रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा

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Ajit Kumar

भारत
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा: भारत-रूस मैत्री के नए युग की शुरुआत

भारत-रूस मैत्री के नए युग की शुरुआत

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,5 दिसंबर 2025 — भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी मित्रता एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी है। 5 दिसम्बर 2025 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आगमन ने न केवल वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा किया है, बल्कि इस सदाबहार साझेदारी को नई ऊर्जा देने का भी कार्य किया है.अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बदलते स्वरूप के बीच यह यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक साख, सुदृढ़ नेतृत्व और संतुलित कूटनीति का प्रमाण है.

बिहार भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल के अनुसार, पुतिन का भारत आगमन केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि दुनिया को यह संदेश है कि भारत आज एक स्थिर, निर्णायक और विश्वसनीय नेतृत्व वाला राष्ट्र बन चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा लगातार मजबूत हुआ है, और यह यात्रा उसी विश्वास की पुष्टि है.

भारत-रूस संबंधों की नींव: विश्वास, सम्मान और रणनीतिक साझेदारी

भारत और रूस का रिश्ता केवल कूटनीतिक सीमाओं में सीमित नहीं है, बल्कि यह विशाल भरोसे, समान हितों और ऐतिहासिक सहयोग पर आधारित साझेदारी है. चाहे रक्षा सहयोग हो, ऊर्जा सुरक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, व्यापार विस्तार या बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था — हर क्षेत्र में रूस भारत का महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है.

1950 के दशक से शुरू हुई दोस्ती आज भी मजबूती से खड़ी है. बदलते भू-राजनीतिक हालात के बावजूद भारत ने हमेशा स्वतंत्र विदेश नीति का पालन किया है, और रूस ने हमेशा भारत के रणनीतिक निर्णयों का सम्मान किया है.यही कारण है कि कठिन समय में भी दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती पर कभी कोई प्रश्न नहीं उठे.

पुतिन की यात्रा क्यों है महत्वपूर्ण?

2025 में पुतिन का भारत दौरा कई कारणों से ऐतिहासिक साबित हो सकता है.

वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत की बढ़ती भूमिका

    अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आज भारत एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है. पश्चिमी देशों, एशियाई देशों और कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के संतुलित संबंधों ने उसे वीटो रहित महाशक्ति जैसा प्रभाव दिया है. पुतिन की यात्रा इस बात का संकेत है कि रूस भी इस नई शक्ति संरचना में भारत को केंद्रीय भूमिका देता है.

    रक्षा और सामरिक सहयोग का नया अध्याय

      भारत अपनी रक्षा क्षमता के आधुनिकीकरण में तेजी से आगे बढ़ रहा है।रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार होने के नाते नई तकनीकों, संयुक्त उत्पादन, और आधुनिक सैन्य उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है.इस यात्रा में रक्षा तकनीक और उन्नत प्रणालियों पर बड़े समझौते संभव हैं.

      ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता

        भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रूस के साथ सहयोग अत्यंत आवश्यक है.तेल, गैस, परमाणु ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत-रूस की साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों को ऊर्जा स्थिरता दे सकती है.

        व्यापार और तकनीकी साझेदारी में विस्तार

          डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में रूस नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है. दोनों देशों के बीच 100+ बिलियन डॉलर व्यापार का लक्ष्य इस यात्रा के बाद और तेज़ी से आगे बढ़ सकता है.

          वैज्ञानिक और अंतरिक्ष सहयोग का सुदृढ़ होना

            ISRO और Roscosmos के बीच लंबे समय से वैज्ञानिक सहयोग रहा है.गगनयान मिशन, चंद्र मिशन और सैटेलाइट तकनीक में रूस महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है. इस यात्रा से इन प्रयासों को और गति मिलने की उम्मीद है.

            भारत का बदलता स्वरूप: वैश्विक मंच पर निर्णायक नेतृत्व

            प्रेम रंजन पटेल ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्पष्ट, दृढ़ और राष्ट्रहित पर आधारित विदेश नीति ने भारत की वैश्विक साख को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया है.
            यह बिल्कुल स्पष्ट है कि भारत की विदेश नीति आज संतुलन और स्वतंत्र निर्णय पर आधारित है.भारत न तो किसी एक ध्रुव का समर्थक है, न किसी के प्रभाव में चलने वाला राष्ट्र.यही स्वतंत्रता भारत को विश्वभर में सम्मान दिला रही है.

            पुतिन की यात्रा भी इसी बदलाव का प्रतीक है — कि भारत आज दुनिया के सामने एक स्थिर, आत्मविश्वासी और निर्णायक राष्ट्र के रूप में खड़ा है.

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            भविष्य की दिशा: क्या बदलने जा रहा है?

            पुतिन-मोदी मुलाकात के बाद जिन क्षेत्रों में बड़ी प्रगति संभव है, वे हैं.

            रक्षा उत्पादन और संयुक्त तकनीकी विकास

            दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते

            व्यापार को दोगुना करने की रणनीति

            अंतरिक्ष और विज्ञान के संयुक्त मिशन

            एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन

            बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत-रूस की साझा भूमिका

            ये समझौते न केवल दोनों देशों के लिए फायदेमंद होंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और तकनीकी सामर्थ्य तैयार करेंगे.

            निष्कर्ष: भारत-रूस मैत्री का नया युग

            राष्ट्रपति पुतिन का भारत आगमन केवल दो देशों के बीच औपचारिक चर्चा नहीं है — यह भरोसे, सम्मान और साझा हितों पर आधारित साझेदारी को 21वीं सदी के नए दौर में आगे बढ़ाने का अवसर है.
            भारत आज विश्व राजनीति के केंद्र में है, और पुतिन की यह यात्रा उसी उभरती शक्ति का स्पष्ट प्रमाण है.

            यह दौरा आने वाले वर्षों के लिए निर्णायक साबित होगा, और भारत-रूस की यह ऐतिहासिक दोस्ती नए युग में प्रवेश कर चुकी है.

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