12 वर्षीय शिवम की हत्या पर पुलिस कार्रवाई सवालों में, रणविजय साहू करेंगे नेतृत्व
तीसरा पक्ष ब्यूरो सारण,14 जनवरी — बिहार के सारण जिले के अमनौर थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय बालक शिवम के अपहरण और फिर हत्या के मामले ने प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं.इस जघन्य घटना को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने पुलिस की भूमिका पर खुला सवाल उठाते हुए छह सदस्यीय जांच समिति के गठन की घोषणा किया है. पार्टी का आरोप है कि समय रहते कार्रवाई होती तो मासूम की जान बचाई जा सकती थी.
प्रदेश राजद अध्यक्ष श्री मंगनी लाल मंडल ने बताया कि यह मामला सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की निष्क्रियता को उजागर करता है.उन्होंने कहा कि मृतक के पिता श्री राजन गुप्ता, ग्राम मंदरौलिया (थाना-अमनौर, जिला-सारण) ने स्वयं मोबाइल पर उनसे संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी.
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित परिवार के अनुसार, 12 वर्षीय शिवम का 31 दिसंबर 2025 को अपहरण कर लिया गया था.इस घटना की सूचना उसी दिन पुलिस को दी गई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने न तो सक्रिय तलाशी अभियान चलाया और न ही अपराधियों तक पहुंचने के लिए ठोस कदम उठाया.
करीब 10 दिनों बाद, 10 जनवरी 2026 को शिवम का शव बरामद हुआ, जिसे कथित तौर पर लावारिस हालत में फेंक दिया गया था.
मृतक के पिता का कहना है कि यदि 31 दिसंबर से 10 जनवरी के बीच पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई की होती, तो उनके बेटे की हत्या नहीं होती. इस बयान ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है.
RJD का सीधा आरोप
इस मामले को लेकर प्रदेश राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला.उन्होंने कहा है कि,
यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है. अपराधियों को खुली छूट दी गई और जो लोग न्याय की मांग कर रहे थे, उन्हीं पर पुलिस ने कार्रवाई की.
एजाज अहमद के अनुसार, 13 जनवरी 2026 को जब हजारों की संख्या में आम लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, तब पुलिस ने रातभर अभियान चलाकर प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया, जबकि असली अपराधी अब भी खुलेआम घूम रहा हैं.
सवाल जो उठ रहा हैं
अपहरण की सूचना के बावजूद पुलिस ने सक्रियता क्यों नहीं दिखाई?
क्या अपराधियों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण मिला?
विरोध करने वालों पर कार्रवाई और अपराधियों पर चुप्पी — यह दोहरा मापदंड क्यों?
यही सवाल अब इस मामले को सिर्फ आपराधिक नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं.
जांच समिति का गठन
इन्हीं गंभीर सवालों को देखते हुए, राजद प्रदेश अध्यक्ष श्री मंगनी लाल मंडल ने प्रदेश प्रधान महासचिव एवं विधायक श्री रणविजय साहू की अध्यक्षता में एक छह सदस्यीय जांच समिति गठित की है.
समिति के सदस्य:
रणविजय साहू – विधायक, प्रदेश प्रधान महासचिव (अध्यक्ष)
जितेन्द्र कुमार राय – विधायक, मढ़ौरा
सुरेन्द्र राम – विधायक, गड़खा
डॉ. करिश्मा राय – विधायक, परसा
निर्भय अम्बेदकर – प्रदेश महासचिव-सह-प्रमंडलीय प्रभारी, सारण
सुनील कुमार राय – जिलाध्यक्ष, सारण
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आगे क्या करेगी समिति?
राजद प्रवक्ता के अनुसार, जांच समिति तीन दिनों के भीतर घटनास्थल का दौरा करेगी, पीड़ित परिवार से मुलाकात करेगी और संबंधित पुलिस अधिकारियों से अब तक की गई कार्रवाई पर जवाब मांगेगी।समिति अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर राजद राज्य मुख्यालय को सौंपेगी.
राजनीतिक और सामाजिक असर
यह मामला बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर पहले से चल रही बहस को और तेज कर सकता है. विपक्ष इसे “प्रशासनिक असंवेदनशीलता” का उदाहरण बता रहा है, जबकि आम जनता के बीच भी गुस्सा और डर दोनों बढ़ रहा हैं.
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