स्मार्ट सिटी इंदौर में जल त्रासदी, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,9 जनवरी — मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से कथित तौर पर 20 लोगों की मौत के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है.कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगायाहैं.उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़ा किया हैं.
इंदौर में दूषित पानी से मौतों का मामला
इंदौर जैसे बड़े और स्मार्ट सिटी कहे जाने वाले शहर में दूषित पेयजल से लोगों की मौत की खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है. मृतकों के परिजनों का आरोप है कि लंबे समय से इलाके में गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा था, जिसकी शिकायत किया गया था , लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुआ. इस घटना ने नगर प्रशासन, जल आपूर्ति व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया हैं.
जितेंद्र पटवारी का भाजपा पर सीधा हमला
जितेंद्र पटवारी ने अपने X पोस्ट में भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय को निशाने पर लेते हुए तीखी टिप्पणी की है.उन्होंने लिखा कि दूषित पानी से 20 लोगों की मौत के बाद जिस तरह कैलाश विजयवर्गीय ने व्यवहार किया, वह अहंकार और लापरवाही को दर्शाता है, जिसे पूरा देश देख रहा है.
पटवारी ने यह भी कहा कि इस गंभीर त्रासदी के बावजूद भाजपा नेताओं में न तो संवेदना दिखाई दे रही है और न ही जिम्मेदारी का भाव.
प्रभारी मंत्री पर रील राजनीति का आरोप
कांग्रेस नेता ने इंदौर के प्रभारी मंत्री मोहन यादव पर भी सवाल उठाया.पटवारी के अनुसार, मोहन यादव केवल एक बार इंदौर आए, कुछ समय बिताया, रील बनाई और वापस लौट गये, उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े हादसे के बाद भी मंत्री का ज़मीनी स्तर पर पीड़ित परिवारों से संवाद नहीं होना, सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करता है.
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पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना पर सवाल
पटवारी ने अपने पोस्ट में कहा कि भाजपा नेताओं की इंदौर के पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना और जिम्मेदारी,मर चुकी है.
उनका कहना है कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि जवाबदेही, मुआवजा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम चाहिये
प्रशासनिक जवाबदेही की मांग
इस पूरे मामले ने एक बार फिर शहरी बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दिया है .विपक्ष का कहना है कि,
दूषित पानी की शिकायतों को समय रहते अनदेखा किया गया, जल आपूर्ति और टेस्टिंग सिस्टम में गंभीर खामियां हैं, जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई नहीं हो रहा है. कांग्रेस ने मांग किया है कि इस मामले की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच हो तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई किया जाये .
राजनीति बनाम जनहित?
इंदौर जल त्रासदी अब केवल एक प्रशासनिक विफलता का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है. जहां एक ओर विपक्ष इसे सरकार की संवेदनहीनता और अहंकार से जोड़ रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी तक विस्तृत और संतोषजनक जवाब का इंतज़ार है.
जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हादसे से सबक लेकर जल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा, या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की राजनीति के बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा.
निष्कर्ष
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतें एक चेतावनी हैं,सिर्फ प्रशासन के लिए नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था के लिये,जितेंद्र पटवारी के आरोपों ने सरकार की जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है.
अब देखना यह होगा कि सरकार इस त्रासदी को लेकर कितनी गंभीरता दिखाती है और पीड़ित परिवारों को कब न्याय मिलता है.

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