कब बहाल होगी स्थगित रेल रियायत की सुविधा?

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Ajit Kumar

बिहार
कब बहाल होगी स्थगित रेल रियायत की सुविधा?

कोरोना के बाद भी जारी चुप्पी पर उठे सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 1 जनवरी 2026, कोरोना महामारी के दौरान स्थगित की गई भारतीय रेल की रियायत (Rail Concession) सुविधा अब तक बहाल न होने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल तेज हो गया हैं.राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल पूछा है कि जब देश कोरोना से मुक्त हो चुका है, तो फिर रेल यात्रा में दी जाने वाली दशकों पुरानी रियायतें अब तक क्यों बहाल नहीं की गईं है.

यह मुद्दा केवल एक राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, गंभीर रोगियों, विधवाओं, पत्रकारों और अन्य जरूरतमंद वर्गों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ है. रेल रियायत की बहाली को लेकर सरकार की चुप्पी अब कई सवाल खड़ा कर रहा है.

क्या है रेल रियायत का इतिहास?

भारतीय रेल में किराया रियायत की व्यवस्था कोई नया नहीं है.दशकों पहले, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सामाजिक न्याय और समावेशन की भावना के तहत विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों को रेल किराये में छूट देने की शुरुआत किया गया था.इसका उद्देश्य था कि आर्थिक, शारीरिक या सामाजिक कारणों से कमजोर वर्ग भी सुलभ और सम्मानजनक यात्रा कर सकें.

सीनियर सिटीजन, दिव्यांग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज, मृत सैनिकों की विधवाएं, मान्यता प्राप्त पत्रकार और चिकित्सक सहित लगभग 53 श्रेणियों के लोगों को अलग-अलग प्रतिशत में रेल किराये में रियायत मिलती रही है. यह व्यवस्था वर्षों तक सुचारू रूप से चलती रही और समाज के कमजोर तबकों के लिए बड़ी राहत साबित हुई.

कोरोना काल में क्यों स्थगित हुई सुविधा?

20 मार्च 2020 को कोरोना महामारी के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने रेलवे में दी जाने वाली सभी रियायतों को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था.उस समय सरकार का तर्क था कि महामारी के कारण रेलवे की आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव है और स्थिति सामान्य होने के बाद इन रियायतों को पूर्ववत बहाल कर दिया जायेगा .

हालांकि अब कोरोना महामारी को समाप्त हुए लगभग पांच वर्ष बीत चुका हैं, देश की आर्थिक गतिविधियां सामान्य हो चुका हैं और रेलवे भी पहले की तरह संचालन कर रहा है.इसके बावजूद रेल रियायत की बहाली को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है.

किन-किन वर्गों को मिलती थी कितनी रियायत?

राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने विस्तार से बताया कि कोरोना से पहले विभिन्न श्रेणियों को निम्नलिखित रियायतें मिलती थीं,

दिव्यांग यात्री: फर्स्ट और सेकेंड एसी में 50%, अन्य श्रेणियों में 75% तक छूट

नेत्रहीन यात्री: 25% छूट

मानसिक रोगी (MST पर): 50% छूट

मूक-बधिर (MST पर): 50% छूट

गंभीर रोगी: फर्स्ट और सेकेंड एसी में 50%, अन्य श्रेणियों में 75%

थैलेसीमिया मरीज: फर्स्ट और सेकेंड एसी में 50%, अन्य में 75%

हीमोफीलिया मरीज: फर्स्ट और सेकेंड एसी को छोड़कर अन्य में 75%

एड्स मरीज: सभी श्रेणियों में 50%

वरिष्ठ नागरिक: पुरुष (60 वर्ष से अधिक) को 40% और महिला (58 वर्ष से अधिक) को 50% छूट

इनके अलावा भी कई अन्य श्रेणियों को 25% से 75% तक की छूट दी जाती थी.

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संसदीय समिति की सिफारिश भी बेअसर?

यह मुद्दा केवल विपक्षी दलों तक सीमित नहीं रहा. सांसद राधामोहन सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने भी स्थगित रेल रियायत को बहाल करने की सिफारिश किया था.इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

हाल ही में सांसद श्रीमती साधना सिंह द्वारा रेल मंत्री को लिखे गए पत्र के जवाब में भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सका. इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या केंद्र सरकार वास्तव में इन रियायतों को बहाल करने के पक्ष में है या नहीं.

लाखों सीनियर सिटीजन की चिंता

रेल रियायत की सबसे बड़ी मार वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ी है। सीमित आय पर निर्भर लाखों बुजुर्ग इलाज, पारिवारिक जरूरतों और सामाजिक कारणों से रेल यात्रा पर निर्भर रहता हैं.किराये में छूट बंद होने से उनकी यात्रा महंगी हो गई है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ा है.

चित्तरंजन गगन ने कहा कि यदि सरकार का इरादा रियायत बहाल करने का नहीं है, तो उसे स्पष्ट रूप से इसकी घोषणा करनी चाहिये. अनिश्चितता की स्थिति में लाखों वरिष्ठ नागरिक केंद्र सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं.

सरकार को क्यों देनी चाहिए स्पष्टता?

किसी भी जनकल्याणकारी नीति में पारदर्शिता और स्पष्टता बेहद जरूरी होती है. रेल रियायत जैसी सुविधा केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवेदनशीलता से जुड़ा विषय है.सरकार को चाहिए कि वह या तो रियायत बहाल करने की समय-सीमा घोषित करे या फिर स्पष्ट रूप से बताए कि अब यह सुविधा नहीं दी जाएगी.

निष्कर्ष

स्थगित रेल रियायत की बहाली आज करोड़ों लोगों से जुड़ा मुद्दा बन चुका है.कोरोना महामारी के नाम पर बंद की गई इस सुविधा को पांच वर्ष बीतने के बाद भी शुरू न किया जाना सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करता है.राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन की मांग केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की आवाज है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस पर कब और क्या निर्णय लेती है.

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