आरोपी खुलेआम कैमरे पर यह कहते हुए नजर आया कि भाजपा की सरकार है!, इसलिए उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता!

यदि ये आरोप सही पाया जाता हैं, तो यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह जाता है , बल्कि यह सत्ता के संरक्षण और कानून के दुरुपयोग का प्रतीक बन जाता है.

अमृतकाल बनाम जमीनी हकीकत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रचारित अमृतकाल का अर्थ देश के उज्ज्वल भविष्य, सुशासन और नागरिकों की सुरक्षा से जोड़ा जाता है. लेकिन जब सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं पर इस तरह के आरोप सामने आते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वास्तव में आम नागरिक, खासकर महिलाएं, सुरक्षित हैं?

RJD ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया है कि हर बलात्कारी भाजपाई का यह विश्वास ही मोदी जी की राजनीतिक पूंजी है. यह बयान सत्ता के नैरेटिव और जमीनी सच्चाई के बीच के अंतर को उजागर करने की कोशिश करता है.

महिलाओं की सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही

भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध कोई नया विषय नहीं है, लेकिन जब ऐसे मामलों में राजनीतिक संरक्षण की बात सामने आती है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बन जाता है. सवाल यह नहीं है कि आरोपी किस पार्टी से जुड़ा है, बल्कि यह है कि क्या कानून सभी के लिए समान रूप से लागू हो रहा है?

RJD का आरोप है कि भाजपा शासन वाले राज्यों में अपराधियों के हौसले इसलिए बुलंद हैं क्योंकि उन्हें सत्ता का संरक्षण मिलने का विश्वास होता है. यदि किसी आरोपी को यह भरोसा हो कि सरकार हमारी है, इसलिए कुछ नहीं होगा, तो यह सीधे-सीधे कानून के राज (Rule of Law) को चुनौती है.

विपक्ष का हमला और सत्ताधारी दल की चुप्पी

इस पूरे मामले पर विपक्षी दलों का कहना है कि भाजपा अक्सर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारों का इस्तेमाल करती है, लेकिन जब पार्टी से जुड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगते हैं, तो या तो चुप्पी साध ली जाती है या मामले को दबाने की कोशिश होती है.

RJD सहित कई विपक्षी दल मांग कर रहे हैं कि इस मामले में निष्पक्ष और तेज़ जांच हो, आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और पीड़िता को पूरी सुरक्षा व न्याय मिले. साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या भाजपा नेतृत्व इस तरह के मामलों में नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करेगा?

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कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह मामला केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है. देश के अलग-अलग हिस्सों से समय-समय पर ऐसी खबरें सामने आती रही हैं, जहां प्रभावशाली लोगों पर गंभीर आरोप लगते हैं और कार्रवाई में देरी होती है. इससे आम जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है.

यदि राजनीतिक दल अपने ही नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करते, तो यह संदेश जाता है कि सत्ता में रहने वाले कानून से ऊपर हैं. यही संदेश अपराधियों के हौसले बढ़ाता है और समाज में डर का माहौल पैदा करता है.

लोकतंत्र में जनता की भूमिका

RJD ने इस मुद्दे को उठाकर जनता से यह सोचने का आह्वान किया है कि क्या यही अमृतकाल है जिसकी कल्पना की गई थी. लोकतंत्र में जनता ही सबसे बड़ी ताकत होती है, और ऐसे मामलों में जनदबाव ही निष्पक्ष कार्रवाई का रास्ता खोल सकता है.

मीडिया, नागरिक समाज और आम लोगों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मामलों को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित न रहने दें, बल्कि न्याय की मांग को लगातार उठाते रहें.

निष्कर्ष

Rashtriya Janata Dal के X पोस्ट में उठाया गया यह मामला महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक संरक्षण और कानून के राज पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. चाहे आरोपी किसी भी पार्टी से जुड़ा हो, अपराध अपराध होता है और उसे उसी कठोरता से देखा जाना चाहिए.

अमृतकाल का सपना तभी सार्थक होगा जब देश की हर महिला खुद को सुरक्षित महसूस करे और कानून सभी के लिए समान हो. वरना ऐसे आरोप और घटनाएं लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करती रहेंगी.

स्रोत: Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) के आधिकारिक X (Twitter) पोस्ट पर आधारित

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