जनता देगी नकारात्मक राजनीति को जवाब! बिहार में विपक्ष की भूमिका पर बड़ा सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,4 दिसंबर 2025— बिहार की नई विधानसभा का पहला सत्र जहां सरकार के लिए नई शुरुआत का अवसर था, वहीं विपक्ष के लिए अपनी भूमिका को सार्थक सिद्ध करने का सुनहरा मौका.लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का बिना किसी आधिकारिक सूचना के सदन से अचानक गायब होना राजनीति का सबसे बड़ा प्रश्न बन गया—क्या विपक्ष जनता की आवाज़ उठाने में सक्षम है या सिर्फ राजनीतिक नाटक करने में व्यस्त?
इसी संदर्भ में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल का बयान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश लेकर आता है.उन्होंने विपक्ष के इस व्यवहार को गैर-जिम्मेदाराना हरकत” करार देते हुए कहा कि जनता नकारात्मक राजनीति को जल्द ही मुंहतोड़ जवाब देगी.
विपक्ष की अनुपस्थिति: लोकतंत्र के प्रति लापरवाही या सोची-समझी रणनीति?
बिहार ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां उसे गंभीर बहस, ठोस नीतिगत सुझाव और रचनात्मक विपक्ष की आवश्यकता है.
राज्य जिन मुद्दों से जूझ रहा है,
बेरोज़गारी
कृषि संकट
उद्योग और निवेश की कमी
कानून-व्यवस्था
बुनियादी ढांचा विकास
इन सभी पर सदन में सार्थक चर्चा अपेक्षित थी. परंतु नेता प्रतिपक्ष का गायब होना यह संदेश देता है कि विपक्ष मुद्दों से भाग रहा है और उसकी प्राथमिकता जनता नहीं, बल्कि सुर्खियाँ बटोरना है.
यह सिर्फ एक अनुपस्थिति नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गरिमा पर चोट है. सदन जनता की आवाज़ का मंच है, और उसका बहिष्कार या पलायन सीधे-सीधे उन करोड़ों मतदाताओं का अपमान है जिन्होंने विपक्ष को ताक़त दी.
एनडीए सरकार का दावा: विकास की गति तेज, विपक्ष गायब
प्रेम रंजन पटेल के मुताबिक, जहां एक ओर एनडीए सरकार विकास की रफ्तार बढ़ाने पर केंद्रित है, वहीं विपक्ष अपनी भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल हो चुका है.
सरकार लगातार इन क्षेत्रों पर काम कर रही है,
आधारभूत संरचना निर्माण
सुशासन की मजबूती
युवाओं को रोजगार के अवसर
कानून-व्यवस्था में सुधार
कृषि सेक्टर को आधुनिक तकनीक से जोड़ना
ऐसे समय में विपक्ष का सदन से अनुपस्थित रहना जनता के हितों की अनदेखी है.
क्या जनता नकारात्मक राजनीति को सचमुच जवाब देगी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज का मतदाता पहले की तुलना में अधिक जागरूक है.
मतदाता जानते हैं,
कौन काम कर रहा है
कौन सिर्फ बयानबाज़ी कर रहा है
कौन मुद्दों पर गंभीर है
और कौन सदन से भाग रहा है
तेजस्वी यादव की यह हरकत विपक्ष की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है. बिहार में पहले भी जिम्मेदार नेतृत्व की कमी का आरोप लग चुका है, और यह घटना उस धारणा को और मजबूत करती है.
प्रेम रंजन पटेल का दावा है कि जनता समय आने पर “गायब रहने वाली राजनीति” को ठुकरा देगी और कर्तव्य निभाने वाली राजनीति को तरजीह देगी.
विपक्ष की भूमिका क्यों ज़रूरी है?
एक स्वस्थ लोकतंत्र सिर्फ मजबूत सरकार से नहीं चलता.
मजबूत विपक्ष भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि,
वह सरकार की कमियों की ओर ध्यान दिलाता है
नीति निर्माण में संतुलन बनाए रखता है
जनता के असंतोष की आवाज़ बनता है
संसद/विधानसभा की बहस को सार्थक बनाता है
लेकिन यदि विपक्ष सदन से गायब ही रहे, तो वह अपना संविधानिक कर्तव्य कैसे निभाएगा?
यह सवाल सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष की जिम्मेदारी पर प्रश्नचिह्न है.
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अंतिम विश्लेषण: जनता चाहती है जवाबदेही, गायब नेता नहीं
तेजस्वी यादव द्वारा सदन से गायब होना चाहे राजनीतिक रणनीति हो या असावधानी, पर इसका संदेश साफ है,
जनता इससे खुश नहीं है.
बिहार एक विकासशील राज्य है और यहां रचनात्मक राजनीति की जरूरत है.
गायब रहने से न तो जनता के सवाल हल होते हैं और न ही विपक्ष मजबूत बनता है.
राजनीति में जवाबदेही महत्वपूर्ण है, और समय आने पर जनता हमेशा जवाब देना जानती है.
वो जवाब किसी भी पार्टी या नेता के लिए सकारात्मक भी हो सकता है और कठोर भी.
निष्कर्ष
तेजस्वी यादव के गायब रहने पर उठी राजनीति हल्की नहीं है.
इस घटना ने विपक्ष की विश्वसनीयता, नेतृत्व की गंभीरता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल का बयान इन सवालों को और तीखा करता है और यह संदेश देता है कि जनता नकारात्मक और कर्तव्यहीन राजनीति को अब बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है.
बिहार विकास चाहता है,
और विकास के लिए जवाबदेह नेतृत्व चाहिए, गायब रहने वाला नहीं.

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