भाकपा (माले) ने फरहान राजा की गिरफ्तारी को बताया दमनात्मक कार्रवाई
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,16 जनवरी — मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा शुरू होने से ठीक पहले पश्चिम चंपारण में भाकपा (माले) के युवा नेता और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) के राज्य नेता फरहान राजा की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है.भाकपा (माले) की राज्य कमिटी ने इस कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया है.
गिरफ्तारी को लेकर पार्टी का आरोप
भाकपा (माले) राज्य सचिव कुणाल ने जारी बयान में कहा कि फरहान राजा को बेतिया राज की जमीन पर रह रहे गरीब परिवारों के अधिकारों के समर्थन में आवाज़ उठाने और सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल करने के कारण गिरफ्तार किया गया है. पार्टी के अनुसार, यह कार्रवाई जनता की समस्याओं को दबाने और विरोध की आवाज़ों को चुप कराने की कोशिश है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के सवालों से बचने के लिए दमनकारी कदम उठा रही है.गरीबों के हक और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर सवाल उठाना अपराध नहीं होना चाहिए, कुणाल ने कहा.
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाइयाँ
भाकपा (माले) ने दावा किया कि यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री की किसी यात्रा के दौरान जनआंदोलनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की गई हो. पार्टी के अनुसार, पूर्व यात्राओं के दौरान भी आंदोलनकारियों पर दमन किया गया और समृद्धि यात्रा के दौरान भी वही रणनीति अपनाई जा रही है.
लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल
पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या अब जनता की समस्याओं पर सवाल उठाना अपराध बन चुका है. भाकपा (माले) का कहना है कि सरकार को जनता की आवाज़ से डरने के बजाय जवाबदेह बनना चाहिए.
भाकपा (माले) की मांगें
पार्टी ने इस मामले में निम्नलिखित मांगें रखी हैं,
फरहान राजा की तत्काल रिहाई.
शांतिपूर्ण आंदोलन और अभिव्यक्ति की आज़ादी का सम्मान.
जनहित के मुद्दों पर उठने वाली आवाज़ों पर कार्रवाई बंद की जाए.
भाकपा (माले) ने चेतावनी दी है कि यदि दमनात्मक कार्रवाइयाँ जारी रहीं, तो पार्टी राज्यव्यापी प्रतिरोध आंदोलन को तेज करेगी.
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निष्कर्ष
यह मामला केवल एक राजनीतिक नेता की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनहित के सवालों से जुड़ा हुआ है.विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार और प्रशासन को ऐसे मामलों में संतुलित और पारदर्शी रवैया अपनाना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों पर जनता का भरोसा बना रहे.

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