वायरल वीडियो पर यूपी सरकार से कार्रवाई की मांग
तीसरा पक्ष ब्यूरो रामपुर, 13 जनवरी 2026 —उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के थाना केमरी से सामने आए एक वायरल वीडियो ने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दिया है. इस वीडियो को लेकर भीम आर्मी प्रमुख और आज़ाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आज़ाद ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इसे सत्ता संरक्षण में पनप रहे गुंडातंत्र का भयावह उदाहरण बताया है.

क्या है वायरल वीडियो का मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक व्यक्ति, जो खुद को बजरंग दल का नेता बताता है, थाना परिसर के अंदर पुलिसकर्मियों को खुलेआम धमकाते हुए नजर आता है. वीडियो में वह कथित तौर पर कहता है कि,
जिस दारोगा की औकात हो मार के दिखाओ, थाने में आग लगा दूंगा.
यह दृश्य सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक सख्ती और निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर सवाल खड़ा हो गया हैं.
चंद्रशेखर आज़ाद का सीधा बयान
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि यह कोई सामान्य धमकी नहीं, बल्कि सत्ताधारी भाजपा से जुड़े संगठनों के संरक्षण में पनप रही अराजकता की खुली घोषणा है.उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे सवाल किया कि,
सवाल यह नहीं है कि वह व्यक्ति इतना बेलगाम क्यों है, असली सवाल यह है कि उसे यह हिम्मत किस सत्ता-संरक्षण से मिली है?
कानून सबके लिए समान है या नहीं?
चंद्रशेखर आज़ाद ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कानून का पालन अब संगठन और विचारधारा देखकर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह की भाषा या धमकी किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई होती, तो अब तक उस पर एनएसए लग चुका होता या प्रशासनिक कार्रवाई हो चुकी होती.
यह बयान प्रदेश में कानून के समान अनुप्रयोग को लेकर चल रही पुरानी बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आता है.
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
वीडियो में पुलिसकर्मियों की निष्क्रियता ने भी कई सवाल खड़ा किया हैं.। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि थाना परिसर के अंदर इस तरह की धमकी देना और उस पर तत्काल कार्रवाई न होना, पुलिस के मनोबल और स्वतंत्रता दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है.
विश्लेषकों के अनुसार, यदि इस मामले में सख्त और त्वरित कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाएगा कि सत्ता से जुड़े लोग कानून से ऊपर हैं.
सरकार से की गई मांगें
चंद्रशेखर आज़ाद ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्ट मांग करते हुए कहा है कि,
वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को तत्काल गिरफ्तार किया जाए.
उसके खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज हो.
सरकार सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दे कि कानून सभी के लिए समान है.
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस मामले में भी चुप्पी साधे रहती है, तो इसे संविधान और कानून को कमजोर करने के रूप में देखा जाएगा.
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राजनीतिक और सामाजिक असर
यह मुद्दा केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है. यह सवाल उठाता है कि क्या उत्तर प्रदेश में कानून का राज समान रूप से लागू हो रहा है.सामाजिक संगठनों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में असुरक्षा और अविश्वास को बढ़ाती हैं.
राजनीतिक रूप से भी यह मामला आने वाले समय में सरकार के लिए चुनौती बन सकता है, खासकर तब जब विपक्ष इसे सत्ता संरक्षण और दोहरी कार्रवाई का उदाहरण बताकर जनता के बीच ले जा रहा है.
निष्कर्ष
रामपुर थाना वीडियो ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, पुलिस की स्वतंत्रता और सत्ता के प्रभाव को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब निगाहें सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.सवाल सीधा है कि, क्या कानून सबके लिए बराबर है, या फिर पहचान देखकर लागू होता है?

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