सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख़ के योगदान पर चर्चा
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना 14 अप्रैल 2026: पटना विश्वविद्यालय एक बार फिर सामाजिक चेतना और छात्र एकजुटता का केंद्र बनकर उभरा, जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) द्वारा ज्योतिबा फुले जयंती के अवसर पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है .यह आयोजन दरभंगा हाउस स्थित प्राचीन भारतीय इतिहास (Ancient Indian History) विभाग में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसके साथ ही AISA दरभंगा हाउस इकाई का प्रथम यूनिट सम्मेलन भी सफलतापूर्वक आयोजित किया गया.

यह कार्यक्रम केवल एक जयंती समारोह नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा के अधिकार पर गंभीर विमर्श का मंच बना. कार्यक्रम में वक्ताओं ने महात्मा ज्योतिबा फुले के विचारों को वर्तमान संदर्भ में जोड़ते हुए छात्र राजनीति की दिशा और दशा पर चर्चा की है.
मुख्य वक्ताओं ने रखे विचार, फुले की विरासत पर जोर
कार्यक्रम में AISA के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे. उन्होंने अपने संबोधन में ज्योतिबा फुले के विचारों को आज के समय में बेहद प्रासंगिक बताया. उन्होंने कहा कि फुले का संघर्ष केवल जाति व्यवस्था के खिलाफ नहीं था, बल्कि वह शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय की व्यापक लड़ाई थी, जिसे आज के छात्र आंदोलनों को आगे बढ़ाना होगा.
कार्यक्रम में AISA पटना विश्वविद्यालय के संयोजक कॉमरेड नितीश सहित कई छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही. इसमें कॉमरेड आज़ाद, सबा आफ़रीन, दीपु कुमार, शंकर भगत, स्वराज, कुमार दिव्यम और अन्य साथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.
सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख़ के योगदान पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान कॉमरेड सबा आफ़रीन ने ज्योतिबा फुले के संघर्षों की विरासत को विस्तार से समझाया.उन्होंने विशेष रूप से सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख़ के योगदान को रेखांकित किया, जिन्होंने महिला शिक्षा और सामाजिक बदलाव की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई.
उन्होंने कहा कि आज के छात्र जीवन और राजनीति में इन महान हस्तियों के विचारों को अपनाना बेहद जरूरी है. इससे न केवल समाज में बराबरी का भाव मजबूत होगा, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी समावेशिता बढ़ेगी.
छात्र राजनीति और सामाजिक न्याय पर गहन विमर्श
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किया. कॉमरेड विश्वजीत ने ज्योतिबा फुले के स्त्रीवादी दृष्टिकोण पर चर्चा करते हुए कहा कि उनका काम भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति को समझने और सुधारने की दिशा में ऐतिहासिक रहा है.
कॉमरेड अदिति ने फुले के सामाजिक संघर्षों को विस्तार से रखते हुए कहा कि आज भी समाज में असमानता और भेदभाव के खिलाफ लड़ाई जारी है, जिसमें छात्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.
इस दौरान वक्ताओं ने शिक्षा के निजीकरण, बेरोजगारी और कैंपस में लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा की गई.
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दरभंगा हाउस AISA यूनिट का गठन, नए नेतृत्व का चयन
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा AISA दरभंगा हाउस यूनिट का गठन रहा. इस दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नए पदाधिकारियों का चयन किया गया.
कॉमरेड आज़ाद को यूनिट अध्यक्ष और कॉमरेड दीपु को सचिव चुना गया। वहीं, कॉमरेड शंकर को सोशल मीडिया हेड की जिम्मेदारी सौंपी गई.
इसके अलावा, कॉमरेड आज़ाद, दीपु, पल्लवी, स्वराज, नितीश, आशीष, सबा, शंकर, अभिषेक, सुमित और मोनू को काउंसिल सदस्य के रूप में चुना गया. इन सभी नामों को उपस्थित साथियों ने तालियों के साथ सर्वसम्मति से पारित किया.
छात्रों ने लिया सामाजिक बदलाव का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी साथियों ने ज्योतिबा फुले को पुष्पांजलि अर्पित की और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. नवनिर्वाचित यूनिट और उपस्थित छात्रों ने यह तय किया कि वे कैंपस और समाज में लोकतंत्र, समानता और न्याय की लड़ाई को और तेज़ करेंगे.
यह आयोजन इस बात का संकेत है कि पटना विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव और वैचारिक संघर्ष का भी माध्यम बन रही है.
निष्कर्ष
ज्योतिबा फुले जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि था, बल्कि यह छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना. AISA दरभंगा हाउस यूनिट का गठन छात्र संगठन को नई मजबूती देगा और आने वाले समय में कैंपस की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
इस तरह के आयोजन यह साबित करते हैं कि जब युवा वर्ग जागरूक और संगठित होता है, तो वह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है

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