महिला सुरक्षा को लेकर कांग्रेस ने यूपी सरकार को घेरा, बढ़ते अपराधों पर पीएम मोदी से भी जवाबदेही की मांग उठाई
तीसरा पक्ष ब्यूरो दिल्ली 28 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है.कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर कई दर्दनाक घटनाओं का हवाला देते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाया हैं.कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल और ओडिशा कांग्रेस प्रभारी अजय लल्लू के बयान के जरिए यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है.
कांग्रेस द्वारा साझा किए गए पोस्ट में यूपी के अलग-अलग जिलों की कई भयावह घटनाओं का जिक्र किया गया है. जिनमें महिलाओं और बच्चियों की हत्या, रेप, गैंगरेप और अपहरण जैसी घटनाएं शामिल हैं. पार्टी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दूसरे राज्यों में चुनाव प्रचार और राजनीतिक भाषणों में व्यस्त हैं.
यूपी में महिला अपराध के मामलों ने बढ़ाई चिंता
कांग्रेस ने जिन घटनाओं को उजागर किया, उनमें हरदोई, प्रतापगढ़, मेरठ, कानपुर, फर्रुखाबाद, बुलंदशहर और गोरखपुर जैसे जिलों की घटनाएं शामिल हैं.इन मामलों में कहीं महिला की हत्या, कहीं बच्चियों के साथ रेप, तो कहीं अपहरण के बाद गैंगरेप जैसी घटनाओं ने समाज को झकझोर दिया है.
राजनीतिक आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है या नहीं?
कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में हर साल लगभग 65,000 महिला अपराध के मामले दर्ज होते हैं.औसतन हर महीने करीब 5,500 और प्रति घंटे लगभग 8 महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती हैं.ये आंकड़े सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था की गंभीर चुनौती को दर्शाता हैं.
योगी सरकार पर विपक्ष का सीधा हमला
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा है कि जब प्रदेश की बेटियां असुरक्षित हैं, तब मुख्यमंत्री दूसरे राज्यों में जाकर फिल्मी डायलॉग बोलने में व्यस्त हैं. विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपराध नियंत्रण के बजाय अपनी छवि निर्माण पर अधिक ध्यान दे रही है.
अजय लल्लू ने सवाल उठाया है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में महिला सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं, तो क्या वे गाजीपुर जैसे उन पीड़ित परिवारों से भी मिलेंगे जिन्होंने अपनी बेटियों को खोया है?
यह सवाल सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और जवाबदेही से भी जुड़ा है.
महिला सुरक्षा: चुनावी मुद्दा या वास्तविक प्राथमिकता?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां कानून-व्यवस्था हमेशा से राजनीतिक विमर्श का बड़ा विषय रही है.योगी सरकार अक्सर जीरो टॉलरेंस नीति और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का दावा करती रही है, लेकिन विपक्ष इन दावों को जमीनी हकीकत से अलग बता रहा है.
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब अपराध दर में वास्तविक कमी दिखे और पीड़ितों को समय पर न्याय मिले.सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से जनता के मन में भरोसा कायम नहीं किया जा सकता.
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समाज के लिए बड़ा संदेश
महिला अपराध किसी एक पार्टी या सरकार का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है.जब बच्चियों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक के खिलाफ अपराध बढ़ते हैं, तो यह सामाजिक ढांचे, पुलिसिंग और न्याय व्यवस्था सभी पर सवाल खड़े करता है.
जरूरत है कि महिला सुरक्षा को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठाकर ठोस नीति, तेज न्याय प्रक्रिया और सामाजिक जागरूकता के जरिए प्राथमिकता दी जाए.
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर कांग्रेस के हमले ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था को राष्ट्रीय बहस में ला दिया है. योगी सरकार के सामने चुनौती सिर्फ विपक्ष के आरोपों का जवाब देना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी दोनों के लिए यह मुद्दा राजनीतिक से ज्यादा नैतिक जिम्मेदारी का है.क्योंकि किसी भी राज्य की असली प्रगति तभी मानी जाती है जब उसकी महिलाएं और बेटियां सुरक्षित हों.
महिला सुरक्षा पर राजनीति हो सकती है, लेकिन समाधान सिर्फ संवेदनशील शासन, सख्त कानून और ईमानदार प्रशासन से ही निकलेगा.

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