प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में हजारों करोड़ का घोटाला, निष्पक्ष जांच की मांग

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Ajit Kumar

बिहार
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना घोटाले पर राजद का बयान

CAG रिपोर्ट में फर्जी ट्रेनिंग, फर्जी प्लेसमेंट और अमान्य बैंक खातों का खुलासा

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 15 जनवरी 2026 — नौकरी और रोजगार के नाम पर शुरू की गई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने इस योजना में हजारों करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए इसकी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग किया है.

राजद प्रवक्ता ने कहा कि वर्ष 2015 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य देश के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना था.इसके तहत 1.32 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने के नाम पर 14,400 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किया गया, लेकिन 18 दिसंबर 2025 को संसद में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट ने इस योजना की वास्तविकता उजागर कर दिया है.

CAG रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

चित्तरंजन गगन ने CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि योजना में नामांकित 95 लाख युवाओं में से लगभग 90 लाख का कोई स्पष्ट विवरण ही मौजूद नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार 5 लाख नाम पूरी तरह फर्जी पाए गए. यही नहीं, करीब 70 प्रतिशत उम्मीदवार प्रशिक्षण के लिए अयोग्य थे, फिर भी उन्हें लाभार्थी दिखाया गया.

सबसे गंभीर बात यह है कि 94 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों के बैंक खाते या तो फर्जी पाए गए या अमान्य थे.कई मामलों में एक ही बैंक खाता हजारों उम्मीदवारों से जोड़ा गया, जिससे सरकारी धन की भारी हेराफेरी की आशंका जताई गई है.

एक फोटो, कई राज्य — सिस्टम पर बड़ा सवाल

CAG रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि एक ही फोटो का उपयोग कर सैकड़ों लाभार्थियों को अलग-अलग राज्यों में प्रशिक्षित दिखाया गया.कई जगहों पर बंद पड़े या नाममात्र के प्रशिक्षण केंद्रों को सक्रिय बताकर हजारों युवाओं की फर्जी ट्रेनिंग दर्ज कर दी गई.

रिपोर्ट में दर्ज है कि एक ही अधिकारी द्वारा एक ही दिन में कई राज्यों में निरीक्षण किए जाने की प्रविष्टियाँ भी मौजूद हैं, जो पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती हैं.

फर्जी प्लेसमेंट और कागजी कंपनियां

राजद प्रवक्ता के अनुसार, योजना के तहत प्लेसमेंट के आंकड़े जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है. जिन कंपनियों में युवाओं को नौकरी दिलाने का दावा किया गया, उनमें से अधिकांश केवल कागजों पर मौजूद पाया गया है.कई कंपनियों का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं था.

CAG रिपोर्ट साफ तौर पर बताती है कि ट्रेनिंग, एनरॉलमेंट, सर्टिफिकेशन और प्लेसमेंट, चारों चरणों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं.

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बिहार में भी फर्जी दावों का आरोप

चित्तरंजन गगन ने कहा कि बिहार में 6.33 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का दावा किया गया, साथ ही यह भी कहा गया कि अधिकांश युवाओं को प्लेसमेंट मिल चुका है.उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हीं फर्जी आंकड़ों के आधार पर बिहार की एनडीए सरकार 50 लाख युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का दावा कर रही है.

राजद प्रवक्ता ने कहा कि यह न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है, बल्कि देश और राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ खुला धोखा भी है.

हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

राजद ने इस पूरे मामले की हाईकोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है, ताकि दोषियों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई हो सके और युवाओं का विश्वास बहाल किया जा सके.

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