सरकार की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना ,23 दिसंबर— देश में नशे के खिलाफ सख्त कानूनों और दावों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है.कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत द्वारा X (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए खुलासे ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दिया है.आरोप है कि शुभम जायसवाल, जो वाराणसी का निवासी बताया जा रहा है, बिना किसी वैध लाइसेंस के कोडीन सिरप का अवैध कारोबार कर करीब 500 करोड़ रुपये कमा कर देश से फरार हो गया है .
यह मामला केवल एक व्यक्ति की गैरकानूनी कमाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है, जिसके संरक्षण में उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और नेपाल तक यह नेटवर्क फलता-फूलता रहा है.
क्या है कोडीन सिरप और क्यों है यह इतना खतरनाक?
कोडीन सिरप एक नियंत्रित दवा है, जिसका सीमित मात्रा में चिकित्सीय उपयोग किया जाता है. लेकिन अवैध रूप से इसका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है, जिससे युवाओं में लत, अपराध और स्वास्थ्य संकट बढ़ता है.भारत और पड़ोसी देशों में यह एक संगठित नशा व्यापार का हिस्सा बन चुका है.
ऐसे में सवाल उठता है कि बिना लाइसेंस, बिना रोक-टोक और बिना कार्रवाई यह धंधा इतने बड़े पैमाने पर कैसे चलता रहा?
सरकार की नाक के नीचे फैला नेटवर्क
सुप्रिया श्रीनेत के अनुसार, यह अवैध कारोबार उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल से लेकर बांग्लादेश और नेपाल तक फैला हुआ था. सीमावर्ती इलाकों में इतनी बड़ी मात्रा में कोडीन सिरप की आवाजाही तभी संभव है, जब स्थानीय प्रशासन, पुलिस या राजनीतिक संरक्षण मौजूद हो.
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब एजेंसियां छोटे-मोटे मामलों में तुरंत कार्रवाई करती हैं, तो 500 करोड़ के इस नेटवर्क पर वर्षों तक किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी?
कौन हैं इस गोरखधंधे के बाकी खिलाड़ी?
इस मामले में सिर्फ शुभम जायसवाल ही नहीं, बल्कि अमित सिंह टाटा और आलोक सिपाही जैसे नाम भी सामने आए हैं. आरोप है कि ये लोग इस पूरे नेटवर्क के अहम खिलाड़ी थे.
यदि ये नाम सार्वजनिक हो चुके हैं, तो अब तक इनके खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जांच एजेंसियां किसी दबाव में हैं या जानबूझकर देरी की जा रही है?
राजनीतिक कनेक्शन और सबसे बड़ा सवाल
मामले को और गंभीर बनाता है वह आरोप, जिसमें कहा गया है कि BJP की सहयोगी पार्टी JDU के राष्ट्रीय महासचिव धनंजय सिंह इन आरोपियों को अपना छोटा भाई बताता हैं.
यही वह बिंदु है, जहां यह मामला केवल अपराध नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और जवाबदेही का बन जाता है. सुप्रिया श्रीनेत ने सीधा सवाल पूछा है कि,
तो क्या बड़े भईया के खिलाफ भी कार्रवाई होगी?
यह सवाल देश की राजनीति और कानून व्यवस्था के लिए बेहद अहम है.अगर आम आदमी के लिए कानून है, तो क्या सत्ता से जुड़े लोगों के लिए अलग नियम हैं?
कौन दे रहा है संरक्षण?
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि, कौन दे रहा था इस नेटवर्क को संरक्षण?
क्या स्थानीय प्रशासन ने आंखें मूंद रखी थीं?
क्या पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग की भूमिका की जांच होगी?
क्या राजनीतिक संबंधों की निष्पक्ष जांच संभव है?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक ड्रग-फ्री इंडिया जैसे नारे खोखले ही लगेंगे.
ये भी पढ़े :बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई अल्पसंख्यकों पर बढ़ती बर्बरता: भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल
ये भी पढ़े :मनरेगा कानून: ग्रामीण भारत को अधिकार देने वाली ऐतिहासिक पहल
जांच, जवाबदेही और लोकतंत्र
लोकतंत्र में विपक्ष का काम सवाल पूछना है, और सरकार का कर्तव्य जवाब देना. यह मामला केवल एक ट्वीट नहीं, बल्कि जनहित, युवाओं के भविष्य और कानून के राज से जुड़ा है.
यदि 500 करोड़ का अवैध कारोबार देश छोड़ कर भाग सकता है, तो यह सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता है. अब जरूरत है,
स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की,
सभी आरोपियों के खिलाफ समान कार्रवाई की,
राजनीतिक दबाव से मुक्त जांच एजेंसियों की,
निष्कर्ष
कोडीन सिरप घोटाले ने यह साफ कर दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल भाषणों से नहीं, बल्कि ईमानदार कार्रवाई से जीती जाएगी. सुप्रिया श्रीनेत के सवाल आज देश के हर जागरूक नागरिक के सवाल हैं.
अब देखना यह है कि सरकार जवाब देती है या चुप्पी साधे रहती है।
क्योंकि चुप्पी भी कभी-कभी अपराध का संरक्षण बन जाती है.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.



















