आरोपी बाबा से मुलाकात और संबंधों ने बढ़ाई चिंता!
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना 21 मार्च 2026: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर Priyanka Bharti जो राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.जे.डी. के है उनके द्वारा किया गया एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष Rupali Chakankar को लेकर गंभीर आरोप लगाया गया हैं. इस पोस्ट में दावा किया गया है कि आयोग की अध्यक्ष एक ऐसे स्वयंभू बाबा और ज्योतिषी Ashok Kharat के संपर्क में थीं, जिन पर पहले से ही यौन उत्पीड़न और बलात्कार जैसे गंभीर आरोप लगा हुआ हैं.
यह मामला केवल एक व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे महिला सुरक्षा और न्याय प्रणाली पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो रहा हैं. जिस संस्था का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना है, उसी संस्था की प्रमुख पर इस तरह के आरोप लगना बेहद चिंताजनक है.
क्या है पूरा मामला?
पोस्ट के अनुसार, आरोपी बाबा अशोक खरात के खिलाफ पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आया था. बताया जा रहा है कि उनके पास से कथित तौर पर 50 से अधिक अश्लील वीडियो रिकॉर्डिंग मिली थीं, जो गंभीर अपराधों की ओर इशारा करती हैं. ऐसे व्यक्ति के साथ महिला आयोग की अध्यक्ष के संपर्क में रहने और यहां तक कि गिरफ्तारी के बाद भी उनसे मिलने की बात सामने आना, आम जनता के मन में कई सवाल खड़ा करता है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और दावों के मुताबिक, अध्यक्ष द्वारा आरोपी के पैर धोने जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस को जरूर तेज कर दिया है.
महिला आयोग की भूमिका पर उठे सवाल
महिला आयोग का गठन इसलिए किया जाता है ताकि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हो सके और उन्हें न्याय दिलाने में सहायता मिल सके.लेकिन जब उसी संस्था की अध्यक्ष पर इस तरह के आरोप लगते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पीड़ित महिलाओं को निष्पक्ष न्याय मिल पाएगा?
Rashtriya Janata Dal से जुड़ी नेता प्रियंका भारती ने अपने पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसी स्थिति में महिला आयोग किसी पीड़िता के लिए मजबूती से खड़ा हो पाएगा. उन्होंने इसे एक व्यापक प्रवृत्ति बताते हुए राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा है.
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सामाजिक असर
इस पूरे मामले ने राजनीतिक माहौल को भी गर्म कर दिया है. विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर हमला बोला है, जबकि सत्ताधारी पक्ष की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
यह विवाद केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी एक गहरी चिंता पैदा करता है. यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही ऐसे विवादों में घिरे हों, तो आम जनता का विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है.
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सोशल मीडिया की भूमिका
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया एक मजबूत माध्यम बन चुका है, जहां किसी भी मुद्दे को तेजी से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है. इस मामले में भी X पर किए गए एक पोस्ट ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है.
हालांकि, यह भी जरूरी है कि ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि की जाए और बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर न पहुंचा जाए.क्योंकि सोशल मीडिया पर फैलने वाली हर जानकारी पूरी तरह सत्य हो, यह जरूरी नहीं है.
निष्कर्ष
महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष से जुड़े इस विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महिला सुरक्षा से जुड़ी संस्थाएं वास्तव में निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से काम कर रही हैं?
जब तक इस मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस घटना ने सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को एक बार फिर उजागर कर दिया है.

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