श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी व एफएसटी पुलिस बल पर प्रताड़ना और झूठे मुकदमे के गंभीर आरोप
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 26 दिसंबर 2025 बिहार की राजनीति में एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक अधिकारों के टकराव का मामला सामने आया है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश महासचिव श्री रामकृष्ण मंडल से जुड़े कथित उत्पीड़न प्रकरण को लेकर पार्टी ने बड़ा कदम उठाया है. इस पूरे मामले की तथ्यपरक और वस्तुस्थिति की जांच के लिए राजद ने वरिष्ठ नेता उदय नारायण चौधरी के नेतृत्व में सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है. यह जानकारी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने दी है.
क्या है पूरा मामला?
राजद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष श्री मंगनी लाल मंडल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार,
5 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 की समयावधि के दौरान श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, मुरलीगंज, एफएसटी (फ्लाइंग स्क्वाड टीम) और पुलिस बल के साथ मधेपुरा जिले के मुरलीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जयरामपुर स्थित श्री रामकृष्ण मंडल के पैतृक आवास पर पहुंचे. आरोप है कि इस दौरान:
श्री रामकृष्ण मंडल के परिवारजनों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया,बिना ठोस कारण अनावश्यक दबाव और प्रताड़ना दिया गया ,
मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन हुआ.
उल्टा दर्ज हुआ मुकदमा, राजद ने बताया मनगढ़ंत
राजद का आरोप है कि घटना के बाद श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, मुरलीगंज ने स्वयं को बचाने के उद्देश्य से मुरलीगंज थाना कांड संख्या 554/25, दिनांक 6 दिसंबर 2025 को बीएनएस की धारा 223 के तहत श्री रामकृष्ण मंडल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था.
पार्टी का स्पष्ट कहना है कि,
यह प्राथमिकी पूरी तरह असत्य, मनगढ़ंत और मिथ्या तथ्यों पर आधारित है.
प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग किया गया है.
एक राजनीतिक कार्यकर्ता को झूठे केस में फंसाने की कोशिश हुई है.
एसपी मधेपुरा को दिया गया आवेदन
राजद के अनुसार,
श्री रामकृष्ण मंडल ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर 18 दिसंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक, मधेपुरा को एक विस्तृत आवेदन भेजा था.
इस आवेदन की एक छायाप्रति 25 दिसंबर 2025 को डाक के माध्यम से राजद के राज्य मुख्यालय को प्राप्त हुई.
राज्य मुख्यालय को,
प्राथमिकी की प्रति, एसपी को भेजे गए आवेदन की प्रति
दोनों दस्तावेज प्राप्त होने के बाद पार्टी ने इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता माना.
प्रथम दृष्टया नियम उल्लंघन का आरोप
प्रदेश राजद का दावा है कि उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर यह मामला,
सरकारी पदाधिकारियों द्वारा विधि सम्मत आचरण का पालन न करने
चुनाव अवधि में अधिकारों के दुरुपयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन का
प्रथम दृष्टया उदाहरण प्रतीत होता है.
इसी के मद्देनज़र पार्टी ने स्थलीय जांच का निर्णय लिया है.
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सात सदस्यीय जांच समिति का गठन
राजद प्रदेश अध्यक्ष के निर्णय के बाद गठित जांच समिति इस प्रकार है,
श्री उदय नारायण चौधरी
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राजद एवं पूर्व स्पीकर, बिहार विधानसभा – अध्यक्ष
प्रो. चन्द्रशेखर
पूर्व मंत्री सह विधायक – सदस्य
श्री अलख निरंजन उर्फ बीनू यादव
राष्ट्रीय महासचिव, राजद – सदस्य
डॉ. तनवीर हसन
प्रदेश उपाध्यक्ष, राजद – सदस्य
डॉ. प्रेम कुमार गुप्ता
प्रदेश महासचिव सह प्रमंडलीय प्रभारी, कोशी – सदस्य
इंजीनियर प्रभाष कुमार यादव
प्रदेश महासचिव, राजद – सदस्य
श्री जयकांत यादव
जिलाध्यक्ष, राजद, मधेपुरा – सदस्य
एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने बताया है कि,
जांच समिति को एक सप्ताह के भीतर
घटना स्थल पर जाकर स्थलीय जांच करने
सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर
तथ्यपरक प्रतिवेदन राज्य मुख्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है.
साथ ही समिति को यह भी अधिकार दिया गया है कि वह,
जिला स्तर, कोशी प्रमंडल स्तर
एवं वरीय पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर
पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में आवश्यक पहल करे.
सियासी मायने और आगे की राह
यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि,
चुनावी निष्पक्षता, प्रशासनिक जवाबदेही
और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा
जैसे बड़े सवाल खड़े करता है.
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि,
जांच समिति की रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आता हैं
प्रशासन पर क्या कार्रवाई होती है और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है.
निष्कर्ष
राजद द्वारा गठित जांच समिति यह तय करेगी कि यह मामला प्रशासनिक त्रुटि है या सुनियोजित उत्पीड़न. आने वाले दिनों में यह प्रकरण बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण कसौटी साबित हो सकता है.

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