क्या बिहार में कानून का शासन खत्म हो चुका है?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 14 दिसंबर 2025— बिहार के नवादा जिले में एक मुस्लिम कपड़ा व्यापारी मोहम्मद अख़्तर हुसैन की भीड़ द्वारा की गई निर्मम हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है. सवाल उठता है कि जब भीड़ खुलेआम न्याय अपने हाथ में ले ले, तो फिर कानून का मतलब क्या रह जाता है?
घटना का भयावह सच
नवादा में हुई यह घटना किसी अचानक हुए विवाद का परिणाम नहीं, बल्कि बढ़ते भीड़तंत्र और नफरत की राजनीति का खतरनाक संकेत है. जिस तरह से एक कपड़ा व्यापारी को निशाना बनाया गया, वह यह दर्शाता है कि अल्पसंख्यक समुदाय आज खुद को कितना असुरक्षित महसूस कर रहा है.
भीड़ द्वारा की गई बर्बरता ने यह साफ कर दिया है कि अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म हो चुका है.
भाकपा (माले) की कड़ी प्रतिक्रिया
भाकपा (माले) के राज्य सचिव कुणाल ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए इसे मानवता को शर्मसार करने वाली वारदात बताया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि गृह मंत्री सम्राट चौधरी के कार्यभार संभालने के बाद बिहार में बुलडोजर कार्रवाई और भीड़ हिंसा की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है.
उनका आरोप है कि NDA सरकार उत्तर प्रदेश के तथाकथित योगी मॉडल को बिहार में लागू करने की कोशिश कर रही है, जो न तो संविधान के अनुरूप है और न ही लोकतंत्र के.
योगी मॉडल बनाम संविधान
बुलडोजर राजनीति और त्वरित दंड की संस्कृति संविधान की मूल भावना के खिलाफ है. भारत का संविधान किसी भी नागरिक को बिना न्यायिक प्रक्रिया के दंडित करने की अनुमति नहीं देता है .
लेकिन आज स्थिति यह है कि प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल न्याय के नाम पर डर पैदा करने के लिए किया जा रहा है. नवादा की घटना इसी खतरनाक प्रवृत्ति का परिणाम मानी जा रही है .
कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यह घटना बिहार की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है .
क्या अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
क्या पुलिस और प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप करने में विफल रहे?
क्या अल्पसंख्यकों की सुरक्षा अब सरकार की प्राथमिकता नहीं रही?
जब भीड़ खुलेआम हत्या कर सके और उसे कानून का डर न हो, तो यह सीधे तौर पर राज्य की विफलता को दर्शाता है . ।
भाकपा (माले) की प्रमुख मांगें
इस जघन्य हत्या के बाद भाकपा (माले) ने सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं .
मोहम्मद अख़्तर हुसैन की हत्या के सभी दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर स्पीडी ट्रायल के माध्यम से सजा दी जाए .
पीड़ित परिवार को पूर्ण सुरक्षा, पर्याप्त मुआवजा और न्याय सुनिश्चित किया जाए .
राज्य में चल रही बुलडोजर कार्रवाई को तत्काल रोका जाए .
गृह मंत्री सम्राट चौधरी कानून व्यवस्था की बिगड़ती हालत पर सार्वजनिक रूप से जवाब दें .
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समाज के लिए चेतावनी
नवादा की यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है .अगर आज हम चुप रहे, तो कल कोई भी इस हिंसा का शिकार हो सकता है . भीड़तंत्र लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन है, क्योंकि यह कानून, अदालत और संविधान,तीनों को दरकिनार कर देता है .
लोकतंत्र और संविधान की रक्षा जरूरी
भाकपा (माले) ने साफ किया है कि पार्टी बिहार की जनता के साथ खड़ी है और संविधान, कानून व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी . नफरत, दमन और डर की राजनीति को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता .
निष्कर्ष
नवादा में मुस्लिम कपड़ा व्यापारी की भीड़ हत्या ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर सरकार ने तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं. कानून का शासन तभी मजबूत होगा, जब अपराधी चाहे किसी भी विचारधारा या पहचान के हों, उन्हें बिना भेदभाव सजा मिले.
आज जरूरत है इंसाफ की, संवेदनशील शासन की और संविधान में निहित मूल्यों को बचाने की—क्योंकि अगर कानून कमजोर हुआ, तो लोकतंत्र भी नहीं बचेगा.

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